भूपेन हजारिका के बेटे नागरिकता विधेयक से हैं नाखुश, पिता को ‘भारत रत्न’ दिए जाने पर कही ये बात

हाल ही में मशहूर गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा हुई थी. लेकिन फिलहाल इसे लेकर एक विवाद उभरता हुआ नजर आ रहा है. दरअसल भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने पिता को भारत रत्न दिए जाने पर सवाल खड़े किए थे. तेज हजारिका ने इस संदर्भ में एक फेसबुक […]

हाल ही में मशहूर गायक भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा हुई थी. लेकिन फिलहाल इसे लेकर एक विवाद उभरता हुआ नजर आ रहा है. दरअसल भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने पिता को भारत रत्न दिए जाने पर सवाल खड़े किए थे. तेज हजारिका ने इस संदर्भ में एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी. उन्होंने लिखा, “मेरा मानना है कि मेरे पिता के नाम का ऐसे समय इस्तेमाल किया गया जब नागरिकता (संशोधन) विधेयक जैसे विवादित बिल को अलोकतांत्रिक तरीके से लाने की तैयारी की जा रही है. यह भूपेन दा की उस विचारधारा के बिल्कुल खिलाफ है जिसका उन्होंने हमेशा समर्थन किया.”

तेज हजारिका इस समय अमेरिका में रह रहे हैं. उनके इस लेख से मीडिया में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे. इस पर तेज ने अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने लिखा, “कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि मैं अपने पिता को दिए गए भारत रत्न को स्वीकार करूंगा या नहीं? उन्हें बता दूं कि मुझे अभी तक इसको लेकर कोई निमंत्रण नहीं मिला है, तो अस्वीकार करने जैसा कुछ है ही नहीं अभी. दूसरी बात, केंद्र सरकार ने इस सम्मान को देने में जिस तरह की जल्दबाजी दिखाई है और जो समय चुना है वह और कुछ नहीं बस लोकप्रियता का फायदा उठाने का सस्ता तरीका है.”

भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने को लेकर उनका परिवार बंटा हुआ नजर आ रहा है. भूपेन हजारिका के भाई समर हजारिका और भाभी मनीषा हजारिका को उन्हें भारत रत्न दिए जाने से कोई आपत्ति नहीं है. उनका साफ कहना है कि भारत रत्न का अपमान नहीं करना चाहिए. दूसरी तरफ, तेज हजारिका का कहना था कि वह अपने पिता को दिया गया भारत रत्न तभी लेंगे जब केंद्र सरकार नागरिकता (संशोधन) विधेयक को वापस ले लेगी.

नागरिकता संशोधन विधेयक क्या है?
केन्द्र सरकार नागरिकता विधेयक के जरिए 1955 के कानून को संशोधित करना चाहती है. इससे अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों (हिंदु, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी व इसाई) को भारत की नागरिकता आसानी दी जा सकेगी. इस विधेयक के पास हो जाने से 6 साल बाद ही भारत की नागरिकता मिल जाएगी. जबकि वर्तमान कानून में यह समयावधि 12 साल है.