सरकारी बैंकों के विलय के विरोध में गरजे कर्मचारी, कहा- गलत समय पर लिया फैसला

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सी. एच. वेंकटचालम ने कहा कि इस विलय का मतलब छह बैंकों का बंद होना है.

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के सदस्य 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाए जाने के केंद्र सरकार के फैसले का विरोध कर रहे हैं. सरकारी और निजी बैंकों में काम कर रहे इस संगठन के सदस्य शनिवार को विरोध दर्ज कराने के लिए काली पट्टी बांधकर अपने दफ्तर पहुंचे.

‘गलत समय पर लिया गया फैसला’
संघ के महासचिव सी. एच. वेंकटचालम ने कहा कि सरकार ने बैंकों को विलय का यह फैसला गलत समय पर लिया है. इसकी समीक्षा जरूर की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस विलय का मतलब छह बैंकों का बंद होना है. वेंकटचालम ने यह भी कहा कि इस फैसले के विरोध में एक रैली की भी योजना है.

वेंकटचालम ने कहा, “सरकार इसे विलय कह सकती है लेकिन इससे छह बैंक बैंकिंग क्षेत्र से गायब हो जाएंगे, जिन्हें बनने में सालों लगे हैं. इस फैसले का हम विरोध करते हैं. हड़ताल पर जाने को लेकर दिल्ली में 11 सितंबर को संघ की बैठक होगी.”

10 सरकारी बैंकों के विलय से 4 बड़े बैंक
बता दें कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने के फैसले का ऐलान किया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया में इस विलय की घोषणा की. उन्होंने कहा कि बैंकों के विलय का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत बैंकों का निर्माण करना है, ताकि देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जा सके.

सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक में कुछ दूसरे सरकारी बैंकों का विलय करके चार बड़े बैंक बनाने का फैसला किया है. पीएनबी विलय के बाद देश का दूसरा और केनरा बैंक चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा. विलय के बाद कुल सरकारी बैंकों की संख्या 12 रह जाएगी.

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