, Ayodhya Case: ‘अगर आइन-ए-अकबरी में सभी का ब्यौरा है तो मस्जिद का जिक्र क्यों नहीं है’
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Ayodhya Case: ‘अगर आइन-ए-अकबरी में सभी का ब्यौरा है तो मस्जिद का जिक्र क्यों नहीं है’

अयोध्या मामले पर सुनवाई के 29वें दिन मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि उसे विवादित जगह को श्री राम का जन्म स्थान मानने में कोई एतराज नहीं है, लेकिन उसे वहां से पूरी तरह से बाहर नहीं किया जाना चाहिए.
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अयोध्या मामले (Ayodhya Case) की 30वें दिन की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ख़त्म हो गयी. कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन (Rajiv Dhawan) और ऑल इंडिया मुस्‍लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने अपनी दलीलें कोर्ट के सामने रखीं. आइये जानते हैं आज के सारे Updates…

  • जस्टिस बोबडे- तो क्या बादशाह द्वारा बनाई गई चीज महत्वपूर्ण नहीं है?जिलानी- ये बादशाह ने नहीं कमांडर ने बनवाई थी. उस जगह पर मंदिर नहीं था, जिसे दावा किया जा रहा है कि तोड़ा गया. जब आइन-ए-अकबरी में काशी में मंदिर तोड़ने का जिक्र है तो अयोध्या के मंदिर तोड़ने का भी जिक्र होता.
  • जस्टिस बोबड़े ने कहा- अगर आइन-ए-अकबरी में सभी का ब्यौरा है तो मस्जिद का जिक्र क्यों नहीं है?
  • जिलानी- 1855 से पहले यहां कोई विवाद नही था. जब शूट दाखिल किया गया, तबसे यहां का महत्व बढ़ गया.
    जस्टिस बोबड़े- कितनी मस्जिदों को मीर बाकी ने बनवाया?
    जिलानी- आइन-ए-अकबरी के मुताबिक इलाके सूबों में बंटे होते थे और मस्जिदों का निर्माण सूबेदार कराते थे.
  • जिलानी ने कहा कि आइन-ए-अकबरी में पूरे अम्पायर को स्थापित करने का ब्यौरा है. यही एक ऐसी किताब है जिसमें मुगल शासनकाल के दौरान हरेक बारीकी का जिक्र है.
  • जस्टिस बोबड़े ने पूछा- बाबर ने कहां पर मस्जिद बनवाई थी. मंदिर तोड़कर या मौजूदा ढांचे में बदलाव कर या खाली जमीन पर.जिलानी- खाली जमीन पर बनवाई.
  • जिलानी ने आइन-ए-अकबरी का जिक्र करते हुए कहा कि ये पुस्तक सभी वर्गों मे पॉपुलर थी. इसमें में भी जन्मस्थान का जिक्र नही मिलता.
  • जिलानी ने एक गवाह के बयान को पढ़कर बताया कि
    सुमित्र भवन, कौशल्या भवन, कैकेई भवन का जिक्र रामचरित मानस में नहीं है. राजा टोडरमल गोस्वामी तुलसीदास के मित्र थे, लेकिन तुलसीदास ने इसका जिक्र रामचरित मानस में नहीं किया.
  • जिलानी ने कहा कि आस्था और विश्वास के आधार पर अमुक स्थान को जन्मस्थान करार नहीं दिया जा सकता, जिसका कोई प्रमाण नहीं है. जिलानी ने कोर्ट से कहा कि वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस या अन्य किसी में जन्मस्थान का जिक्र अन्य भवनों की तरह है, जो अयोध्या में स्थित हैं. जन्म स्थान का उल्लेख कैकेयी भवन, कौशल्या भवन या अन्य में नहीं दिया गया है.
  • जस्टिस बोबड़े ने कहा कि इसमें कोई विवाद आपकी तरफ से भी नहीं है कि राम अयोध्या में हुए थे. जिलानी ने कहा कि रामचबूतरा पर भी कोई विवाद नहीं है. यह पहले ही साफ हो चुका है कि चबूतरा ही जन्मस्थान है.
  • जिलानी ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य की गवाही पर कहा कि उन्होंने भी अयोध्या का जिक्र किया, पर जन्मस्थान का नहीं.
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाल्मीकि रामायण या रामचरित मानस में अयोध्या का जिक्र है. ऐसे में जन्मभूमि का जिक्र नहीं है तो लोग यह मानते है कि राम का जन्म वहीं हुआ था.
  • जिलानी ने कहा- कोई डॉक्यूमेंट्री साक्ष्य नहीं है, जबकि मस्जिद के संबंध में ऐसे साक्ष्य हैं.
  • जिलानी ने कहा कि 1950 के पहले का कोई साक्ष्य नहीं है कि जहां पर मस्जिद थी, वहां पर जन्म भूमि है.
  • SC ने कहा- कहीं नहीं लिखा है तो ऐसा नहीं कहा जा सकता कि वह नहीं है या जन्मभूमि नहीं है.
  • जिलानी ने कहा कि हिंदुओं का विश्वास सिर्फ़ वाल्मीकि रामायण पर आधारित है. कहीं भी राम जन्म भूमि का जिक्र वाल्मीकि रामायण या रामचरित मानस में नहीं है.
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने अपनी दलीलें पूरी की. अब ऑल इंडिया मुस्‍लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने बहस शुरू की.
  • धवन ने कहा कि 1949 में पता चला कि गर्भ गृह में भगवान का अवतरण हुआ है, लेकिन उससे पहले वहां मूर्ति नहीं थी. पौराणिक विश्वास के अनुसार पूरे अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान माना जाता रहा है लेकिन इसके बारे में कोई एक खास जगह नही बताई गई.
  • धवन ने हिंदू पक्ष के गवाह की गवाही पढ़ते हुए कहा कि चरण का उल्लेख सिर्फ राम चबूतरे पर करते थे और लोग राम चबूतरे के पास लगी रेलिंग की तरफ भी जाते थे. मूर्ति गर्भ गृह में कैसे गई इस बारे में उसको जानकारी नही है.
  • धवन ने हिंदू पक्ष के एक गवाह का बयान पढ़ते हुए कहा कि भगवान राम की मूर्ति गर्भ गृह में नही थी. गर्भ गृह के अंदर किसी भी भगवान की तस्वीर नहीं थी, लेकिन तब भी जो लोग पूजा करने आते थे, वह रेलिंग की तरफ जा कर गर्भ गृह की तरफ जाते थे.
  • धवन ने कहा कि जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने माना था कि राम चबूतरे पर पूजा की जाती थी. धवन ने HC के एक जज के ऑब्जर्वेशन का विरोध किया, जिन्होंने कहा था कि मुस्लिम वहां पर अपना कब्जा साबित नही कर पाए थे.
  • गोपाल सिंह विशारद की याचिका में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में नहीं बताया गया. मस्जिद के बीच के गुम्बद के नीचे जन्मस्थान होने का दावा किया गया और पूजा के अधिकार की मांग की गई.
  • राजीव धवन ने कहा कि मुस्लिम वहां पर नमाज पढ़ते थे, इस पर सवाल उठाया जा रहा है. 22-23 दिसंबर की रात को जिस तरह से मूर्ति को रखा गया, वह हिंदू नियम के अनुसार सही नही है. धवन ने कहा कि 40 गवाहों की गवाही को क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं किया गया.
  • धवन ने कहा मैं मानता हूं भारत में पूजा की कई मान्यताएं हैं. कामाख्या समेत देवी सती के अंग जहां गिरे, वहां-वहां मंदिर हैं. इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा- ऐसा मंदिर पाकिस्तान में भी है.धवन- लेकिन अयोध्या में रेलिंग के पास जाकर पूजा किए जाने से उसे मंदिर नहीं मानना चाहिए.
  • धवन ने कहा कि गोपाल सिंह विशारद ने कहा है कि हम 1950 से पहले से पूजा कर रहे थे लेकिन मुस्लिम पक्ष की शिकायत पर तत्कालीन डीएम केके नायर ने पूजा को रोक दिया था.
  • राजीव धवन अब गोपाल सिंह विशारद द्वारा दाखिल सिविल सूट पर अपनी दलीलें पेश करेंगे.
  • राजीव धवन ने कहा कि चिदंबरम मंदिर का इतिहास स्पष्ट है. ऐसे में विश्वास का आधार क्या है? महज विश्वास के आधार पर यह स्पष्ट नहीं होता कि अयोध्या में मंदिर था. सिर्फ लोगों का विश्वास का क्या काफी है? भारत में यह फैलाना आसान है कि देवता का अमुक स्थान है.
  • चिदंबरम मंदिर, कामाख्या मंदिर, पक्षी मंदिर का हवाला देते हुए धवन ने भगवान शिव और सती की घटना बताई. इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि इस घटनाक्रम में शक्तिपीठ पाकिस्तान में है. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि इसी क्रम में एक मंदिर/शक्ति पीठ पाकिस्तान में भी है. राजीव धवन ने कहा कि चिदम्बरम मंदिर चोल शासन के समय बनाया गया था. कई लोग विश्वास करते हैं, ये काफी नही है, लोग रेलिंग के पास आते थे और फूल चढ़ाते थे ये पर्याप्त है?
  • मुस्लिम पक्ष के वकील ने पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान उठाए गए कदमों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी संवैधानिकता परक बदलाव हुए थे. ऐसे में पीएम के रिफरेंस में मैं कोई राजनीतिक दलील नहीं दे रहा था. धवन ने कोर्ट में दिया स्पष्टीकरण.
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