बदसलूकी की ‘चार्जशीट’ में आज़म अव्वल!

आज़म ख़ान को लेकर अगर ये कहा जाए कि वो सिर्फ़ अश्लील और आपत्तिजनक ही नहीं देते, बल्कि अपने घनघोर विवादित बयानों पर माफ़ी मांगने से कतराते हैं, तो गलत नहीं होगा.
आजम खान, बदसलूकी की ‘चार्जशीट’ में आज़म अव्वल!

सियासत में आज़म ख़ान का लंबा-चौड़ा विवादित इतिहास है. रामपुर के विधायक से लेकर सांसद बनने तक के सफर में उन्होंने बेग़म नूरबानो से लेकर प्रधानमंत्री मोदी तक किसी को नहीं बख़्शा. हैरानी की बात तो ये है कि सार्वजनिक रूप से अश्लीलता, आपत्तिजनक बयान और इमोश्नल ड्रामे में आज़म बहुत माहिर हैं.

1980 में आज़म ख़ान पहली बार रामपुर से विधायक चुने गए थे. तब से लेकर अब तक जैसे-जैसे उनका राजनीतिक रसूख बढ़ा, वैसे-वैसे उनके विवादित बयानों की लिस्ट भी बढ़ती गई और अब तो उन्होंने संसद में स्पीकर की सीट पर बैठीं सांसद रमा देवी पर सदन में आपत्तिजनक बयान टिप्पणी कर दी. दरअसल, महिलाओं के प्रति आज़म ख़ान की ये आपत्तिजनक फ़ितरत नई नहीं है. रामपुर में रहने वाली कांग्रेस नेता बेग़म नूरबानो के ख़िलाफ़ उनके विवादित बयानों की लंबी फेहरिस्त है.

नूरबानो पर निशाना
आज़म ख़ान ने सियासत में एंट्री के बाद से ही विरोधियों पर तीखे हमले शुरू कर दिए थे. हालांकि, उनके राजनीतिक हमलों का निशाना शुरूआत में रामपुर की कांग्रेस नेता नूरबानों रहीं. उन्होंने नूरबानो के ख़िलाफ़ सार्वजनिक मंच से ऐसे-ऐसे बयान दिए, जिनका ज़िक्र करना भी मुश्क़िल है. वो हमेशा बेग़म नूरबानो पर बेहद आपत्तिजनक बयान देते रहे, जो अक्सर सुर्ख़ियां बनते थे. ऐसा भी नहीं है कि नूरबानो पर तमाम तरह के निजी हमलों के दौरान आज़म की ज़ुबान गलती से फिसली हो और बाद में उन्होंने अफसोस जताया हो. बल्कि, वो तो जान-बूझकर ऐसे बयान देते थे और उस पर बेशर्मी के साथ अड़े रहते थे. अगर मीडिया उनसे बयान को लेकर कोई सवाल पूछता, तो वो पत्रकारों पर ही भड़क जाते थे. आज़म की अश्लीलता का आलम ये है कि बेग़म नूरबानो के परिवार से लेकर उनकी निजी ज़िंदगी और यहां तक कि उनके पहनावे पर भी तमाम तरह के आपत्तिजनक बयान देते रहे.

मायावती पर आज़म के बिगड़े बोल
बीएसपी अध्यक्ष मायावती के ख़िलाफ़ आज़म ख़ान ने कई बार विवादित टिप्पणी की. मायावती को लेकर दिए गए बयान पर समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं को खेद जताना पड़ा. जब बात बिगड़ी और मामला ज़्यादा विवादित होने लगा, तो आज़म ने बात को कुछ इस तरह से बनान की कोशिश की, जैसे सारी गलती मीडिया की हो. वो मीडिया पर बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ते नज़र आए.

जया प्रदा पर शर्मनाक टिप्पणी
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आज़म ने रामपुर में जया प्रदा के ख़िलाफ़ बेहद शर्मनाक टिप्पणी की. उन्होंने जया प्रदा के कपड़ों को लेकर ऐसा बयान दिया कि उनके ख़िलाफ़ FIR तक दर्ज़ कराई गई. सार्वजनिक रूप से एक महिला के ख़िलाफ़ ऐसा बयान देकर भी आज़म ख़ान को कोई मलाल नहीं था.

मुलायम को खाकी निक्कर वाला बताया
अमर सिंह के साथ विवादों की वजह से जब मुलायम सिंह ने आज़म ख़ान को पार्टी से बाहर कर दिया, तब आज़म का असली रूप सामने आया. उन्होंने समाजवादी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम के ख़िलाफ़ यहां तक कह दिया कि वो धोती के नीचे खाकी निक्कर पहनते हैं. यानी उनका कहना था कि मुलायम सिंह राष्ट्रीय स्वयं संघ वाली सोच रखते हैं. 2009 में आज़म ने मुलायम के लिए कहा था कि उनकी मर्दानगी सिर्फ़ रामपुर तक ही सीमित है. जबकि पार्टी में रहकर उन्होंने तमाम बार मुलायम सिंह को अपने पिता समान बताया था.

अमर सिंह को दलाल बताया था
आज़म ख़ान और अमर सिंह के बीच का विवाद सारी दुनिया के सामने विवादित बयानों के ज़रिए सामने आया. आज़म और अमर सिंह दोनों ने मर्यादाएं लांघीं और एक-दूसरे के ख़िलाफ़ ख़ूब टिप्पणी की. हालांकि, अश्लील बयानों की अधिकतर शुरुआत आज़म ने ही की.

करगिल विजय पर आपत्तिजनक बयान
2014 के चुनाव के दौरान आज़म ख़ान ने कहा था कि करगिल युद्ध मुस्लिम सैनिकों की वजह से जीता गया था, हिंदू सैनिकों की वजह से नहीं. इस बयान को लेकर बीजेपी ने उनके ख़िलाफ़ चुनाव आयोग से शिकायत की थी और उनके बयान को समाज में बंटवारे वाला बयान बताया था. बाद में आज़म ने अपने बयान को लेकर गोल-मोल तरीके से जवाब दिया और बचने की कोशिश की.

संजय और राजीव गांधी पर विवादित बयान
संजय गांधी और राजीव गांधी की मौत को लेकर भी आज़म ख़ान विवादित बयान दे चुके हैं. उन्होंने दोनों की मौत को लेकर कहा था कि अल्लाह ने दोनों को उनके गुनाहों की सज़ा दी है.. क्योंकि, संजय गांधी ने जबरन नसबंदी योजना चलाई थी और राजीव गांधी ने विवादित रामजन्मभूमि परिसर में पूजा के लिए ताले खुलवाए थे.

पुलिस-प्रशासन के अफसरों से बदलसूकी
आज़म ख़ान और उनके समर्थक अक्सर सरकारी अधिकारियों के साथ बदसलूकी करते हैं. 2004-2005 में रामपुर के तत्कालीन एसपी प्रेम प्रकाश ने आज़म के लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तो उनके खिलाफ तीन महीने तक आज़म ख़ान ने धरना दिया. 2013 में रामपुर में शुभ्रा सक्सेना डीएम थीं. उन पर एक फाइल पास करवाने को लेकर आज़म ख़ान ने दबाव बनाया, शुभ्रा सक्सेना ने ये कहकर इनकार कर दिया कि वो कोई भी गैरकानूनी काम नहीं करेंगी. इस बात से नाराज़ आज़म ख़ान ने भरी मीटिंग में उन पर फाइल फेंककर मारी थी. नाराज़ महिला डीएम ने अपना ट्रांसफर करवा लिया था.

आज़म ख़ान को लेकर अगर ये कहा जाए कि वो सिर्फ़ अश्लील और आपत्तिजनक ही नहीं देते, बल्कि अपने घनघोर विवादित बयानों पर माफ़ी मांगने से कतराते हैं, तो गलत नहीं होगा. हां, इतना ज़रूर है कि जब वो हर तरफ़ से घिर जाते हैं, तो इमोश्नल कार्ड खेलकर जनता के सामने सार्वजनिक रूप से आंसू बहाने लगते हैं. वो विक्टिम कार्ड से अपने विवादित बयानों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हैं. लेकिन, इस बार देश की सबसे बड़ी पंचायत में उन्होंने सांसद रमा देवी पर जो टिप्पणी की है, उसके बाद आज़म को ये एहसास हो गया होगा कि सार्वजनिक मंच से चंद लोगों की तालियां हासिल करने के लिए वो कुछ भी कहकर बच नहीं सकते.

आज़म ख़ान को अपनी हदें पहचाननी होंगी, क्योंकि नेता अपने विवादित बयानों से बड़ा नहीं होता, बल्कि जब बड़ा नेता हो जाता है तो विवादित बयानों से बचता है.

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