छेड़छाड़ के आरोप में सस्पेंड थे प्रोफेसर, BHU ने फिर किया बहाल, छात्रों ने शुरू किया प्रदर्शन

प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब प्रोफेसर को छेड़छाड़ के मामले में जांच समिती दोषी ठहरा चुकी है तो विश्वविद्यालय ने उनकी बहाली क्यों की.

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के छात्रों ने शनिवार को सस्पेंड किए गए प्रोफेसर की बहाली के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रोफेसर एसके चौबे पर यूनिवर्सिटी की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है.

हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रोफेसर को केवल सेंसर किया जा रहा है, लेकिन वे कोई जिम्मादारी वाला पद नहीं संभाल सकेंगे. प्रशासन ने छात्रों को समझाने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन वे आरोपी प्रोफेसर की बर्खास्तगी की मांग पर अड़े रहे. भारी तदाद में बीएचयू के सिंहद्वार पर बैठकर छात्रों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा.

प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब प्रोफेसर को छेड़छाड़ के मामले में जांच समिती दोषी ठहरा चुकी है तो विश्वविद्यालय ने उनकी बहाली क्यों की. कार्रवाई की मांग करते हुए छात्रों ने कहा कि आरोपी प्रोफेसर को बचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

रिपोर्ट के मुताबिक बीएचयू के रजिस्ट्रार नीरज त्रिपाठी ने मामले पर बात करते हुए कहा कि आरोपी प्रोफेसर को पहले सस्पेंड कर दिया गया था और अब उन्हें केवल सेंसर किया जा रहा है. यह मामला फिर से बीएचयू के निर्णय लेने वाली उच्च संस्था के सामने रखा जाएगा.

नीरज त्रिपाठी ने कहा, “मामले पर संज्ञान लेते हुए आरोपी को सस्पेंड कर दिया गया था. जांच समिती ने रिपोर्ट सौंपी और बीएचयू की निर्णय लेने वाली उच्च संस्था ने प्रोफेसर को सेंसर किया. वह बीएचयू में न तो कोई जिम्मेदारी वाला पद ले सकते हैं, न कोई इवेंट अटेंड कर सकते हैं और न ही किसी अन्य कॉलेज और विश्वविद्यालय में अप्लाई कर सकतें हैं.”

बता दें कि साल 2017 में बीएचयू कैम्पस में एक छात्रा के साथ छेड़खानी का मामला सामने आने के बाद वहां के छात्र-छात्राओं ने उग्र आंदोलन किया था. आरोपी प्रोफेसर की बर्खास्तगी की मांग करते हुए छात्रों ने दो दिनों तक धरना भी दिया था, जिसके बाद उन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें कई छात्र-छात्राएं घायल हुए थे.

 

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