पुलवामा में CPRF के 40 जवानों की शहादत पर रोया था पूरा देश, 13वें दिन भारत ने यूं लिया बदला

पुलवामा आतंकी हमला भारत की संप्रभुता को सीधी चुनौती थी, बदला तो लेना ही था. तारीख चुनी गई 26 फरवरी, 2019. जगह - पाकिस्‍तान के खैबर पख्तूनख्वा का बालाकोट.

आज (14 फरवरी) पूरा देश पुलवामा के शहीदों को याद कर रहा है. ठीक एक साल पहले, 2019 में पुलवामा में CRPF के एक काफिले को निशाना बनाया गया था. इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए. पूरा देश इस कायराना हमले में शहीद जवानों के लिए रोया. बदले की ज्‍वाला सीने में धधकने लगी. अब आतंकियों को सबक सिखाना जरूरी हो गया था. ये भारत की संप्रभुता को चुनौती थी, बदला तो लेना ही था. मगर उसका प्‍लान बेहद सावधानी से बना. तारीख चुनी गई 26 फरवरी, 2019. जगह – पाकिस्‍तान के खैबर पख्तूनख्वा का बालाकोट.

कैसे शुरू हुई तैयारी?

हमले के अगले दिन यानी 15 तारीख को सुरक्षा पर बनी केंद्रीय कमेटी (CCS) की बैठक बुलाई गई. इसी मीटिंग में पाकिस्‍तान को जवाब देने पर चर्चा हुई. एक्‍शन कैसे लिया जाए, इसके विकल्पों पर माथापच्‍ची की गई. देश में पाकिस्‍तान के खिलाफ गुस्सा चरम पर था. उरी हमले के जवाब में सर्जिकल स्‍ट्राइक की गई थी, इस बार दुश्मन को नेस्तनाबूद करने के एयर स्ट्राइक का फैसला लिया गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयर स्ट्राइक की प्लानिंग और इसको अंजाम देने की जिम्मेदारी NSA अजीत डोभाल को दी. तत्कालीन वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ और अजीत डोभाल ने पूरे ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया. ये तय किया गया कि पाकिस्तान के बालाकोट में मौजूद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा. टारगेट का पेरिमीटर सेट किया गया. अब खुफिया एजेंसियों ने जरूरी इनपुट निकालने शुरू किए. R&AW और IB ने बालाकोट में जैश के प्रमुख ठिकानों की सटीक लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया.

पूरी स्‍ट्राइक एयरफोर्स को अंजाम देनी थी मगर सेना को भी एलर्ट पर रखा गया. लाइन ऑफ कंट्रोल पर आर्मी पूरी तरह सतर्क थी. बालाकोट में टारगेट सेट था, अब हथियार चुनने थे. पहले एयर स्ट्राइक के लिए सिर्फ मिराज 2000 यूज होने थे, लेकिन ऑपरेशन के दो दिन पहले AWACS को भी शामिल कर लिया गया. सभी विमान ग्वालियर में तैनात किया गया और आगरा बेस को भी एलर्ट पर रख दिया गया.

एयर स्ट्राइक से ठीक एक दिन पहले, 25 फरवरी की शाम को ऑपरेशन में शामिल लोगों के फोन बंद कर दिए गए. पीएम मोदी, एनएसए अजीत डोभाल और एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ लगातार अपडेट ले रहे थे. अपने तैयारी के साथ पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखना भी जरूरी था. इसलिए पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम पर पैनी नजर रखी जा रही थी.

फिर आई वो रात…

बदले की घड़ी करीब आ रही थी. 26 फरवरी की रात मिराज 2000 ने ग्वालियर से उड़ान भरी. आगरा और बरेली एयरबेस को पहले से ही एलर्ट पर थे. एक साथ 12 मिराज विमान सुबह 3 बजे खैबर पख्तूनख्वा में दाखिल हुए और बालाकोट में बम बरसाने शुरू कर दिए. पाकिस्तान की एयरफोर्स अचानक हुए इस हमले से सकपका गई. जल्‍दबाजी में अमेरिका से मिले F-16 विमान एक्टिव किए गए. पाकिस्तान कुछ कर पाता, उसके पहले ही हिंदुस्तानी एयरफोर्स अपना काम कर चुकी थी.

इंडियन एयरफोर्स ने इस स्ट्राइक में वहां मौजूद मौजूद जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप को बर्बाद कर दिया. एयर स्‍ट्राइक के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने आला अफसरों के साथ साउथ ब्लॉक में बैठक कर पूरी जानकारी ली. थोड़ी देर बाद, पुलवामा के जवानों की शहादत के बदले की बात जनता को बताई गई.

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