बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को लगा तगड़ा झटका, हरसिमरत कौर के इस्तीफे के क्या हैं मायने

कोविड-19 (Covid-19 pandemic) महामारी, आर्थिक मंदी और सीमा पर चीनी आक्रामकता के बीच केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा (Bhartiya Janta Party) को तगड़ा झटका लगा है.

Harsimrat Kaur Badal

कोविड-19 महामारी, आर्थिक मंदी और सीमा पर चीनी आक्रामकता के बीच केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा को तगड़ा झटका लगा है. दरअसल गुरुवार को भाजपा के एक पारंपरिक सहयोगी मंत्री ने कृषि क्षेत्र से संबंधित मुद्दे को लेकर इस्तीफा दे दिया.

केंद्र की मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो चुका है, और भाजपा एक महत्वपूर्ण राज्य में चुनाव के लिए कमर कस रही है. इस बीच भाजपा के दो सबसे पुराने सहयोगियों शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल (SAD) उसका साथ छोड़ चुके हैं.

शिवसेना पिछले सााल हुए महाराष्ट्र चुनाव के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग हो चुकी है. वहीं अभी शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर (harsimrat kaur badal) ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का साथ छोड़ दिया है. हालांकि उनकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (SAD) अभी भी एनडीए का हिस्सा बनी हुई है.

कृषि बिल से नाराज हरसिमरत कौर

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल की बहू हरसिमरत ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री के रूप में यह कहते हुए इस्तीफा दिया कि उनकी पार्टी किसान विरोधी कानून का समर्थन नहीं कर सकती है.

लोकसभा में कृषि विधेयकों के पारित होने के एक घंटे के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया “लोकसभा में ऐतिहासिक कृषि सुधार विधेयकों का पारित होना देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है. ये बिल किसानों को बिचौलियों और बाधाओं से मुक्त करेंगे.”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “बहुत सारी शक्ति किसानों को भ्रमित करने में लगी हुई हैं. मैं अपने किसान भाइयों और बहनों को विश्वास दिलाता हूं कि एमएसपी और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी. ये बिल वास्तव में किसानों को कई और विकल्प देकर सशक्त बनाने जा रहे हैं.”

हरसिमरत कौर का इस्तीफा भाजपा के लिए बड़ा झटका

गुरुवार को हुए हरसिमरत कौर का इस्तीफा भाजपा के लिए बड़ा झटका है जो कि कई मायने रखता है. वास्तविक नियंत्रण रेखा एलएसी पर चीन के साथ तनाव, देश के आर्थिक हालात, बेरोजगारी और कृषि मुद्दे को लेकर शिरोमणी अकाली दल का सरकार का साथ छोड़ देना जैसे मुद्दे आगामी बिहार चुनाव में विपक्ष को भाजपा के खिलाफ माहौलउ बनाने के लिए नया मौका देंगे. वहीं भाजपा को कई राज्यों में जोड़ तोड़ कर सत्ता हासिल करने के आरोपों से भी लड़ना होगा.

कृषि बिल पर सरकार के कदम का विरोध उन राज्यों में हुआ है, जिन्हें कृषि पॉवरहाउस माना जाता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. राज्यों का यह विरोध ऐसे समय में है जब सरकार महामारी संकट के बीच खाद्य सुरक्षा के प्रावधान प्रवासी श्रमिकों को मुफ्त राशन और खाना देने पर अधिक जोर दे रही है.

क्या है APMC?

कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी (Agricultural Produce Market Committee) मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर (Cess) हैं.

पंजाब में कृषि विधेयक का हो रहा विरोध

गौरतलब है कि कृषि से जुड़े विधेयकों का पंजाब में काफी विरोध हो रहा है क्योंकि किसान और व्यापारियों को इससे एपीएमसी मंडियां समाप्त होने की आशंका है. यही कारण है कि प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है. इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल  ने कृषि से जुड़े विधेयकों के विरोध में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया है.

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने गुरुवार को लोकसभा में कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 और मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा विधेयक 2020 का विरोध किया. इसके बाद मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

 

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