भीमा कोरेगांव में NIA चार्जशीट: माओवादियों के साथ मोर्चा बनाने की सजिश रच रहा था स्टेन स्वामी

NIA की चार्जशीट में CPI और माओवादियों के साथ मोर्चा बनाकर सशस्त्र मिलिशिया को मोदी सरकार के सामने खड़ा करने की साजिश का आरोप है, जिसका सबसे अहम किरदार स्टेन स्वामी था.

Stan Swamy (FILE)

भीमा कोरेगांव मामले की जांच एजेंसी NIA की चार्जशीट में अब फादर स्टेन स्वामी का नाम भी सामने आया है. चार्जशीट के मुताबिक, एजेंसी को पता चला है कि नक्सलियों ने दलित और मुस्लिम ताकतों को मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा करने की तैयारी कर रखी थी. यह सभी जानकारी एनआईए की तरफ से दायर की गई सप्लीमेंट्री चार्जशीट का हिस्सा है.

चार्जशीट में CPI और माओवादियों के साथ मोर्चा बनाकर सशस्त्र मिलिशिया को मोदी सरकार के सामने खड़ा करने की साजिश का आरोप है, जिसका सबसे अहम किरदार स्टेन स्वामी था. केंद्र की सरकार को फासीवादी सरकार बताकर दलित और मुस्लिम विघटनकारी ताकतों को एक साथ लाने की स्वामी की साजिश थी.

NIA ने अपनी चार्जशीट में रोना विल्सन की एक चिट्ठी का भी जिक्र किया है, जिसमें ये ‘फासीवादी सरकार’ के खिलाफ एक अपेक्स बॉडी बनाने का सुझाव दिया गया है. चिट्ठी में लिखा गया है, “एक ‘ऑल इंडिया फ्रंट’ फासीवादी ताकतों के खिलाफ प्रचार के लिए काफी नहीं होगा. फ्रंट को ग्रामीण स्तर पर छोटे कस्बों, शहरी इलाकों से लगे इलाकों में सक्रिय उग्रवादी संगठनों से जुड़ना पड़ेगा.”

“दलित-मुस्लिम ताकतों को एक साथ खड़ा करना चाहिए”

इसमें आगे लिखा गया, ‘शुरू से ही हमें दलित और मुस्लिम ताकतों को ज्यादा से ज्यादा एक साथ खड़ा करना चाहिए, जैसा कि देश के कुछ हिस्सों में अभी हो रहा है’ चिट्ठी में ये भी लिखा गया है कि ऐसी दलित ताकतें दक्षिण तमिलनाडु, गुजरात और मुस्लिम मिनोरिटी फोर्सेज केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में सैकड़ो कैडर को गुरिल्ला उग्रवादी ट्रेनिंग दे रहे हैं. हिंदुत्व के द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यक और दलितों पर जो हमले हो रहे हैं. उसके चलते हमारे इस एजेंडे से ये लोग भावनात्मक रूप से जुड़ रहे है.”

चार्जशीट के अनुसार, स्टेन स्वामी, सीपीआई(एम), सुधीर दावड़े, रोना विल्सन, सुरेंदर गडलिंग, अरुण फरेरा, वर्णम गोनजल्वे, हनी बाबू, शोमा सेन ,महेश राउत, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और अरविंद तेलतुंबड़े के संपर्क में था.

स्टेन स्वामी को मिली आठ लाख रुपए

आरोप है कि स्वामी ने CPI(M) गतिविधियों के प्रसार के लिए एक कॉमरेड के जरिए 8 लाख रुपए भी हासिल किए थे. NIA को इसके घर से कुछ गोपनीय कागजात, जो कि प्रोपेगैंडा मटेरियल और प्रेस रिलीज बरामद हुई है. चार्जशीट की मुताबिक, स्टेन स्वामी की जहरीली सोच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके घर से निक्सलबाड़ी पर लिखा हुआ, 50 साल पुराना लिट्रेचर भी बरामद हुआ है.

इसके अलावा NIA ने स्वामी के घर से सेंट्रल कमेटी के कुछ सर्कुलर भी बरामद किए हैं. साथ ही कुछ ऐसे कागजात मिले है. जिसमे तस्करी के तरीके लिखे हैं. स्टेन के पास से कुछ लेटर भी मिले हैं, जो कि किसी प्रशांत और विजयंत दादा को लिखे गए हैं. एक लेटर में लिखा है, “सभी कॉमरेड्स की गिरफ्तारी के बाद संगठन को भारी नुकसान हुआ है.”

“सभी मेंबर्स कोडवर्ड में करें बात”

वहीं दूसरे लेटर लिखा है, “GS यानी जनरल सेकेट्री ने आपस मे बातचीत के लिए सुरक्षित चैनल का इस्तेमाल करने के खास निर्देश दिए है. साथ ही सभी मेंबर्स को आपस मे बातचीत के लिए कोडेड भाषा का इस्तेमाल करने को कहा गया है. साथ ही GS ने ये भी बोला है कि सभी SC लीडर्स एक सिद्धांत पर काम करे ‘नो रेस्ट, नो नेगलिजेंस, नो मर्सी. हमें ये सबकुछ मौजूदा ह्यूमन और फाइनेंशल रिसोर्सस के साथ हर हाल में करना है.’

चार्जशीट में बताया गया है कि जुलाई 2017 को एक कॉमरेड सुनील धवले के घर से तेलगु में लिखी चिठ्ठी मिली, जिसमें लिखा था सुनील को संगठन के एक प्रोग्राम की जिम्मेदारी दी जाए.

हनी बाबू का क्या था रोल?

इसके NIA की चार्जशीट में हनी बाबू के बारे में बताया गया है. हनी बाबू KCP(MC) के इंफॉर्मेशन एंड पब्लिसिटी सेकेट्री के संपर्क में था. इसके यहां से कुछ गोपनीय ईमेल मीले हैं, जिनसे पता चलता है कि ये CPI(M) के लिए फंड जुटा रहा था. इसके अलावा हनी बाबू दिल्ली के छात्रों के बीच पैठ बनाकर माओवादियों के लिए उनके मन मे सहानुभूति पैदा कर रहा था. इसके खास टारगेट पर अल्पसंख्यक और दलित छात्र थे.

इसके घर से बरामद दस्तावेज इस तरफ इशारा करते हैं कि ये मुंबई और सूरत में संगठन की पैठ बनाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ना चाहता था.

जांच के दौरान यह भी पता चला है की गिरफ्तार आरोपियों, जो कि सीपीआई के मेंबर हैं. CPI(M) को अर्बन एरिया में बढ़ावा दे रहे थे. यह सब कुछ फरार मिलिंद तेलतुमबड़े के इशारे पर हो रहा था. इन सभी ने कोर्ची एरिया में 2 से 3 महीने की हथियार और फिजिकल ट्रेनिंग ली थी.

गौतम नवलखा की भूमिका

सप्लीमेंट्री चार्जशीट में साफ तौर पर लिखा गया है कि गौतम नवलखा शहरी इलाकों में एक्टिव था. उसका काम था संगठन से बुद्धिजीवियों को जोड़ना ताकि उन्हें गवर्नमेंट फोर्सेज के खिलाफ खड़ा किया जा सके. गौतम नवलखा फैक्ट फाइंडिंग कमेटी में भी हिस्सा लिया था और उसको गोरिल्ला एक्टिविस्ट को संगठन में रिक्रूट करने का काम मिला था. यह संगठन था CPI(M).

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