अयोध्या केस Live: ‘मंदिर-मस्जिद की भूमि का अधिग्रहण कर सकते हैं लेकिन …’

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि एक बार फिर से मध्यस्थता की पहल शुरू करने की कोशिश हुई है.

अयोध्या मामले में सुनवाई के 24वें दिन सीधे प्रसारण की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. शीर्ष अदालत ने रजिस्ट्री को नोटिस जारी कर पूछा कि आखिर सीधे प्रसारण की व्यवस्था बनाने में कितने दिनों का वक्त लगेगा. बता दें कि आरएसएस के पूर्व विचारक केएन गोविंदाचार्य ने इस बारे में याचिका दायर की थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है. हालांकि मुस्लिम पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस मांग का विरोध किया है.

इसी बीच मध्यस्थता वाली ख़बर को लेकर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा मीडिया में ख़बरे आई है कि मध्यस्थता के लिए चिठ्ठी लिखी गई है. जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमको इसकी कोई जानकारी नहीं है. राजीव धवन ने कहा कि ऐसे लोगो के खिलाफ अवमानना का मामला चलाया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है.

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि एक बार फिर से मध्यस्थता की पहल शुरू करने की कोशिश हुई है. इतना ही नहीं इस बारे में दावा किया गया है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की तरफ से पत्र लिखकर मध्यस्थता की अपील की गई है. दरअसल कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पहल भी की थी पर 155 दिनों की कोशिश असफल रही और अब मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

सुनवाई LIVE

# राजीव धवन ने कहा कि आप मंदिर या मस्जिद की भूमि का अधिग्रहण कर सकते हैं, लेकिन आप एक देवता भूमि नहीं प्राप्त कर सकते हैं.

# राजीव धवन ने आरोप लगाया कि रामजन्मभूमि न्यास पूरी ज़मीन पर कब्ज़ा करना चाह रहा है और एक नया मन्दिर बनने की बात कर रहा है.

# राजीव धवन ने कहा कि 1949 तक विवादित ढांचे के बाहरी आंगन में पूजा की जाती थी, मूर्ति अंदरूनी हिस्से पर किसी भी तरह का दावा नहीं किया गया था, बाहरी हिस्सा VHP द्वारा जबर्दस्ती कब्ज़े में लिया गया था.

# राजीव धवन ने कहा कि अगर 1885 से भी प्रारंभिक अधिकार मांग को माना को देंखे तो उन्होंने बाहरी आंगन की मांग की है क्यों मठरी बाहरी आंगन में रखी हुई थे.
सुनवाई कल रहेगी जारी. राजीव धवन रखेंगे दलील.

# राजीव धवन ने कहा कि जब देवता अपने-आपको प्रकट करते है तो किसी विशिष्ट रूप में प्रकट होते है और उसकी पवित्रता होती है
# जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या आप कह रहे हैं कि एक देवता का एक रूप होना चाहिए?
# राजीव धवन ने कहा कि हां, देवता का एक रूप होना चाहिए. जिसको भी देवता माना जाए. भगवान का कोई रूप नहीं है लेकिन एक देवता का एक रूप होना चाहिए.
# धवन ने कहा कि पहचान के उद्देश्य से एक सकारात्मक कार्य होना चाहिए, वह सकारात्मक अभिव्यक्ति के लिए दावा नहीं कर रहे हैं वह विश्वास के आधार पर दावा कर रहे हैं.