‘एक झूठ बोलने में कोई नुकसान नहीं… जब अयोध्या में मंदिर की ज़मीन ज़बरदस्ती छीनी गई हो’

राजीव धवन ने बुधवार को कहा था कि निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलील दी जाती है कि 500 साल, कभी कहा जाता है 200 साल, कभी 100 साल पुराना बता रहे हैं. ये लगातार अपना बयान बदल रहे है कि निर्मोही अखाड़ा कब अस्तित्व में आया.

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई शुरू हो गयी. आइये जानते हैं कौन पक्ष क्या दे रहा है दलील.

  • राजीव धवन ने कहा कि कुछ कहते हैं कि 700 साल पहले कुछ उससे भी पहले का मानते हैं. मैं निर्मोही अखाड़ा की उपस्थिति 1855 से मानता हूं. 1885 में महंत रहहुबर दास ने मुकदमा दायर किया. हम 22 – 23 दिसंबर, 1949 के बयान पर बात कर रहे हैं.
  • जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा- अगर आप निर्मोही अखाड़ा के अस्तित्व को मान रहे हैं तो उनके संपूर्ण साक्ष्य को स्वीकार किया जाएगा.
  • राजीव धवन ने कहा कि मैं उनको झूठा नही कह रहा हूं लेकिन में यह समझना चाह रहा हैं कि वह खुद को शेबेट तो बता रहे हैं, लेकिन उनको नहीं मालूम कि कब से शेबेट हैं.
  • जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा- इन विरोधाभासों के बावजूद भी आप यह मान रहे हैं कि उन्होंने अपनी शेबाइटी (सेवादारी) के अधिकार स्थापित कर लिए हैं.
  • एक गवाह के बारे में बताते हुए धवन ने कहा कि उसने 14 साल की उम्र में RSS जॉइन किया था. बाद में RSS और VHP ने उसको सम्मानित भी किया. धवन ने एक गवाह के बारे में बताते हुए कहा कि गवाह ने 200 से अधिक मामलों में गवाही दी है और विश्वास करता है कि एक झूठ बोलने में कोई नुकसान नही है, जब मंदिर की ज़मीन ज़बरदस्ती छीनी गई है.
  • राजीव धवन ने राजा राम पांडे और सत्य नारायण त्रिपाठी के बयान में विरोधभास के बारे में सुप्रीम कोर्ट को बताया. धवन ने कहा कि ऐसा लगता है कि कई गवाहों के बयानों को प्रभावित किया गया.
  • धवन ने निर्मोही अखाड़ के गवाहों के दर्ज बयानों पर जिरह करते हुए महंत भास्कर दास के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने माना कि मूर्तियों को विवादग्रस्त ढांचे में रखा गया था. राजीव धवन ने केके नायर और गुरु दत्त सिंह, डीएम और सिटी मैजिस्ट्रेट की 1949 की तस्वीरों को कोर्ट को दिखाया.
  • धवन ने कहा कि राम चबूतरा बाहरी आँगन में है, जिसे राम जन्म स्थल के रूप में जाना जाता है और मस्जिद को विवादित स्थल माना जाता है.
  • सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा- निर्मोही अखाड़ा 1734 से अस्तित्व का दावा कर रहे हैं. मैं कह सकता हूं कि निर्मोही अखाड़ा 1855 में बाहरी आंगन में थे और वह वहां रहे हैं.