जूताकांड वाले बीजेपी सांसद-विधायक की ‘शोले’ स्‍टाइल तस्‍वीर की कहानी

दिसंबर 2018 में बीजेपी ने उत्‍तर प्रदेश में 'कमल यात्रा' बाइक रैली निकाली थी, जिसमें विधायक राकेश बघेल और शरद त्रिपाठी दोनों शामिल हुए थे. यहां सार्वजनिक तौर पर झगड़ा तो नहीं हुआ पर अंदरखाने काफी कुछ चल रहा था.
BJP MP thrashes party MLA with shoe inside story, जूताकांड वाले बीजेपी सांसद-विधायक की ‘शोले’ स्‍टाइल तस्‍वीर की कहानी

संतकबीरनगर (उत्‍तर प्रदेश): बीजेपी सांसद शरद त्रिपाठी ने अपनी ही पार्टी के विधायक को जूते से कितनी बुरी तरह पीटा, इसकी तस्‍वीरें और वीडियो पूरा देश देख रहा है. सड़क निर्माण के लिए लगाई गई शिलापट्टिका पर सांसद का नाम गायब था, जिसे लेकर सवाल पूछा गया और बात जूतमपैजार तक पहुंच गई, यह खबर तो अब अखबारों में छपकर पुरानी भी हो गई, लेकिन इस घटनाक्रम में नई जानकारी यह है कि सांसद शरद त्रिपाठी और विधायक राकेश बघेल कभी एक बाइक पर साथ भी घूमा करते थे.

दिसंबर 2018 में बीजेपी ने उत्‍तर प्रदेश में ‘कमल यात्रा’ बाइक रैली निकाली थी, जिसमें संतकबीरनगर जिले के विधायक राकेश बघेल और शरद त्रिपाठी दोनों शामिल हुए थे. इस रैली में राकेश बाइक चला रहे थे और उसी बाइक पर सांसद शरद त्रिपाठी पीछे बैठे थे. दोनों एक ही बाइक पर पूरे शहर में साथ घूमे थे. इस दौरान सांसद-विधायक के व्यक्तिगत संबंध ठीक रहे, लेकिन राजनीतिक कटुता बरकरार रही. हालांकि, सार्वजनिक जगहों पर दोनों ने अंदर के गुबार को जाहिर नहीं होने दिया. दरअसल, दोनों के रिश्तों को लेकर एक बात ये भी कही जाती है कि यूपी की राजनीति से शरद त्रिपाठी के परिवार का पुराना नाता है और उनके पिता यूपी की राजनीति के बड़े और पुराने चेहरों में एक हैं.

एक वक्‍त था जब यूपी में सांसद शरद त्रिपाठी के पिता रमापति त्रिपाठी की तूती बोलती थी. वह राजनाथ सिंह के बेहद करीबी रहे. राजनाथ सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए रमापति को उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष भी बनाया गया था. तब राकेश बघेल का राजनीति से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं था. हालांकि, बघेल उस वक्त भी रमापति त्रिपाठी के घर आते-जाते थे और प्रदेश अध्यक्ष का बेटा होने के नाते शरद त्रिपाठी का बहुत सम्मान भी करते थे.

2009 में शरद त्रिपाठी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. उधर, रमापति त्रिपाठी के यहां तवज्‍जो न मिलने पर राकेश बघेल बीजेपी से हिंदू युवा वाहिनी की तरफ मुड़ गए, वह योगी आदित्‍यनाथ के करीब आ रहे थे. ये उस दौर की बात है जब योगी सांसद थे. तब योगी का रसूख इतना नहीं था कि वह बीजेपी में अपने किसी समर्थक को बड़ा पद दिला सकें. वह हिंदू युवा वाहिनी को गोरखपुर के बाहर ले जाना चाहते थे. इसी दौरान पेशे से ठेकेदार राकेश बघेल योगी से मिले और हिंदू युवा वाहिनी में शामिल हो गए.

2009 में शरद त्रिपाठी लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे, उसी दौरान राकेश बघेल योगी के सहयोग से ब्‍लॉक प्रमुख का चुनाव लड़े और जीत गए, जबकि शरद त्रिपाठी को हार का सामना करना पड़ा. साल बीतने के साथ-साथ राकेश बघेल राजनीतिक रूप से खुद को मज़बूत करते गए और योगी के क़रीब होते गए.

2012 में योगी की पैरवी से इन्हें टिकट मिला, लेकिन वह चुनाव हार गए. 2014 लोकसभा चुनाव में शरद त्रिपाठी सांसद चुने गए और फिर 2017 में योगी के आशीर्वाद से ही राकेश बघेल को टिकट मिला और वो विधायक भी बने, लेकिन राकेश बघेल के चुनाव में शरद त्रिपाठी की बहुत भूमिका नहीं रही. जिले के सासंद होने के बाद भी उन्होंने राकेश बघेल का न तो चुनाव में प्रचार किया न ही उनके लिए वोट मांगा.

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