Ayodhya land dispute live hearing, अयोध्या केस में सुनवाई के दौरान SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे ‘जय विजय’ द्वारपाल?
Ayodhya land dispute live hearing, अयोध्या केस में सुनवाई के दौरान SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे ‘जय विजय’ द्वारपाल?

अयोध्या केस में सुनवाई के दौरान SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे ‘जय विजय’ द्वारपाल?

मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन दलील दे रहे हैं कि 'जन्मस्थान' एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता.
Ayodhya land dispute live hearing, अयोध्या केस में सुनवाई के दौरान SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे ‘जय विजय’ द्वारपाल?

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार की सुनवाई पूरी गो गई है. मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने अपना पक्ष रखा. जस्टिस भूषण ने पूछा, ”हनुमान द्वार पर द्वारपाल क्यों बने थे? जय विजय?”

इस पर राजीव धवन ने कहा, ”19वीं सदी के उत्तरार्ध 1873-1877 के बीच जब वहां दोनों तरह की प्रार्थनाएं हो रही थीं तब की होंगी.” फिर जस्टिस भूषण ने कहा, ”ये तो विष्णु मंदिरों के द्वारपाल होते थे जय विजय. इन जय विजय की मूर्ति वाले कसौटी खंबों का ज़िक्र 1428 में भी मिलता है.” इस पर धवन ने कहा, ”मुझे वो फोटो मैग्निफाइंग ग्लास यानी आतिशी शीशे से देखनी होंगी.”

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, ”लेकिन ये खंबों वाली दलील और चित्र मस्जिद के होने या ना होने से नहीं बल्कि वहां हिन्दू पवित्र स्थान होने की तस्दीक करते हैं.” बहस के दौरान धवन ने कहा, ”14 खंबे चाहे ढहाए गए या मिले, इससे मन्दिर होने की पुष्टि कैसे हो सकती है कि मुस्लिम ही कहीं और से लाए हों!” धवन ने कहा कि जिलानी बोलेंगे. जिलानी ने कहा कि हमारी तो ये दलील ही नहीं थी.

कोर्ट ने इमारत में बनी फूल और प्राणियों की आकृतियों पर सवाल पूछा तो धवन ने निर्मोही अखाड़े के लिखित बयान के हवाले से कहा- द्वार को लेकर भी बड़ा विवाद था. 13 दिसंबर 1877 में विवादित इमारत की एक बाहरी दीवार में एक दरवाज़ा सिंहद्वार बनाया गया था ताकि दोनों के लिए अलग अलग प्रवेश निकास हों.

राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम को हिंदुस्तान का इमाम करार दिया. उर्दू कवि अल्लामा इकबाल का मशहूर शेर पढ़ते हुए राजीव धवन ने कहा, ‘है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़ अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद.’ यही नहीं उन्होंने जन्म स्थान को एक न्यायिक व्यक्ति माने जाने का भी विराध किया.

राजीव धवन ने कहा कि मूर्त्ति के रूप में स्वयंभू या तो आत्म-अभिव्यक्ति का रूप धारण कर सकता है या फिर मानव भी. हिन्दू पक्ष भगवान राम जन्म स्थल का सही स्थान बताने में नाकाम रहे है. इसलिए सिर्फ विश्वास स्वयंभूमि होने के लिए काफी नहीं है. यह एक ऐसे अभिव्यक्ति का होना चाहिये जिसे हम दिव्य रूप में स्वीकार कर सकते हैं.

बोड़बे ने कहा कि देवता एक रूप व्यक्ति के रूप में भी हो सकता है और नही भी हो सकता है या दूसरे रूप में भी हो सकता है. धवन ने कहा कि मैं हिंदुओं की मान्यता है और अगर ऐसा होता है तो उसकी पूजा की जाती है.

मुख्य बातें-

# मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन दलील दे रहे हैं कि ‘जन्मस्थान’ एक न्यायिक व्यक्ति नहीं हो सकता. उन्होंने दलील दी कि जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है लेकिन कृष्ण न्यायिक व्यक्ति नहीं हैं.

# राजीव धवन ने कहा कि बाबरी मस्जिद वक़्फ़ की प्रॉपर्टी है और सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड पर उसका अधिकार है.

# धवन ने कहा कि 1885 के बाद ही बाबरी मस्जिद के बाहर के राम चबूतरे को राम जन्मस्थान के रूप में जाना गया.

# राजीव धवन ने अपनी जिरह के दौरान उर्दू के शायर अल्लामा इक़बाल के शेर पढ़ा.

हे राम के वजूद पर हिंदुस्तान को नाज़ अहल ऐ नज़र समझते है इसको इमाम ऐ हिन्द

मुस्लिम पक्षकारों की ओर से राजीव धवन ने कहा

# भगवान राम की पवित्रता पर कोई विवाद नहीं है.

# इसमें भी विवादित नहीं है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं हुआ था.

# लेकिन इस तरह की पवित्रता स्थान को एक न्यायिक व्यक्ति में बदलने के लिए पर्याप्त कब होगी ?

# इसके लिए कैलाश पर्वत जैसी अभिव्यक्ति होनी चाहिए.

# इसमें विश्वास की निरंतरता होनी चाहिए और यह भी दिखाया जाना चाहिए कि निश्चित रूप से वहीं प्रार्थना की गई थी.

# इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा

– तो क्या आप कह रहे हैं कि कुछ शारीरिक अभिव्यक्ति होनी चाहिए ?

– क्या जगह को व्यक्ति बनाने के लिए मापदंडों को निर्धारित करना बहुत मुश्किल नहीं होगा?

# राजीव धवन ने जवाब दिया

– कोई भी ग्रंथ ये बताने में सक्षम नहीं है कि अयोध्या में किस सटीक स्थान पर भगवान राम का जन्म हुआ था.

Ayodhya land dispute live hearing, अयोध्या केस में सुनवाई के दौरान SC ने पूछा- हनुमान द्वार पर क्यों बने थे ‘जय विजय’ द्वारपाल?
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