राजनाथ-योगी तक जुड़ते हैं सांसद-विधायक जूताकांड के तार, पढ़ें Inside Story

2017 यूपी विधानसभा चुनाव जीतने के बाद योगी सीएम बने और राकेश बघेल विधायक, इसके बाद जिले में जो दबदबा 2014 से 2017 के बीच कभी सांसद शरद त्रिपाठी था, वो अब बघेल का होने लगा..
bjp mp Sharad Tripathi bjp mla Rakesh Baghel inside story, राजनाथ-योगी तक जुड़ते हैं सांसद-विधायक जूताकांड के तार, पढ़ें Inside Story

संतकबीरनगर (उत्‍तर प्रदेश): आजाद भारत के आज़ाद लोकतंत्र के इतिहास के सबसे बड़े जूताकांड की एक-एक तस्वीर देश की सवा सौ करोड़ जनता ने अब तक जरूर देख ली होगी. इन तस्वीरों में आपने एक ही दल के दो नेताओं भिड़ते देखा. एक सांसद को एक विधायक को पीटते देखा, संविधान की शपथ लेने वाले दो लोगों को गंदी-गंदी गालियां देते देखा, लेकिन इन तस्वीरों से इतर सासंद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश सिंह बघेल की एक तस्वीर ऐसी भी है, जो इन दो नेताओं के आपसी संबंध, सामाजिकता, एक पार्टी में होने के नाते दोनों के व्यवहार और एक जिले का होने के नाते दोस्ती की अलग कहानी बताती है.

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मतलब एक तस्‍वीर वो जिसमें सांसद शरद त्रिपाठी विधायक राकेश सिंह बघेल को मार रहे हैं और दूसरी तस्‍वीर वो जिसमें दोनों एक बाइक पर बैठे नजर आते हैं. जब इन दो तस्वीरों को आप साथ देखेंगे तो कम से कम एक तस्वीर आपको दोस्ती या फिर दुश्मनी की कहानी पर यकीन न करने पर मजबूर कर देगी…. हम ऐसा इसलिए कह रहे है क्योंकि एक तस्वीर आपको 1975 में रिलीज़ फ़िल्म शोले के अमिताभ बच्चन (जय) और धर्मेन्द्र (वीरू) की बुलेट पर दोस्ती जैसी कहानी दिेखाती है, जिसमें जय की भूमिका में राकेश बघेल बाइक का हैंडल थामे नज़र आते हैं और बगल में वीरू की भूमिका में सासंद शरद त्रिपाठी बैठे नज़र आएंगे, लेकिन अगले ही पल दूसरी तस्वीर इस दोस्ती को गब्बर सिंह बनाम ठाकुर की लड़ाई जैसी लगेगी, जिसमें दोनों एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन जाते हैं.

कब और क्यों हुआ सांसद और विधायक में झगड़ा

बुधवार को योजना आयोग की बैठक से दो दिन पहले संतकबीरनगर जिले से पड़ोसी जिले सिद्धार्थ नगर को जोड़ने वाली सड़क, जो नंदौर से बांसी को जाती है उस 12 किमी की सड़क बनाने का हाल में ऐलान हुआ था. राज्य सरकार के फंड से ये सड़क बननी थी, जिसको बनवाने का प्रयास सासंद और विधायक दोनों मिलकर कर कई साल से कर रहे थे. इस सड़क को बनाने के लिए सरकार ने आदेश के साथ साथ फंड भी जारी कर दिया, जिसका शिलान्यास विधायक राकेश बघेल ने कर दिया.

सांसद शरद त्रिपाठी का आरोप है कि इस मौके पर न तो उन्‍हें बुलाया न ही शिलापट्ट पर उनका नाम लिखा गया. इसी बात को लेकर ज़िला योजना की बैठक में सांसद ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारी से सवाल किया, जो विधायक राकेश बघेल को बुरी लगी क्योंकि ये इस अधिकारी ने विधायक के कहने पर ही जिले के सासंद को न तो अधिकारिक रूप से न्योता दिया न ही शिलापट्ट पर सांसद का नाम. इसी बात पर अधिकारी ने सांसद से सवाल पूछा, इस पर विधायक ने आपत्ति की, जो कहासुनी में तब्दील हुई और कहासुनी कैसे जूते तक पहुंची वो सभी ने देखा.

विधायक और सासंद में पहले से चल रही थी अदावत

2017 यूपी विधानसभा चुनाव जीतने के बाद योगी सीएम बने और राकेश बघेल विधायक, इसके बाद जिले में जो दबदबा 2014 से 2017 के बीच कभी सांसद शरद त्रिपाठी था, वो अब बघेल का होने लगा. शायद यही वजह रही कि पहले जो राकेश बघेल, शरद को भइया कहकर संबोधित करते थे, अब वो मिलने पर “का हो सांसद जी कहने लगे”. दोनों के रिश्तों में खटास आनी शुरू हो गई. इस तरह सांसद त्रिपाठी और विधायक राकेश बघेल के बीच खटास आने लगी और दोनों एक-दूसरे को नापसंद करने लगे.

विधायक राकेश बघेल सीम योगी आदित्‍यनाथ के करीबी माने जाते हैं, जबकि सांसद शरद त्रिपाठी गृहमंत्री राजनाथ के करीबी. हालांकि, रिश्‍ते खराब होने के बाद भी जूताकांड से पहले दोनों के बीच सार्वजनिक तौर पर कोई झगड़ा नहीं हुआ, लेकिन अंदरखाने टसल चल रही थी. इसका उदाहरण, बीजेपी की कमल ज्योति बाइक रैली में देखने को मिला.

इस दौरान न सिर्फ कार्यकर्ताओं में मतभेद हुए बल्कि जिले में तैनात दोनों बिरादरी के अधिकारी भी दो जातियों में बंट गए. (मतलब- सांसद की जाति वाले और विधायक की जाति वाले) नतीजा यह हुआ कि जब राकेश बघेल ब्राह्मण अधिकारी को आदेश देते तो वह टाल-मटोल करता. इसी तरह सांसद शरद त्रिपाठी के साथ भी होने लगा. दो दिन पहले जिस सड़क का शिलान्यास हुआ, उसमें भी शिलापट्ट न लगाने वाले अधिकारी भी ऐसे ही आदेश और मानसिकता से ग्रस्‍त दिखे. इसी बात पर सांसद ने उनसे सवाल किया, लेकिन अधिकारी के बदले विधायक जवाब देने लगे और देश ने सबसे बड़ा जूताकांड देखा.

कौन हैं विधायक राकेश बघेल और सासंद शरद त्रिपाठी

राकेश सिंह बघेल संतकबीरनगर के बघौली ब्‍लॉक के मेडरापार गांव के रहने वाले हैं और गोरखपुर के राप्ती नगर में रहते हैं. राकेश बघेल का मूल पेशा सड़क और सिंचाई की ठेकेदारी है और इनके भाई अखिलेश सिंह की रिशु कंस्ट्रक्शन नाम की फ़र्म है, जिसे अखिलेश सरकार के दौरान बने रिवर फ्रंट को बनाने का ठेका मिला था. इसी मामले में विधायक के भाई की फर्म पर हाल में लखनऊ ईडी ने छापेमारी की थी.

2007 में सीएम योगी आदित्‍यनाथ जब सासंद थे, तब उनके राकेश उनके संपर्क में आए और बाद में हिंदू युवा वाहिनी में शामिल हो गए. उनके समर्थन से राकेश बघौली से ब्‍लॉक प्रमुख बने और दो बार मेहदावल विधानसभा से चुनाव भी लड़े. पहली बार हार मिली, जबकि दूसरी बार वह जीत गए. सासंद शरद त्रिपाठी गोरखपुर के खजनी ब्‍लॉक के रहने वाले हैं, उनके पिता रमापति राम त्रिपाठी पुराने और खांटी भाजपा नेता हैं.

यूपी के पूर्व सीएम और मौजूदा गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेहद करीबी हैं. राजनाथ सिंह के पहली बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के दौरान रमापति राम त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने थे.

रमापति राम त्रिपाठी तीन बार विधानसभा का चुनाव लड़े और तीनों बार हारे. यहां तक कि प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी वह 2012 में सिसवा विधानसभा से लड़े थे, लेकिन जीत इस बार भी नहीं सके. प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए रमापति राम त्रिपाठी ने बेटे शरद त्रिपाठी को 2009 में संतकबीर नगर लोकसभा से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह हार गए. 2009 में योगी से त्रिपा्ठी परिवार के संबंध अच्छे थे, लेकिन 2012 में योगी ने शरद के पिता रमापति के विधानसभा चुनाव लड़ने का विरोध किया था, यहीं से दोनों में दूरी बननी शुरू हो गई.

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