बंगाल: जुमे की नमाज के विरोध में भाजयुमो ने सड़क पर किया हनुमान चालीसा का पाठ

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने 13 जून को राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चुनाव के बाद हुई हिंसा के मुद्दे पर एक बैठक की.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव फ़िलहाल ख़त्म होता नहीं दिख रहा.

अभी चुनाव को लेकर हिंसा ख़त्म भी नहीं हुई थी कि मंगलवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे. जिससे सड़क पर जाम लगने लगा और यातायात व्यवस्था भी बाधित हुई.

वहीं BJYM का तर्क है कि अगर राज्य सरकार शुक्रवार को सड़क पर नमाज पढ़े जाने की इजाजत दे सकती है तो फिर मंगलवार को सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ने में क्या बुराई है.

BJYM अध्यक्ष ओपी सिंह का कहना है, ‘ममता बनर्जी के राज में हमने देखा है कि शुक्रवार को ग्रैंड ट्रंक रोड और दूसरी मुख्य सड़कें नमाज के लिए ब्लॉक कर दी जाती हैं. सड़कें जाम होने से लोगों को दफ्तर पहुंचने में देर होती है और मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं.’

सिंह के मुताबिक जब तक यह क्रम रोका नहीं जाएगा, वे हर मंगलवार शहर की मुख्य सड़कों पर हनुमान मंदिरों के पास हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ेंगे. BJYM के प्रदर्शन से भी यातायात बाधित रहा और लोग ट्रैफिक में फंसे नजर आए.

ज़ाहिर है पश्चिम बंगाल में साल 2018 के पंचायत चुनाव के समय से ही राज्य के अंदर दोनों पार्टियों के बीच तानातनी की स्थिति बनी हुई है. लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच राज्य में जबरदस्त हिंसा देखने को मिली थी.

कुछ दिनों पहले ही राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे और उन्हें राज्य की स्थिति से अवगत कराया था. जिसके बाद केंद्र सरकार ने ममता सरकार को नोटिस जारी कर प्रदेश में राजनीतिक हिंसा रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में रिपोर्ट देने को भी कहा था.

गृह-मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटनाओं की संख्या वर्ष 2016 में 509 से बढ़कर 2018 तक 1,035 हो गई, जबकि 2019 में 773 घटनाएं अबतक पहले से ही दर्ज की जा चुकी हैं.

गृह मंत्रालाय ने कहा, “तदनुसार, 2016 में मौत का आंकड़ा 36 से बढ़कर 2018 तक 96 हो गया, जबकि 2019 में अब तक 26 मौतें हो चुकी हैं.”

सलाह में कहा गया है कि “इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 2016 से 2019 तक राजनीतिक हिंसा की निरंतर प्रवृत्ति, कानून के शासन को बनाए रखने और लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को प्रेरित करने के लिए राज्य के कानून प्रवर्तन तंत्र की ओर से विफलता का संकेत है.”

इसमें आगे कहा गया, “भारत सरकार पश्चिम बंगाल में प्रचलित स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है. अनुरोध किया जाता है कि राज्य सरकार व उसके कानून प्रवर्तन मशीनरी द्वारा उठाए गए कदमों की एक रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाए, ताकि हिंसा की घटनाओं की जांच हो और इस पर अंकुश लगाने के साथ अपराधियों को नामजद किया जा सके.”

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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने 13 जून को राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चुनाव के बाद हुई हिंसा के मुद्दे पर एक बैठक की और ऐसी स्थिति पैदा करने को कहा जिसमें शांति और सद्भाव कायम रहे.