‘जज ने पूछा- कई मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा है, धवन बोले- क्योंकि हिंदू मजदूर निशानी छोड़ गए’

इसके पहले गुरुवार को धवन ने एक हिंदू पक्ष के गवाह की गवाही के बारे में बताते हुए कहा कि गर्भगृह में 1939 में मूर्ति नहीं थी. वहां पर बस एक फोटो थी. मूर्ति और गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं है.

अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute Case) मामले में शुक्रवार को Supreme Court में 28वें दिन की सुनवाई पूरी हो गयी. अब सोमवार को मामले की सुनवाई होगी. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट 1 घंटे ज़्यादा यानी 5 बजे तक मामले की सुनवाई करेगा. आइये जानते हैं सुनवाई के दौरान किस पक्ष ने क्या दी दलील…

  • धवन ने कहा कि भगवान विष्णु स्वयंभू है और इसके सबूत मौजूद है. भगावन राम के स्वयंभू होने पर यह दलील दी जा रही है कि रात में भगवान राम किसी के ख्वाब में आये और उसको बताया कि उनका सही जन्म स्थान किस जगह पर है. क्या इस पर विश्वास किया जा सकता है?
  • राजीव धवन ने कहा कि जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति बनने के पीछे का मकसद यह है कि भूमि को कही शिफ्ट नही किया जा सकता है.
  • राजीव धवन ने कहा कि 1992 में मस्जिद को गिराए जाने का मकसद हकीकत को मिटाया जाना है. इसके बाद कोर्ट में दावे किए जा रहे हैं. सब कुछ बेवजह ध्वस्त किए जाने का इरादा स्पष्ट होता है और कोर्ट में दावे को सही साबित करने के लिए ऐसा किया गया. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ‘बाबरनामा’ के अलग-अलग संस्करण और अनुवाद से साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि मस्जिद बाबर ने ही बनवाया था. उन दस्तावेजों को पढ़ रहे हैं जिसके मुताबिक विवादित संरचना पर अरबी और फारसी शिलालेख में अल्लाह लिखा था.
  • राजीव धवन ने कुछ चित्र, फोटो कोर्ट को दिखाए और बताया कि मेहराब पर अल्लाह लिखा हुआ है. मसला सिर्फ इतना है कि जबरन इस स्थान पर कब्जा करने वाले अब जमीन उनकी होने का दावा कर रहे हैं.
  • जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है, वो कैसे? धवन ने कहा- क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिन्दू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे. बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे.
  • धवन ने कहा- हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग-अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे. लिहाज़ा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई.
  • मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने इस्माइल फारूकी के फैसले का हवाला देना शुरू किया.

दोनों वहां पर औरंगजेब के समय से जाते थे
27वें दिन की सुनवाई में मुस्लिम पक्षकार वकील राजीव धवन ने गुरुवार को कहा था कि 1949 के मुकदमे के बाद सभी गवाह सामने आए. लोग रेलिंग तक क्यों जाते थे? इस बारे में किसी को नहीं पता. एक गवाह ने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम दोनों वहां पर पूजा करते थे. मैंने किसी किताब में यह नहीं पढ़ा कि वह कब से एक साथ पूजा कर रहे थे? दोनों वहां पर औरंगजेब के समय से जाते थे.

धवन ने एक हिंदू पक्ष के गवाह की गवाही के बारे में बताते हुए कहा कि गर्भगृह में 1939 में वहां पर मूर्ति नहीं थी. वहां पर बस एक फोटो थी. मूर्ति और गर्भगृह की पूजा का कोई सबूत नहीं है. जस्टिस भूषण ने इस पर कहा- यह कहना सही नहीं है कि हिंदुओं ने गर्भगृह की पूजा की, इसका सबूत नहीं है. राम सूरत तिवारी नामक गवाह ने 1935 से 2002 तक वहां पूजा करने की बात कही है. आप सबूतों को तोड़ मरोड़ के पेश कर रहे हैं. फिर धवन ने कहा- मैं सबूतों को तोड़ मरोड़ नहीं रहा. इसके बाद जस्टिस भूषण ने कहा- कोई सबूतों को तोड़ मरोड़ नहीं सकता. वहां पर जो है सो है और वहीं है.