Ayodhya case hearing on 29th day, ‘सेवादार कह रहे हैं पहले मंदिर नहीं था, अगर मंदिर नहीं था तो आप सेवादार कैसे हुए’
Ayodhya case hearing on 29th day, ‘सेवादार कह रहे हैं पहले मंदिर नहीं था, अगर मंदिर नहीं था तो आप सेवादार कैसे हुए’

‘सेवादार कह रहे हैं पहले मंदिर नहीं था, अगर मंदिर नहीं था तो आप सेवादार कैसे हुए’

जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है, वो कैसे?
Ayodhya case hearing on 29th day, ‘सेवादार कह रहे हैं पहले मंदिर नहीं था, अगर मंदिर नहीं था तो आप सेवादार कैसे हुए’

अयोध्या मामले में सोमवार को 29वें दिन की सुनवाई जारी है. आज सुप्रीम कोर्ट 1 घंटे ज़्यादा यानी 5 बजे तक मामले की सुनवाई करेगा. अयोध्या केस में मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने सोोमवार को दलील देते हुए कहा कि हम राम का सम्मान करते हैं, जन्मस्थान का भी सम्मान करते हैं. इस देश में अगर राम और अल्लाह का सम्मान नहीं होगा, देश खत्म हो जाएगा. धवन ने कहा कि विवाद तो राम के जन्मस्थान को लेकर है कि वह कहां है!

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# धवन ने कहा कि गुरुग्रंथ साहिब केस का ज़िक्र करते हुए कहा गया था कि गुरुग्रंथ खुद में भगवान है, इसपर कोर्ट ने कहा था कि एक ही बुलडिंग के दो न्यायिक व्यक्ति नही हो सकते एक गुरुद्वारा और दूसरा गुरुग्रंथ है. कोर्ट ने कहा था अगर गुरुग्रंथ अपने आप मे न्यायिक व्यक्ति हो गया तो गुरुग्रंथ साहिब की हर कॉपी न्यायिक व्यक्ति हो जाएगी.

# जस्टिस भूषण ने पूछा कि मूर्ति के बिना भी कोई मन्दिर हो सकता है?

# धवन ने एक केस का ज़िक्र करते हुए कहा कि सेवादार क्लेम कर रहे है और कह रहे हैं कि पहले मन्दिर नही था. अगर मन्दिर नही था तो आप कैसे सेवादार हुए.

# धवन ने कहा कि औरंगजेब ने कई मंदिर बनवाए, शाहजहां के बाद वह बैंक करप्ट हो गए थे, उसने दो लड़ाइयां भी लड़ी थी, इस लिए उन्होंने जजिया लागू किया,

# धवन ने कहा कि मंदिर उस स्थान को कहते है जहां लोग भगवान की पूजा करते है.

# राजीव धवन ने कहा कि धर्मशास्त्र में अपने से कुछ नहीं जोड़ा जा सकता, इस बारे में बहुत कुछ चर्चाऐं चलती रहती हैं. जैसे कि पीएम मोदी कहते हैं कि हम देश बदल रहे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं समझा जाना चाहिए कि संविधान बदला जा रहा है.

# धवन ने हिन्दू पक्ष के गवाहो की गवाही को पढ़ते हुए बताया कि दो तरह की परिक्रमा होती है पंच कोसी, चौदा कोसी परिक्रमा, पूरे अयोध्या की परिक्रमा होती थी और राम चबूतरा की भी परिक्रमा होती थी.

धवन ने कहा कि परिक्रमा के बारे में सभी गवाहों ने अलग अलग बात कही है कुछ ने कहा राम चबूतरे परिक्रमा होती थी, कुछ ने कहा कि दक्षिण में परिक्रमा होती थी.

# राजीव धवन की दलील – पूरी विवादित जमीन जन्मस्थान नहीं हो सकती, जैसा कि हिंदू पक्ष दावा करते हैं. कुछ तो निश्चित स्थान होगा. पूरा क्षेत्र जन्मस्थान नहीं हो सकता.

# न्यायमूर्ति बोबडे – क्या हमें न्यायिक इकाई के साथ देवत्व के पहलू को देखने की जरूरत है

# न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ – इसे एक न्यायिक इकाई बनाने का उद्देश्य क्या है?
राजीव धवन ने के परासरन तर्क का संदर्भ देते हुए कहा कि ‘के परासरन ने अपनी दलीलों में आध्यात्मिकता और दिव्यता के बारे में उल्लेख किया है. इसलिए देवत्व की एक अहम भूमिका है.

TN सरस्वती के बारे में उल्लेख किया गया था जो एक न्यायिक व्यक्ति से संबंधित है.

# राजीव धवन ने कहा कि कानून इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है और ऐसे में गलत तरीके से कब्जा करने वालों का यह स्थान नहीं है.

# राजीव धवन- न्यायिक व्यक्ति के बारे में स्पष्ट करते हुए कोर्ट को बताते हैं कि किस समय कोई विश्वास एक वस्तुगत रूप बन जाता है और किस समय एक वस्तुगत रूप न्यायिक व्यक्तित्व बन जाता है.

जस्टिस भूषण- कहते हैं कि जनमस्थान महाकाव्यों और कई चीजों पर आधारित है, लेकिन मूर्ति की अवधारणा अलग है.

जस्टिस भूषण – स्वयंभु की अवधारणा जन्मस्थान से अलग है.

राजीव धवन- वादी 5 का इरादा सेवादार को नष्ट करके एक नया मंदिर बनाना और उस पर कब्जा करना था.

# शीर्ष अदालत इस समय अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर-बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही है.

Ayodhya case hearing on 29th day, ‘सेवादार कह रहे हैं पहले मंदिर नहीं था, अगर मंदिर नहीं था तो आप सेवादार कैसे हुए’
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