बीजेपी ने 4 राज्यों में जीत के लिए भूपेंद्र यादव समेत इन चार पर लगाया दांव, जानिए कैसे बने Victory Machine

इस साल 4 राज्यों में चुनाव होने हैं जिनमें महाराष्ट्र सबसे बड़ा है. बीजेपी ने भूपेंद्र यादव समेत 4 प्रभारी चुन लिए हैं जिनके कंधे पर जीत का ज़िम्मा होगा. इनमें सबसे ज़्यादा निगाहें भूपेंद्र पर ही टिकी हैं क्योंकि उनका प्रदर्शन बताता है कि वो जहां जाते हैं वहां पार्टी जीतती है.

bhupendra, बीजेपी ने 4 राज्यों में जीत के लिए भूपेंद्र यादव समेत इन चार पर लगाया दांव, जानिए कैसे बने Victory Machine

बीजेपी ने चार राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने चार नेताओं को इन चार राज्यों में प्रभारी की ज़िम्मेदारी भी सौंप दी है.

दिल्ली में जावडेकर संभालेंगे मोर्चा
दिल्ली का प्रभार प्रकाश जावडेकर को दिया गया है जिनका साथ सह प्रभारी के तौर पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी देंगे. उनके अलावा एक और सह प्रभारी नित्यानंद राय होंगे जिनके पास गृहमंत्रालय में राज्यमंत्री का दायित्व भी है.

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दिल्ली में फिलहाल आम आदमी पार्टी का शासन है जिसके पहले कांग्रेस ने शीला दीक्षित के नेतृत्व में लंबे समय तक राज किया. जावड़ेकर के कंधों पर ज़िम्मेदारी है कि वो देश की राजधानी में पार्टी के लिए जीत का सूखा खत्म करें.

झारखंड में ओमप्रकाश माथुर लड़ाएंगे चुनाव
इसके अलावा झारखंड के लिए भी ज़िम्मे बांटे गए हैं. यहां पीएम मोदी के पुराने भरोसमंद और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर को चुनाव प्रभारी बनाया गया है. उन्हें बिहार सरकार में मंत्री नंद किशोर यादव का सह प्रभारी के तौर पर साथ मिलेगा.

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झारखंड मे बीजेपी ने पिछला चुनाव रघुबर दास की अगुवाई में ज़ोरदार ढंग से जीता था और उसकी चुनौती अपना प्रदर्शन बरकरार रखने की होगी.

नरेंद्र सिंह तोमर के हिस्से आया हरियाणा
हरियाणा के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को चुनाव प्रभारी चुना गया है. यूपी के मंत्री भूपेंद्र सिंह को उनके साथ सह प्रभारी बनाया गया है.

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साल 2014 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने दम पर सरकार बनाई थी. मनोहर लाल खट्टर को तब सीएम बनाया गया था. यहां भी पार्टी को अपना प्रदर्शन दोहराना है.

भूपेंद्र यादव के कंधे पर महाराष्ट्र का भार
जहां चुनाव होने हैं वो चौथा राज्य महाराष्ट्र है. क्षेत्रफल और आबादी दोनों के लिहाज़ से ये चारों में सबसे बड़ा है. बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया गया है. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या और कर्नाटक के पूर्व विधायक लक्ष्मण सावदी को चुनाव सह प्रभारी नियुक्त किया गया है.

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288 विधानसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन से टक्कर लेगा जो पिछली बार सत्ता से बाहर हो गई थी.

भूपेंद्र यादव पर टिकी सबकी निगाहें
भूपेंद्र यादव को चारों राज्यों में से सबसे बड़ा राज्य जिताने के लिए चुना गया है. पार्टी के भरोसे की वजह से वो लाइमलाइट में हैं. यूं भूपेंद्र यादव को पहली बार किसी बड़ी चुनौती से पार पाने के लिए नहीं चुना गया है, बल्कि उनका ट्रैक रिकॉर्ड इस बात का सबूत है कि वो दिए गए काम को कायदे से पूरा करते हैं.

हालिया लोकसभा चुनाव में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रभार मिला था और नतीजों ने साबित कर दिया था कि भूपेंद्र यादव की रणनीति अचूक थी. भूपेंद्र राजस्थान के पार्टी सांसद तो हैं ही, साथ में पार्टी के महामंत्री पद को भी संभाल रहे हैं. गुजरात में भी उनके पास अहम ज़िम्मेदारी रही है. साल 2013 में बीजेपी ने उन्हें राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रमुख रणनीतिकार बनाया था. उनकी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से करीबी है.

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भूपेंद्र यादव मूल रूप से हरियाणा के गुड़गांव के निवासी हैं लेकिन उनके पिता ने रेलवे की नौकरी के दौरान काफी वक्त अजमेर में बिताया. भूपेंद्र अजमेर में जन्मे हैं. कॉलेज जीवन में वो एबीवीपी के लिए काम करने लगे थे. फिर वकालत के दौरान उनका संपर्क अरुण जेटली से हुआ और जेटली ने उन्हें राम मंदिर केस से जुड़ी ज़िम्मेदारियां सौंपीं. भूपेंद्र को अच्छा वक्ता माना जाता है. संसद में अनुच्छेद 370 पर हाल ही में हुई बहस में उन्होंने अपना पक्ष काफी विस्तार से रखा था. आपको बता दें कि जब अमित शाह को गृहमंत्री बनाया गया था तब पार्टी अध्यक्ष के तौर पर उनका नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा था. हालांकि जेपी नड्डा ने इस मामले में बाज़ी मार ली लेकिन जिस तरह भूपेंद्र को महाराष्ट्र जैसे राज्य का ज़िम्मा सौंपा गया है उससे संकेत मिल रहा है कि बीजेपी आलाकमान उन पर बहुत भरोसा कर रहा है. भूपेंद्र यादव मोदी और शाह दोनों के करीबी हैं. महाराष्ट्र के मामले में उनकी सबसे बड़ी चुनौती पहले शिवसेना के साथ सीट बंटवारा होगा और उसके बाद कांग्रेस-एनसीपी को पछाड़ना रहेगा.

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