वकील ने कहा- बाबर ने कभी कोई मस्जिद नहीं बनवाई, CJI बोले- मानचित्र में साफ करिए कहां हैं मूर्तियां?

रामलला विराजमान के वकील ने कल SC में बताया कि एक मुस्लिम गवाह ने कहा था कि उसने मस्जिद में आखिरी बार नमाज़ पढ़ी. उसने पढ़ते समय देखा था कि वहां के पत्थरों पर कमल और दूसरी तस्वीर हैं.

अयोध्‍या रामजन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद (Babri masjid ayodhya case) विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई बुधवार को शुरू हो गई. आइये जानते हैं कोर्ट में 9वें दिन की सुनवाई के दौरान कौन सा पक्ष क्या दे रहा है दलील.

  • गोपाल सिंह विशारद ने दलील शुरू की. इसके पहले हिन्दू महासभा की तरफ से पूरी तैयारी नहीं होने की बात पर उन्हें बाद में मौका देने की बात कोर्ट ने कही.
  • हिन्दू महासभा के वकील ने अयोध्या मामले में शुरू की दलील.
  • SC ने कहा- हिंदू ग्रंथों में आस्था का आधार विवादित नहीं है. हमको मंदिर के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करिये. मंदिर बाबर के निर्देश पर तोड़ा गया था. क्या हुआ था इस पर प्रकाश डालिए?
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आस्था को लेकर लगातार दलीलें सुन रहे हैं. जिन पर हाईकोर्ट ने विश्वास भी जताया. इस पर जो भी स्पष्ट साक्ष्य हैं वह बताएं.
    PN मिश्रा ने कहा कि हमारा मानना है कि बाबर ने वहां कभी कोई मस्जिद नहीं बनवायी और हिन्दू उस स्थान पर हमेशा पूजा करते रहे हैं. हम इसको जन्मभूमि कहते है उनका कहना है कि वह स्थान जन्मभूमि नही है.सीजेआई ने कहा- मानचित्र में यह साफ करिए कि मूर्तियां कहां हैं.
  • सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- स्कंद पुराण कब लिखा गया था?जन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि ब्रिटिश लेखक के अनुसार गुप्त समय में लिखा गया. यह भी कहा जाता है 4-5 AD में लिखा गया.
  • रामलला के वकील वैद्यनाथन ने अपनी दलील पूरी की. रामजन्म स्थान पुनरोधान समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलील रखनी शुरू की. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आप इसमें पार्टी है?
    PN मिश्रा ने कहा- हां, मैं सूट नम्बर 4 में प्रतिवादी नम्बर 20 हूँ.PN मिश्रा ने कहा कि मैं तर्क दूंगा कि वह हमारे सिद्धांत, आस्था और विश्वासों के आधार पर एक मंदिर है. मैं Atharva वेद से आरम्भ करूंगा.
  • रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि एक मंदिर हमेशा मंदिर ही रहता है. संपत्ति को आप ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं. मूर्ति किसी की संपत्ति नहीं है. मूर्ति ही देवता हैं. जस्टिस बोबड़े ने कहा- आपके तर्क तो इस प्रकार हैं कि मूर्ति के स्वामित्व वाली संपत्ति अभेद है. अगर कोई अन्य व्यक्ति जो संपत्ति पर दावा करता है, वह इसे कब्जे में नहीं रख सकता है. ऐसे में संपत्ति ट्रासफंर वाली चीज नहीं है.
  • जस्टिस बोबड़े: क्या हिंदू देवताओं की तरह चर्च भी न्यायिक व्यक्ति होता है?वैद्यनाथन: चर्च एक न्यायिक व्यक्ति है.बोबड़े: चर्च में क्या है जो न्यायिक व्यक्ति है? बिल्डिंग या अन्य कुछ और?वैद्यनाथन: मेरा मानना है कि चर्च में क्रॉस न्यायिक व्यक्ति होता है.बोबड़े- कृपया एक बार चेक कर लें.
  • वैद्यनाथन ने कहा- अगर जन्मस्थान देवता है, अगर संपत्ति खुद में एक देवता है तो भूमि के मालिकाना हक का दावा कोई नहीं कर सकता. कोई भी बाबरी मस्जिद के आधार पर उक्त संपत्ति पर अपने कब्जे का दावा नहीं कर सकता.
  • वैद्यनाथन ने कहा- वहां पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है. अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं. नाबालिग की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है.
  • रामलला विराजमान के वकील ने दलील को बढ़ाते हुए कहा- विवादित भूमि पर मंदिर रहा हो या न रहा हो, मूर्ति हो या न हो, लोगों की आस्था होना ही काफी है यह साबित करने के लिए कि वही रामजन्म स्थान है.
  • रामलला के वकील CS वैद्यनाथन ने कहा- किसी मूर्ति या मंदिर को नही तोड़ा जा सकता, अगर मंदिर न भी हो तो भी यहां की पवित्रता बनी रहेगी.
  • रामलला के वकील CS वैद्यनाथन ने कहा- इस मामले में कभी भी कोई प्रतिकूल कब्जा नहीं हुआ है. हिंदुओं ने हमेशा इस स्थान पर पूजा करने की अपनी इच्छा प्रकट की है. स्वामित्व का कोई सवाल ही नहीं उठता. ज़मीन केवल भगवान की है. वह भगवान राम का जन्म स्थान है, इसलिए किसी के वहां मस्जिद बनाकर उस पर कब्ज़े का दावा करने का सवाल ही नही उठता.