Ayodhya: मूर्तियां चोरी से रखवाई गईं, ढांचे पर तीन जगह अल्लाह लिखा था:मुस्लिम पक्षकार

'हिन्दुओं ने 1934 में बाबरी मस्जिद पर हमला किया, फिर 1949 में अवैध घुसपैठ की और 1992 में इसे तोड़ दिया और अब कह रहे हैं कि संबंधित जमीन पर उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए.'
Ayodhya hearing in supreme court, Ayodhya: मूर्तियां चोरी से रखवाई गईं, ढांचे पर तीन जगह अल्लाह लिखा था:मुस्लिम पक्षकार

रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद प्रॉपर्टी विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 18वें दिन भी जारी है. मुस्लिम पक्ष की तरफ से दलील पेश करते हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने इस ज़मीन पर गलत तरीके से 1934 में अवैध कब्जा किया. वक्फ निरीक्षक कि ओर से इस पर रिपोर्ट भी उस दौरान दी गई. हिंदू महासभा भी मन्दिर के लिए बनाए गए ट्रस्ट में अपना हिस्सा चाहता है. हिन्दू महासभा यह कह रही है कि वह सरकार के पास जाएगी. कोर्ट के पास इसका अधिकार क्षेत्र नहीं है. अब ये शो बन्द होना चाहिए, अब कोई रथ यात्रा नहीं होनी चाहिए.

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# भगवान राम को रामलला विराजमान कहना अर्थविहीन है क्योंकि विराजमान का मतलब किसी इस्थान का निवासी होता है. रामलला विराजमान के याचिका का विरोध करते हुए कहा कि राम जन्मभूमि न्यायिक व्यक्ति नही है.

# राजीव धवन ने कहा कि निर्मोही खड़ा की तरफ से दलील दी जाती है कि 500 साल, कभी कहा जाता है 200 साल , कभी 100 साल पुराना बता रहे हैं. यह लगातार अपना बयान बदल रहे है कि निर्मोही अखाड़ा कब अस्तित्व में आया.

यह निचली अदालत में दावा करते है कि सिर्फ अंदरूनी भाग पर कब्ज़ा चहिए अभी कह रहे है कि भारी भाग पर भी इनका कब्ज़ा है.

# हमसे कहा जाता रहा कि आपको वैकल्पिक जगह दी जाएगी. प्रस्ताव देने वाले जानते थे कि हमारा दावा मजबूत है. स्ट्रक्चर के पास पक्का पथ जो परिक्रमा के नाम से जाना जाता है. परिक्रमा पूजा का एक तरीका है, क्या परिक्रमा से ज़मीन पर उनका अधिकार हो जाएगा- राजीव धवन

# धवन ने कहा कि दावा किया जा रहा है कि वही पर भगवान राम के जन्मस्थान की जगह है, उसके बाद कहते है कि वहां पर भव्य मंदिर था और उनको पूरा स्थान चाहिए, अगर आप उनके स्वम्भू की दलील को मानते है तो उनकी पूरी ज़मीन मिल जाएगी, मुस्लिम को कुछ भी नही मिलेगा, मुस्लिम भी उस जमीन पर अपना दावा कर रहे है.

# जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यदि देवता को एक न्यायिक व्यक्ति स्वीकार किया जाता है, तो पूजा का स्थान सटीक स्थान नहीं है जहां वह पैदा हुआ है बल्कि इसके लिए सभी उपयुक्त स्थान माना जाता है, जिसे लोग समान रूप से महत्वपूर्ण मानते है. राजीव धवन ने कहा की जन्मस्थान और जन्मभूमि की बात की जाती है जिसमें बड़ा अंतर है

# हमसे कहा जाता रहा कि आपको वैकल्पिक जगह दी जाएगी. प्रस्ताव देने वाले जानते थे कि हमारा दावा मजबूत है. स्ट्रक्चर के पास पक्का पाथ जो परिक्रमा के नाम से जाना जाता है, परिक्रमा पूजा का एक तरीका है, क्या परिक्रमा से ज़मीन पर उनका अधिकार हो जाएगा- राजीव धवन

# राजीव धवन ने कहा कि जेरूसलम में वेलिंग वॉल पर यहूदियों और मुसलमानों के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी तरह बाबरी मस्जिद इबादत का ‘समग्र स्थान’ रही होगी.

# धवन ने कहा कि यह हो सकता है कि दोनों ही पक्ष वहां उपासना करते रहे लेकिन ये कैसे कह सकते हैं कि वहां मस्जिद नहीं थी. धवन ने एक तस्वीरनुमा नक्शा दिखाकर कहा कि 1480 गज का भूरे रंग का हिस्सा देवता और निर्मोही अखाड़े को दिया है.  740 वर्गगज का हिस्सा मुस्लिम पक्षकारों को दिया गया.

# धवन साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि विवादित जगह पर मंदिर नहीं बल्कि मस्जिद था. धवन ने कहा कि मस्जिद का द्वार बंद था और मुसलमानों के पास चाबियां भी थीं. शुक्रवार को 2-3 घंटे के लिए खोला जाता था और साफ साफाई के बाद जुमे की नमाज पढ़ी जाती थी. धवन ने कहा कि मुस्लिम अंदर के हिस्से में नमाज पढ़ते थे, सभी दस्तावेज और गवाहों ने बयान से साबित है कि मुस्लिम मस्जिद के अंदर के हिस्से में नामज़ पढ़ते थे.

# सुन्नी वक़्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने दलील दी कि विवादित जमीन के ढांचे के मेहराब के अंदर के शिलालेख पर ‘अल्लाह’ शब्द मिला है. धवन साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि विवादित जगह पर मंदिर नहीं बल्कि मस्जिद था.

# राजीव धवन ने कहा कि बाबरी मस्जिद में भगवान रामलला की मूर्ति स्थापित करना छल से हमला करना है. धवन ने हिन्दू पक्ष की दलील का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष के पास विवादित जमीन के कब्जे के अधिकार नहीं है, न हो लेकिन मुस्लिम पक्ष वहां नमाज अदा करता रहा है. जिसके पीछे वजह 1934 में निर्मोही अखाड़ा ने गलत तरीके से अवैध कब्जा किया, इसके बाद हमें नमाज नहीं अदा करने दिया गया.

# धवन का कहना है कि बाबरी मस्जिद में मूर्तियों की स्थापना एक “खतरनाक हमला” था. धवन का कहना है कि मस्जिद के अंदर मूर्तियों का दिखना “चमत्कार” नहीं बल्कि “सुनियोजित हमला” था..

# राजीव धवन ने अपनी बहस को बढ़ाते हुए कहा कि अयोध्या विवाद पर विराम लगना चाहिए. अब राम के नाम पर फिर कोई रथयात्रा नहीं निकलनी चाहिए. उनका इशारा बीजेपी द्वारा 1990 में निकाली गई रथयात्रा की ओर था जिसके बाद बाबरी विध्वंस हुआ था.

# Places of worship act, 1991 का ज़िक्र किया जिसके मुताबिक एक प्रार्थना करने की जगह को उसी आस्था की जगह या किसी और आस्था की जगह में परिवर्तित नहीं किया जा सकता. 1990 में ली गयी तस्वीरों में से एक तस्वीर ढांचे के अंदर की तस्वीर है जिसमें 1949 के ऑफिसर केके नैयर एयर 1949 के सिटी मजिस्ट्रेट गुरु दत्त सिंह दिखाई दे रहे हैं.

जस्टिस भूषण: क्या ये तस्वीरें सही हैं?
धवन: जी हां बिल्कुल.
धवन: क्या ये एक मंदिर है? आप कह रहे हैं कि उन्होंने वहां कभी नमाज़ अदा नहीं की, क्योंकि आपने उन्हें करने नहीं दी. 1934 के बाद मुसलमानों को वहां नमाज़ अदा नहीं करने दी गयी.

धवन: 16 दिसम्बर 1949 में डीएम मिस्टर केके नैयर ने चीफ सेक्रेटरी को एक लेटर भेजा जिसमें लिखा था कि एक भव्य मंदिर वहां मौजूद था जिसे बाबर ने तोड़ा.

# राजीव धवन ने अपनी बहस को बढ़ाते हुए कहा कि अयोध्या विवाद पर विराम लगना चाहिए. अब राम के नाम पर फिर कोई रथयात्रा नहीं निकलनी चाहिए. उनका इशारा बीजेपी द्वारा 1990 में निकाली गई रथयात्रा की ओर था जिसके बाद बाबरी विध्वंस हुआ था- राजीव धवन

# हिंदू महासभा भी मन्दिर के लिए बनाए गए ट्रस्ट में अपना हिस्सा चाहता है. हिन्दू महासभा यह कह रही है कि वह सरकार के पास जाएगी. कोर्ट के पास इसका अधिकार क्षेत्र नहीं है. अब ये शो बन्द होना चाहिए, अब कोई रथ यात्रा नहीं होनी चाहिए- मुस्लिम पक्षकार वकील राजीव धवन

इससे पहले 17वें दिन राजीव धवन ने कहा कि मुस्लिम पक्षों ने मस्जिद पर हमले का जिक्र किया. कहा गया कि हिन्दुओं ने 1934 में बाबरी मस्जिद पर हमला किया, फिर 1949 में अवैध घुसपैठ की और 1992 में इसे तोड़ दिया और अब कह रहे हैं कि संबंधित जमीन पर उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं. पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन को लेकर है.

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