Ayodhya: स्वयंंभू का मतलब प्रकट होना होता है, इसे किसी जगह से जोड़ना गलत: मुस्लिम पक्षकार

मामले की सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं.

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में हिंदू पक्ष की तरफ से दलीलें पूरी होने के बाद सोमवार से सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम पक्षकारों की बहस सुनेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी हिन्दू पक्षों की बहस की सुनवाई 16 दिनों में पूरी कर ली है, जिसमें निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान शामिल हैं. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ वकील राजीव धवन सोमवार से निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान (देवता और उनका जन्म स्थान) के वकीलों की तरफ से पेश की गई बहसों का पाइंट वाइज जवाब अदालत के समक्ष पेश करेंगे.

# राजीव धवन ने कहा कि हुकुमचंद केस में जैन समुदाय के मामले में पवित्र पहाड़ी के मामले में मतभेद था, उन्होंने कहा था कि आपने शरीर के कुछ हिस्सों को वहां रखा है और हम शरीर की पूजा नहीं करते हैं. धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष के बीच मूर्तियों को रखने के संबंध में श्वेतांबर और दिग्मेश्वर के बीच भी मतभेद थे.

# धवन ने इलाहाबाद के HC के फैसले के अंश पढ़ते हुए कहा फैसले में लिखा है. एक शेबेट जो अपने अधिकारों का दावा करता है उसे देवता को वाद में शामिल करने की आवश्यकता नहीं है. कल सुप्रीम कोर्ट में राजीव धवन अपनी जिरह जारी रखेंगे.

# अयोध्या मामले में बेंच लंच के लिए उठी

# राजीव धवन ने कहा कि 1939 में एक मस्जिद तोड़ी गई,1949 में एक मूर्ति को रखा गया, 1992 में मस्जिद को ध्वस्त किया गया , किस इक्विटी का कानून के तहत अखाड़ा अधिकारों को संरक्षित किया जा सकता है

# मुस्लिम पक्षकार के वकील धवन ने कहा कि स्वयंभू का मतलब भगवान का प्रकट होना होता है, इसको किसी खास जगह से नहीं जोड़ा जा सकता है, हम स्वयंंभू और परिक्रमा के दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर सकते.

# धवन ने कहा कि हम इस मामले में किसी अनुभवहीन इतिहासकार की बात नही मान सकते है, हम सभी अनुभवहीन ही है. डी वाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि आप ने भी कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य दिए है कोई ऐसा साक्ष्य है जिसपर दोनों ने भरोसा जताया हो.

# राजीव धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की तरफ से भारत आने वाले यात्रियों की हवाला दे कर कहा कि उन यात्रियों ने मस्जिद के बारे में नही लिखा है, क्या इस आधार पर यह मान लिया जाए कि वह मस्जिद नही था, मारको पोलो ने अपनी किताब में चीन की दीवार के बारे में लिखा था.

# धवन ने कहा कि प्रायिकता का पूर्व विस्तार दर्शाता है कि विवाद में भवन औरंगजेब के कार्यकाल के दौरान बनाया गया था, क्यों कि अकबर, शाहजहां या हुमायुं के शासनकाल में इसकी रचना नहीं हो सकती थी.

# धवन ने कहा कि मोर कमल की तस्वीर मिलने का यह मतलब नही की वह मस्जिद नही जो सकती, रोमन कल्चर में इसकी जगह है.

# जजमेंट की कार्यप्रणाली की ये समस्याएं हैं. गज़ेटियर ने शुरुआत में क्या कहा है? उसने कहा है कि ये गैज़ेट उन्हें इसलिए तैयार करने के लिए दिया गया ताकि ब्रिटिश लोगों को जानकारी दे सकें. क्या हम 1858 से पहले केगज़ेटियर पर भरोसा कर सकते हैं- धवन

# जस्टिस अग्रवाल ने अपने अनुमान और सम्भावनाओं के आधार पर मन्दिर के अस्तित्व पर अपनी findings दी हैं- धवन

#  धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा imagination द्वारा लिखी गयी थी. जस्टिस बोबडे – कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा.

#  धवन  ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है. जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है-

# राजीव धवन ने कहा कि बाबर के विदेशी हमलावर होने पर वो कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, धवन ने कहा कि साबित करने के लिए जिरह करूंगा कि वहां मस्ज़िद थी. राजीव धवन ने कहा कि आप कौन का कानून यह पर लागू करेंगे, क्या हमे वेदों और स्कंद पुराण को लागू करना चाहिए. राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट को धर्म ने न्याय, साम्यता और शुद्ध विवेक-व्यवस्था और कुछ यात्रियों का संक्षिप्त कॉम्पलीकेशन दिया

# हम सिर्फ इसलिए इस पक्ष मज़बूती से देख रहे हैं क्योंकि वहाँ की शिला पर एक मोर या कमल था इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद, से पहले एक विशाल संरचना थी- धवन

# मिस्टर मिश्रा ने 2 चीजों के बारे में बहस की, पहला क्योंकि उनके बहस को हाई कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था. उन्होंने हाई कोर्ट के सामने findings की बजाय अपने ही arguments के 34 पेज पढ़ दिए. इसके बाद उन्होंने कहा कि देखिये बेंच ने उनके arguments के साथ क्या किया, इसे बदला जाए. इस मामले में हम कौन सा कानून लागू करेंगे। क्या हम ये पूछेंगे कि ये बाबर ने किया था या नहीं- धवन

#धवन: जब 3 गवाहो से ये पूछा गया कि उन्होंने विवादित ज़मीन पर क्या पढ़ा तो उन्होंने कहा ‘अल्लाह’।
शहीदगंज केस में भी यह देखा गया था कि मुद्दई को यह साबित करना पड़ा था कि अधिकार किसका है।
#धवन: हुकुमचंद केस के में जैन समुदाय का विश्वास पवित्र पहाड़ी के सम्बंध में भिन्न था। उन्होंने कहा था आपने एक शरीर के कुछ हिस्सों को वहां रखा है और हम शरीर की पूजा नहीं करते।
मूर्तियों को रखने के सम्बंध में श्वेतांबरों और दिगम्बरों के बीच में भी मतभेद थे

# राजीव धवन: मेरे मित्र वैद्यनाथन ने अयोध्या में लोगों द्वारा परिक्रमा करने संबंधी एक दलील दी, लेकिन कोर्ट को मैं बताना चाहता हूं कि पूजा के लिए की जाने वाली भगवान की परिक्रमा सबूत नहीं हो सकती. यहां इसे लेकर इतनी दलीलें दी गई लेकिन इन्हें सुनने के बाद भी मैं ये नहीं दिखा सकता कि परिक्रमा कहां है. इसलिए यह सबूत नहीं है.

# राजीव धवन ने कोर्ट से सप्ताह के बीच मे बुधवार को खुद के लिए ब्रेक की मांग की. धवन ने कहा कि उनके लिए लगातार दलीलें देना मुश्किल होगा. CJI ने कहा- इससे कोर्ट को परेशानी होगी. आप चाहे तो शुक्रवार को ब्रेक ले सकते हैं. धवन- ठीक है, मैं सहमत हूं.

# वह कौनसा कानून है जो आपने लिया है? हम जिस कानून का अनुसरण करते हैं वो वैदिक कानून नहीं है. योर लॉर्डशिप, लीगल सिस्टम 1858 में शुरू हुआ था- राजीव धवन

# मैं अपनी दलीलें शुरू करने से पहले माफी मांगना चाहता हूं. मैं मीडिया में अपनी टिप्पणियों और वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा पर की गई टिप्पणियों के लिए भी माफी मांगता हूं. सभी जगह यह महसूस किया जा रहा है कि मैं चिड़चिड़ा होता जा रहा हूं-राजीव धवन

# मुस्लिम पक्षकारों की ओर से ADV राजीव धवन ने अपनी दलीलें शुरू की.

# कपिल सिब्बल ने राजीव धवन की तरफ से कंटेमेंट पीटीशन मूव किया कोर्ट ने सुनवाई का भरोसा दिया.

# वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन के मुस्लिम पक्षों कि ओर से पेश होने पर मिली धमकी के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल यानी मंगलवार को करेगा सुनवाई.

धवन ने शुरू में अदालत को बताया था कि वह अपनी बहस 20 दिनों में पूरी करेंगे. इसका अर्थ यह है कि मामले की दैनिक सुनवाई तकनीकी रूप से सितंबर के अंत तक खत्म होगी. इससे राजनीतिक रूप से विवादास्पद इस मुद्दे पर अपना फैसला सुनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को एक महीने से अधिक का समय मिल जाएगा.

मामले की सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं. मुस्लिम पक्षकार इस मामले में अपनी बहस में विवादास्पद स्थल पर निर्मोही अखाड़े के दावे का प्रतिवाद कर सकते हैं. यह अयोध्या टाइटल सूट की सुनवाई में एक खास चरण हो सकता है, खासतौर से तब जब निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से कह दिया है कि वह रामलला विराजमान द्वारा दायर लॉसूट का विरोध नहीं कर रहा.