‘बाबर ने मंदिर तुड़वाया, इसका क्‍या सबूत?’ SC के सवाल पर रामलला के वकील ने दिया ये जवाब

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संवैधानिक बेंच पहले हिंदू पक्षों, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़े का पक्ष सुन रही है.

नई दिल्ली. अयोध्‍या रामजन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की दैनिक सुनवाई जारी है. सुनवाई के छठे दिन बुधवार को रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन ने दलीलें शुरू करते हुए कहा कि वह पहले ऐतिहासिक फिर पुरातत्व विभाग के साक्ष्यों को बताएंगे. उन्होंने कहा कि रामलला विराजमान को पौराणिक, ऐतिहासिक और पुरातत्व संबंधी साक्ष्य प्रमाणित करते हैं.

रामलला विराजमान के वकील ने दिए ऐतिहासिक प्रमाण- 

  • फ्रेंच ट्रैवलर विलियम फिंच 1608- 1611 के बीच अयोध्या गए थे और उन्होंने किसी मस्जिद की उपस्थिति की बात नहीं कही. पिंच कि किताबों में स्पष्ट है कि राम अयोध्या के राजा थे. उनकी किताब का नाम एक्जीबिट इंडिया है. पिंच सन 1608 से 1611 तक अयोध्या में रहे और उन्होने एक किताब लिखी जिसमें राम जन्म भूमि का अस्तित्व स्पष्ट है.
  • वैद्यनाथन ने स्कंद पुराण का उदाहरण देते हुए कहा कि लोगों के भगवान राम के प्रति विश्वास और आस्था के परे कोर्ट इस तथ्य पर नहीं जा सकती कि वह तर्कसंगत है या नहीं.
  • दूसरे यात्री जोसफ टाइपन बैरल थे जो अयोध्या आए और उन्होंने अपनी किताब में राम जन्म भूमि का जिक्र किया. अयोध्या विवाद को लेकर सन 1786 में इस किताब को अनुवाद किया गया, क्योंकि ये फ्रेंच में थी और इसमें लैटिन का उपयोग किया गया था. अनुवाद अंग्रेजी में हुआ. इस अनुवाद पर संदेह होने कि वजह से सरकार ने इसकी पुष्टि भी कराई.

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने इसपर पूछा कि आप जो कह रहे हैं उसमें रामजन्मभूमि के दर्शन के बारे में कहा गया है देवता के बारे में नही? इसपर सी एस वैधनाथन ने कहा वो इसलिए क्योंकि जन्मस्थान खुद में ही एक देवता हैं. 

जस्टिस बोबड़े ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से पूछा कि विवादित स्थल को लेकर शिया और सुन्नी के बीच क्या विवाद है? राजीव धवन ने कहा जो विवाद है, उससे सूट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस बाबत राजीव धवन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का उदाहरण दिया.

रामलला के वकील ने गुप्त काल यानी ईसा पूर्व छठी सदी से लेकर जब लेकर उत्तर मध्य युग तक रामजन्मभूमि की सर्वकालिक महत्ता के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि कभी साकेत के नाम से मशहूर नगर ही अब अयोध्या है. यहीं सदियों से लोग राम के प्रति श्रद्धा निवेदित करते रहे हैं. यहां तक कि बौद्ध, जैन और इस्लामिक काल में भी श्रद्धा के स्रोत का ये स्थान राम जन्मस्थान के रूप में ही लगातार प्रसिद्ध रहा.

उन्होंने कहा कि इस लोकश्रद्धा की वजह से ही सनातन हिन्दू धर्म पुनर्जागरण हुआ. इस विवादित स्थान पर हमारे दावे का आधार भी यही है कि ये पूरा स्थान ही देवता है. लिहाजा इसका दो-तीन हिस्सों में बंटवारा नहीं हो सकता.

राम अयोध्या के राजा थे- वैधनाथन 

रामलला विराजमान के वकील ने कहा कि राम जन्म भूमि पर स्थित किला बाबर ने तोड़ा था या औरंगजेब ने तोड़ा था, वैश्विक स्तर पर लिखे गए तथ्यों में यह भ्रम है पर राम अयोध्या के राजा थे और उनका जन्म वहां हुआ था. इस पर कोई भ्रम किताबों में नहीं है.  रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन ने स्कंद पुराण का जिक्र किया, सी एस वैधनाथन ने कहा कि रिवाज है कि सरयू नदी में स्नान करने के बाद रामजन्मभूमि के दर्शन का लाभ मिलता है.

वैद्यनाथन ने कहा कि इस बात में मतभेद है कि बाबर और औरंगजेब में किसने मंदिर ध्वस्त किया, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि यह सन 1786 से पहले ध्वस्त हो गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ये पुराण कब लिखा गया था? सी एस वैधनाथन ने कहा यह पुराण वेद व्यास द्वारा महाभारत काल में लिखा गया था, कोई यह नही जानता कि यह कितना पुराना है. 

बाबर ने मंदिर तुड़वाया, इसका क्‍या सबूत- SC

जस्टिस बोबड़े ने पूछा क्या इस बात का सबूत है कि बाबर ने मस्जिद के निर्माण के लिए कहा. इसपर वैद्यनाथन ने कहा कि, पहले यात्री पिंच ने अपनी यात्रा को दौरान बाबर द्वारा राम जन्म भूमि में किला तोड़े जाने कि घटना का जिक्र किया इसके बाद औरंगजेब ने शेष भाग को तोड़ा और यह स्पष्ट नहीं है कि मस्जिद का ढांचा बाबर के समय में ही खड़ा किया गया. 19वीं शताब्दी में यह कहा जाने लगा कि बाबरी मस्जिद है जिसका निर्माण बाबर ने कराया था.

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि बाबरनामा में इस बारे में कोई जिक्र नही है. वैद्यनाथन ने इसपर जवाब देते हुए कहा, ‘हां बाबर ने अपने फौजी कमांडर को आदेश दिया.’ बोबड़े ने पूछा इसका क्या सबूत है.  वैद्यनाथन ने कहा शिलालेख जिस पर पर्याप्त संदेश लिखा गया है. वैद्यनाथन ने 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश सर्वेयर मोंटगोमरी मार्टिन के काम का जिक्र किया. 1838 में लिखी गयी किताब मोंटगोमरी में सबसे पहले बाबर द्वारा मस्जिद बनाए जाने का ज़िक्र किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट का सवाल- बाबरी मस्जिद नाम कब पड़ा

जस्टिस बोबड़े ने रामलला के वकील से पूछा मस्जिद को बाबरी मस्जिद कब कहा जाने लगा? वैधनाथन ने कहा ये 19वीं सदी में कहा गया उससे पहले इस बात के कोई सबूत या साक्ष्य नही हैं कि मस्जिद को बाबरी मस्जिद कहा गया हो.

बाबर के अयोध्या रुकने के तथ्य किताब से गायब- मुस्लिम पक्ष के वकील

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि ऐतिहासिक किताब बाबरनामा में बाबर के नदी पार कर अयोध्या जाने की बात कही गई है, लेकिन इस किताब में से वो दो पेज गायब हैं जिसमे उनके अयोध्या में रुकने का जिक्र है. ऐसा नहीं कह सकते कि वो अयोध्या नहीं गए.

अयोध्या राम कि जन्मभूमि है, इसमें कोई संदेह नहीं है- वैद्यनाथन

रामलला विराजमान ने वकील ने कहा कि अयोध्या राम कि जन्मभूमि है. इसमें कोई संदेह नहीं है. जिन पर सदियों से लोगों कि आस्था है. वैद्यनाथन विदेशी पर्यटकों जोसफ टाइपन बैरल, मोंटगोमेरी मार्टिन इत्यादि द्वारा लिखी पुस्तकों का जिक्र कर रहे हैं. जिनमे भगवान राम के इतिहास और मंदिर के तोड़े जाने व लोगों की भगवान के प्रति अटूट आस्था का जिक्र है. उन पर झूठ लिखने की कोई बाध्यता नहीं थी. इसलिए उनके लिखे को झुठलाया नहीं जा सकता. 1854 के डॉक्युमेंट ‘The Gazetteer of Territory under East India Company.’ का भी जिक्र किया गया.

‘Encyclopedia of india’ का हवाला देते हुए वैद्यनाथन ने कहा कि 1858 में राम जन्म भूमि को तोड़े जाने का पूरा संदर्भ है. गैजेट में लिखा है “शहर के पास पूर्व में कुछ अवशेष मिले हैं, जो भगवान राम के किले के हैं और इसे ही हिंदुओं के द्वारा भगवान राम का जन्मस्थान कहा जाता है.”  वैधनाथन ने कहा कि विदेशी यात्रा वृत्तांत/यात्रा से संबंधित किताब से ये बात भी साबित होती है कि वहां भव्य मंदिर था जिसे नष्ट किया गया था.

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