LAC पर PLA के बार-बार पिटने के बाद अब तिब्बती सैनिकों की आड़ ले रहा चीन, जबरन की जा रही तैनाती

जिनपिंग ने अब तिब्बती सेना पर दांव खेलना शुरू कर दिया है. उन्होंने भारत के तिब्बत फोर्स के खिलाफ अपने तिब्बती सैनिकों को ही खड़ा कर दिया है, लेकिन चीन के ये तिब्बती सैनिक चीन से ज्यादा भारत को ही अपना समझते हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 11:02 pm, Thu, 17 September 20
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कहने को तो चीन के पास करीब पंद्रह लाख सैनिक हैं, लेकिन पूर्वी लद्दाख में लगातार पिटने के बाद चीनी सैनिक भारत से सीधे-सीधे लड़ने को तैयार नहीं हो रहे. इसी वजह से जिनपिंग ने अब तिब्बती सेना पर दांव खेलना शुरू कर दिया है. उन्होंने भारत के तिब्बत फोर्स के खिलाफ अपने तिब्बती सैनिकों को ही खड़ा कर दिया है, लेकिन चीन के ये तिब्बती सैनिक चीन से ज्यादा भारत को ही अपना समझते हैं और वो भारतीय सैनिकों से युद्ध करने से हिचक रहे हैं. ये खबर इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसमें आजाद तिब्बत की आहट सुनाई दे रही है.

एक के बाद करीब तीन महीने में भारत की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स ने पूर्वी लद्दाख में चीन की दुस्साहस का करारा जवाब दिया. गलवान से लेकर पैंगोंग तक PLA को धूल चटाई और अब हिमालय की ऊंची चोटियों पर भारतीय सैनिक जा पहुंचे हैं, जहां से चीनी सैनिकों की हरकतों पर सीधी नजर रखी जा रही है.

मतलब बिना लड़े युद्ध जीतने का सपना देखने वाली लाल सेना. लद्दाख में बैकफुट पर है, लिहाजा सीमा से करीब डेढ़ हजार किलोमीटर दूर आतिशबाजी कर भारत को डराने का ख्वाब देख रहा है. चीन तिब्बत के पठार को जंग का मैदान बना रहा है.

तिब्बत में युद्धाभ्यास क्यों कर रहा चीन?

सवाल उठता है कि चीन ने दिखावे वाले युद्धाभ्यास के लिए तिब्बत को ही क्यों चुना? क्या जिस तिब्बत के साथ चीन गुलाम जैसा सलूक करता रहा है. अब उसके प्रति ड्रैगन का दिल पिघल रहा है?

जवाब है नहीं, चूंकि पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों को बार-बार भारतीय सेना के तिब्बती सिपाही धूल चटा रहे हैं. चीन की हर साजिश को हिमालय पर दफ्न कर रहे हैं और जब उनके पराक्रम का मुकाबला करना चीन की चॉकलेटी सेना को मुश्किल लगने लगा, तो चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी ने अपना फोकस तिब्बत की तरफ घुमा दिया.

लद्दाख में भारतीय सेना के साथ कदमताल करते हुए तिब्बती सैनिकों के कदम लगातार हिमालय की ऊंची चोटियों की ओर बढ़ते जा रहे हैं. पैंगोंग की चोटियों को इन सैनिकों ने पैक कर रखा है और सर्द मौसम में सफेद रणक्षेत्र की गर्मी बढ़ा दी है.

पर्वतीय इलाकों में वारफेयर के माहिर ‘तिब्बती सैनिक’

बता दें कि भारत में तिब्बती सैनिकों की स्पेशल फोर्स और विकास रेजीमेंट के जवान बेहद घातक माने जाते हैं. ये सेना की पैरा कमांडोज के साथ तैयार हुए हैं. लद्दाख के माहौल में पले-बढ़े तिब्बती सैनिक लद्दाख के सैनिकों की तरह ही उच्च पर्वतीय इलाकों में वारफेयर के माहिर हैं.

साथ ही चीन के कब्जे वाली अपनी सरजमीं को वापस लेने के लिए तिब्बती शेरों का खून खौल रहा है. तिब्बत से पलायन कर लद्दाख में बसे सैकड़ों तिब्बती परिवारों की तीसरी पीढ़ी इस समय चीन से अपना घर वापस लेने के लिए सेना के साथ स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के पैरा कमांडो के रूप में ड्रैगन के खिलाफ मैदान में हैं.

29-30 अगस्त की रात इसी फोर्स ने ब्लैक टॉप पर कब्जा किया था, जिस ऑपरेशन में स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के डिप्टी लीडर 51 वर्षीय नईमा तेनजिन शहीद हो गए थे और इसी पराक्रम से चीन इतना खौफजदा है कि अब उसे हाथ से तिब्बत जाने का डर सताने लगा है. इसीलिए तिब्बत को जिनपिंग आर्मी ने युद्ध का मैदान बना दिया है और तिब्बती सैनिकों को जबरन LAC पर भेजा जा रहा है, जबकि सच्चाई ये है कि तिब्बती सैनिक LAC पर भारत के खिलाफ रणभूमि में जाने से हिचकते हैं.

मोर्चे पर नहीं आना चाहते PLA के तिब्बती सैनिक  

इस वक्त पैंगोंग में फिंगर 4 से लेकर कई जगहों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने सामने हैं. इतने नजदीक कि एक दूसरे को नंगी आंखों से देख सकते हैं और आपस में बातचीत भी कर सकते हैं.

इस माहौल में PLA के तिब्बती सैनिक मोर्चे पर आना नहीं चाहते, क्योंकि चीन के तिब्बती सिपाही के मन में भारत के प्रति अगाध प्रेम है और उन्हें इस बात का ख्याल है कि भारत में तिब्बती सैनिकों की शहादत पर 130 करोड़ हिंदुस्तानी गर्व करते हैं, जबकि चीन अपने तिब्बती नागरिकों के साथ तालिबान जैसा सलूक करता है.

चीन के कब्जे के बाद से तिब्बतियों पर बढ़े अत्याचार

आंकड़े बताते हैं कि 1950 में जबसे तिब्बत पर चीन ने जबरन कब्जा किया. तब से 12 लाख तिब्बतियों की हत्या हुई. 6000 बौद्ध मठों का विध्वंस हुआ और हजारों तिब्बितयों को जेल में डाल दिया गया.

अब जरा सोचिए कि ऐसे माहौल में कोई तिब्बती कैसे चीन के लिए सीमा पर लड़ने-मरने जा सकता है, लेकिन मजबूरी के मारे उसे जाना ही होता है, क्योंकि ऐसा नहीं करने पर उनका रैंक कम कर दिया जाता है. उनका परिवार मुश्किलों में आ जाता है. सरकारी मदद रोक दी जाती है और भविष्य में परिवार के किसी सदस्य को नौकरी भी नहीं दी जाती है.

ऐसे हालात में चीन के तिब्बती सिपाहियों को मजबूरन चीनी फौज का साथ देना पड़ता है, लेकिन इस बार हालात जुदा हैं. टक्कर भारत के साथ है. इसलिए चीनी तिब्बती सैनिकों की हिचकिचाहट लाजमी है.

LAC पर डटे ITBP के जवान

चीन के अंदर इन दिनों तिब्बत के नाम से इतना खौफ क्यों भरा है? इसकी एक और वजह हैं. भारत और चीन के बीच करीब 4000 किलोमीटर की LAC की सुरक्षा की जिम्मेदारी ITBP संभालती है. ITBP यानी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस फोर्स करीब पांच महीने से भारत-चीन तनातनी के बीच सेना के साथ ITBP के हिमवीर सबसे आगे खड़े हैं.

हिमालय से भी ऊंचे अपने जोश के बूते भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के जवान चीन से सटी सरहद की सुरक्षा करते हैं. ड्रैगन की एक-एक साजिश पर आंखें गड़ाए रहते हैं और उसकी एक-एक चाल का करारा जवाब देते हैं.

1962 में चीन ने धोखे से भारत के पीठ में खंजर घोंपा था. हिमालय पर चीनियों को भाई मानने वाले भारतीय सिपाहियों का गर्म लहू बहा और तभी से चीन से लगी सरहद की निगहबानी ITBP कर रही है.

किस तरह से होती है LAC पर तैनाती?

भारत-चीन सीमा पर ITBP के जवान साल भर तैनात रहते हैं. फॉरवर्ड मोस्ट लोकेशन पर सबसे आगे ITBP होती है. उसके पीछे आर्मी के जवान, लेकिन जब दुश्मन हरकत करते हैं, तो भारतीय सैनिक भी ITBP के साथ फॉरवर्ड मोस्ट लोकेशन में आ जाते हैं, जैसा कि इन दिनों चीन के चलते हुआ है.

अब तक ITBP की तैनाती फिंगर 2 और फिंगर 3 के पास ध्यान सिंह पोस्ट पर हुआ करती थी, लेकिन इस वक्त साउथ पैंगोंग की शीर्ष चोटियों पर ITBP के जवान डटे हैं. 29-30 अगस्त की रात ब्लैक टॉप, हिल टॉप और येलो बंप्स वाले ऑपरेशन में सेना और स्पेशल फ्रंटियर के साथ ITBP के पर्वतवीर थे, जो इस वक्त 17 हजार फीट ऊंची चोटियों पर डटे हैं. सर्दी बढ़ने के साथ ही वहां उनके डटे रहने की तैयारी भी मुकम्मल हो चुकी है.

चंडीगढ़ से बुलाई गई अतिरिक्त बटालियन

लद्दाख की चोटियों पर ITBP के जवानों को दो-दो मोर्चों से लड़ना होता है. एक मोर्चे पर तो चीन को लगतार कड़ा जवाब दिया जा रहा है और अब दूसरा मोर्चा यानी माइनस पचास डिग्री की ठंड से भी मुकाबले की तैयारी पूरी हो चुकी है. गर्माहट वाले टेंट भी चोटियों पर भेजे जा रहे हैं. इसके अलावा चीन की चाल को देखते हुए चंडीगढ़ से अतिरिक्त बटालियन को भी लद्दाख में तैनात किया गया है.