मस्जिद का निर्माण धार्मिक नहीं बल्कि दूसरे धर्म को कुचलने के इरादे से किया गया: रामलला विराजमान

रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि 4 घंटे लग सकते हैं उनकी बहस को पूरा होने में. सोमवार को मामले की अगली सुनवाई होगी.

अयोध्‍या रामजन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की शुक्रवार की सुनवाई पूरी हो गई है. सुनवाई के 7वें दिन रामलला विराजमान के वकील ने कोर्ट को बताया कि ASI की रिपोर्ट के बाद वो गवाहों के बयान अदालत में रखेंगे. उसके बाद उनकी बहस पूरी हो जाएगी. रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि 4 घंटे लग सकते हैं उनकी बहस को पूरा होने में. सोमवार को मामले की अगली सुनवाई होगी.

  • विराजमान ने कहा, पुरातत्व विभाग ने मस्जिद के नीचे स्थित ढांचे में एक शिवलिंग कि संभावना जताई थी. खुदाई में मिली तमाम सामग्री को विरजमान ने कोर्ट के सामने उल्लिखित किया.
  • पौराणिक पुस्तक अपराजितपृक्षा में भी इस बात का जिक्र है कि एक बड़ी बुनियाद पर बड़ा स्ट्रक्चर बना था: वैद्यनाथन
  • वैधनाथन ने पुरातत्व विभाग की खुदाई और रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि जिस तरह का विशाल स्ट्रक्चर डिस्प्यूटेड स्ट्रक्चर के नीचे मिलने के प्रमाण मिले हैं, वो बताते हैं कि वहां एक विशाल मंदिर था, जो आम जनता के दर्शन के लिए था.
  • हाईकोर्ट को इस रिपोर्ट पर ऐतबार था और उसने इसके खिलाफ आपत्तियों को खारिज कर दिया था. मस्जिद के नीचे जो ढांचा पाया गया उसका निर्माण खंभों के आधार पर इसलिए किया गया था, क्योंकि वहां पर ज्यादा लोग एकसाथ पूजा कर सकें.
  • जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, विवादित जगह पर एक कब्र भी पाई गई थी. इसको कैसे देखा जाए. रामलला के वकील सी एस वैद्यनाथन का जवाब- वो कब्र बहुत बाद के (मंदिर के समय से) वक्त की है.
  • साल 2003 में दो खंडों में दाखिल कि गई पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में सभी विशेषज्ञों ने विवादित स्थल पर मस्जिद कि मौजूदगी से पहले उसके नीचे मौजूद ढांचा होने का तथ्य दिया. जिसमें पूरे ढांचे का दीवार दर दीवार और खंभों का जिक्र किया गया.
  • रामलला विराजमान के वकील सी के वैद्यनाथन ने कहा कि ऐसे ही तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला था कि राम जन्म भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया.
  • विराजमान ने कहा कि पुरातत्व कि रिपोर्ट के मुताबिक 17 कतारें थी. हर एक कतार 5 खंभों पर टिकी हुई थी. इस रिपोर्ट में इतनी सामग्री है, जिससे साफ हो जाता है कि मस्जिद का निर्माण धार्मिक नहीं कुदृष्टि से दूसरे धर्म को कुचलने के लिए किया गया था.
  • रामलला विराजमान: बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों कि निगरानी में राम जन्म भूमि पर पुरातत्व विभाग ने खुदाई कि और यह भी स्पष्ट कर दिया कि कौन से पत्थर किस सदी के हैं. विवादित मस्जिद के नीचे बड़ा ढांचा था.
  • विराजमान ने कहा कि मस्जिद का निर्माण पौराणिक, ऐतिहासिक इमारत के ऊपर सीधे किया गया है. पुरातत्व विभाग ने पाया कि विवादित स्थल पर मस्जिद राम जन्म भूमि के ढांचे के ऊपर कि गई.
  • रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि विवादित स्थल की खुदाई से मिले पुरातात्विक अवशेष से ये साफ पता चलता है कि ये किसी उत्तर भारतीय मंदिर के स्थापत्य शैली वाले ही हैं.
  • जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा पिछली दो सदियों में सभ्यताओं को नदी के किनारे बसते हुए देखा है. जहां लोगों ने पहले से मौजूद संरचनाओं पर निर्माण किया है, लेकिन साबित करें कि कथित खंडहर या ध्वस्त इमारत कि (जिस पर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी) प्रकृति धार्मिक नहीं थी?
  • रामलला विराजमान: विवादित स्थल की खुदाई से मिले पुरातात्विक अवशेष ये साफ पता चलता है कि ये किसी उत्तर भारतीय मंदिरों के स्थापतिय शैली वाले ही है. मस्जिद का निर्माण पौराणिक, ऐतिहासिक इमारत के ऊपर सीधे किया गया. पुरातत्व ने पाया कि विवादित स्थल पर मस्जिद राम जन्म भूमि के ढांचे के ऊपर कि गई. बड़े पैमाने पर विशेषग्यों कि निगरानी में राम जन्म भूमि पर पुरातत्व विभाग नो खुदाई कि और यह भी स्पष्ट कर दिया कि कौन से पत्थर किस सदी के हैं. बड़ा ढांचा था विवादित मस्जिद के नीचे. पुरातत्व की रिपोर्ट के मुताबिक 17 कतारें थी. हरेक कतार 5 खंभों पर टिकी हुई थी. इस रिपोर्ट में इतनी सामग्री है जिससे साफ होता है कि मस्जिद का निर्माण धार्मिक नहीं, कुदृष्टि से दूसरे धर्म को कुचलने के लिए किया गया था.
  • जस्टिस चंद्रचूड़: पिछले 2 सदियों में सभ्यताओं को नदी के किनारे बसते हुए देखा है. जहां लोगों ने पहले से मौजूद संरचनाओं पर निर्माण किया है. लेकिन साबित करें कि कथित खंडहर या ध्वस्त इमारत कि (जिस पर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी) प्रकृति धार्मिक नहीं थी?
  • अयोध्या पर अब दो बजे होगी सुनवाई. लंच के लिए उठी पीठ.
  • वैद्यनाथन ने ASI की रिपोर्ट का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में साफ है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया।
    जस्टिस बोबड़े: क्या कार्बन डेटिंग की गई थी?
    वैद्यनाथन: खुदाई में मिले मैटेरियल की कार्बन डेटिंग की गई थी.
    राजीव धवन: कार्बन डेटिंग सिर्फ जैविक चीजों की ही की जा सकती है, मूर्तियों की नहीं.राजीव धवन: कार्बन डेटिंग सिर्फ उन्हें चीजों की हो सकती है जिनमें कार्बन की मात्रा हो जैसी कि हड्डियों की न कि ईंटों या धातुओं की.
    वैद्यनाथन: मूर्ति की कार्बन डेटिंग नहीं हुई थी.
  • रामलला विराजमान के वकील परासरण ने कहा- जन्मस्थल पर नमाज इसलिए पढ़ी जाती रही जिससे उन्हें इस पर कब्जा मिल जाए. इस नमाज़ में विश्वास का पूर्ण अभाव था. नमाज़ सड़क पर भी पढ़ी गई तो क्या वह मस्जिद बन जायेगी.
  • वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा- मैंने ये कभी स्वीकार नहीं किया कि वहां मस्जिद नहीं थी. जवाब में रामलला विराजमान ने कहा कि मुस्लिम पक्षकार के वकील के हवाले से उनकी तरफ से कुछ नहीं कहा गया.
  • मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन का फिर हस्तक्षेप. कहा- कई पहलुओं को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जो स्पष्ट नहीं हैं. रामलला विराजमान पक्ष ने कहा कि हमारी तरफ से सही उदाहरण और तथ्य पेश किए जा रहे हैं.
  • ASI के रिपोर्ट वाले अल्बम की तस्वीरें, मेहराब और कमान की तस्वीरें भी वकील सीएस वैद्यनाथन ने कोर्ट को दिखाई जो 1990 में खींची गई थी.
  • श्रीराम जन्मभूमि पुनरोद्धार समिति (याचिका 9) शंकराचार्य की ओर से कहा गया कि वो प्रिंस ऑफ वेल्स की यात्रा की याद में लिखा गया शिलालेख था. स्तंभों और छत पर बनी मूर्तियां, डिजाइन, आलेख और कलाकृतियां हिंदू परंपरा की ही हैं.
  • मस्जिदों में मानवीय या जीव जंतुओं की मूर्तियां नहीं हो सकती. अगर हों तो वो जगह मस्जिद नहीं हो सकती. इस्लाम मे नमाज़/प्रार्थना तो कहीं भी हो सकती है. मस्जिदें तो सामूहिक साप्ताहिक और दैनिक प्रार्थना के लिए ही होती हैं.