असदुद्दीन ओवैसी को आई बाबरी ढांचे की याद, ट्वीट की 6 दिसंबर 1992 की तस्वीर

इससे पहले भी ओवैसी ने भूमि पूजन को लेकर लगातार विरोध किया है. उन्होंने इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री का इस कार्यक्रम में हिस्सा लेना संवैधानिक नहीं है.
Asaduddin Owaisi reminds Babri, असदुद्दीन ओवैसी को आई बाबरी ढांचे की याद, ट्वीट की 6 दिसंबर 1992 की तस्वीर

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण के लिए बुधवार को रहे भूमिपूजन (Bhoomi Pujan) के अवसर पर लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने बाबरी मस्जिद का राग छेड़ा है. 6 दिसंबर, 1992 को भीड़ के हाथों ध्वस्त विवादित ढांचे को ओवैसी ने याद करते हुए एक ट्वीट भी किया.

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ओवैसी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी.’ उन्होंने बाबरी विध्वंस की तस्वीर शेयर करते हुए हैशटैग बाबरी जिंदा है भी लिखा.

इससे पहले भी ओवैसी ने भूमि पूजन को लेकर लगातार विरोध किया है. उन्होंने इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री का इस कार्यक्रम में हिस्सा लेना संवैधानिक नहीं है.

ओवैसी ने 29 जुलाई को ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आधिकारिक तौर पर भूमिपूजन में हिस्सा लेना प्रधानमंत्री की संवैधानिक शपथ का उल्लंघन होगा. धर्मनिरपेक्षता संविधान की मूल भावना है.’ साथ ही उन्होंने लिखा था ‘हम भूल नहीं सकते कि 400 साल तक अयोध्या में बाबरी मस्जिद खड़ी रही थी और उसे 1992 में अपराधी भीड़ ने ढहा दिया था…’

हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने विवादित बाबरी ढांचा गिराने के लिए कांग्रेस को भी कटघरे में खड़ा किया था. एक ट्वीट में ओवैसी ने लिखा था, ‘जिसका हक़ बनता है, उसे क्रेडिट दिया जाना चाहिए. आखिर वो राजीव गांधी ही थे, जिन्होंने बाबरी मस्जिद का ताला खोला था और वो पीवी नरसिम्हा राव ही थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए ये पूरा विध्वंस देखा था. कांग्रेस संघ परिवार के साथ विध्वंस के इस अभियान में हाथ में हाथ डाले खड़ी रही.’

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