‘बिलकिस बानो को 50 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी-घर दो’, सुप्रीम कोर्ट का गुजरात सरकार को आदेश

2002 गुजरात दंगों की सबसे भयावह घटनाओं में से एक बिलकिस बानो गैंगरेप कांड में गुजरात सरकार ने 5 लाख रुपये मुआवजा देने की पेशकश की थी.

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो गैंगरेप केस में फैसला सुनाते हुए पीड़िता को 50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को इसके लिए दो सप्‍ताह का समय दिया है. इसके अलावा बिलकिस बानो को सरकारी नौकरी और उनकी पसंद की जगह पर सरकारी आवास मुहैया कराए जाने का आदेश भी सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. अदालत ने गुजरात सरकार से कहा कि खुद को किस्‍मतवाला समझ‍िए कि हम आपके खिलाफ कोई टिप्‍पणी नहीं कर रहे हैं.

पहले गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो को मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये देने का प्रस्‍ताव दिया था, जिसे उन्‍होंने ठुकरा दिया. सुप्रीम कोर्ट में आज सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्‍ता और संजीव खन्‍ना की बेंच ने मुआवजा राशि 10 गुना बढ़ा दिया.

2002 गुजरात दंगों की सबसे भयावह घटनाओं में से एक बिलकिस बानो गैंगरेप कांड के सात आरोपियों को बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने दोषी करार दिया था. फैसले के खिलाफ दो डॉक्‍टर्स और चार पुलिसकर्मियों की अपील शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई, 2017 को ठुकरा दी थी.

कब हुई वारदात?

गुजरात दंगों के दौरान बचकर भाग रही बिलकिस और उनके परिवार पर 3 मार्च, 2002 को हथियारों से लैस भीड़ ने हमला किया था. दंगाइयों ने बिलकिस बानो का गैंगरेप किया. उनकी 2 साल की बच्‍ची को पीट-पीटकर मार दिया गया. बिलकिस बानो के परिवार के कुल 14 लोगों को उस दिन मौत के घाट उतार दिया गया था. तब बिलकिस बानो की उम्र सिर्फ 19 साल थी. बिलकिस बानो ने न्‍याय हासिल करने के लिए स्‍थानीय पुलिस, एनजीओ, सीजीआई से लेकर शीर्ष अदालत तक का दरवाजा खटखटाना पड़ा.

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