स्मार्ट टीवी के जरिए जगजाहिर हुए पति-पत्नी के निजी पल, संसद में उठा मामला

टेक्नालॉजी के फायदे हैं, तो उसके नुकसान भी बहुत हैं. इसका दुरुपयोग कई बार हमें शर्मसार कर सकता है. बेडरूम में स्मार्ट टीवी का होना खतरनाक है.

नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को राज्यसभा में एक कानून लाने की मांग की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सके. बीजेपी सांसद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तकनीक का इस्तेमाल कर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है, जो संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दर्शाता है. साथ ही एक और BJP सदस्य ने स्मार्ट होम उपकरणों का मुद्दा उठाते हुए इसे लोगों की गोपनीयता को बड़ा खतरा पैदा करने वाला बताया.

चंद्रशेखर ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान कहा, “कानूनी ढांचे की जरूरत है. प्रौद्योगिकी बहुत तेजी से बढ़ रही है.” सांसद एक निजी चैनल द्वारा दी गई गुलाबी पर्चियों के मुद्दे को भी उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें अध्यक्ष एम. वेंकैया नायडू ने अनुमति नहीं दी. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह साफतौर पर हितों का टकराव है, क्योंकि चंद्रशेखर एक टीवी चैनल के मालिक हैं.

चंद्रशेखर ने इस दिशा में अमेरिका की तर्ज पर कानून बनाने की मांग की. इसके अलावा सदन में बीजेपी सदस्य अमर शंकर साबले ने स्मार्ट होम उपकरणों का मुद्दा उठाते हुए इसे लोगों की गोपनीयता को बड़ा खतरा पैदा करने वाला बताया. उन्होंने सूरत में हाल ही में हुए मामले का हवाला दिया, जिसमें स्मार्ट टीवी के जरिए हैकर्स द्वारा एक जोड़े के अंतरंग क्षणों की वीडियोग्राफी कर इसे इंटरनेट पर अपलोड कर दिया गया था.

उन्होंने गोपनीयता को एक मुख्य चिंता का विषय बताते हुए सरकार को इस पर ध्यान देने की अपील की.  इस बीच, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं ने सरकार से डेटा सुरक्षा कानून को तत्काल लाने की मांग की. उन्होंने संसद परिसर में हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया. पश्चिम बंगाल के नेताओं ने निजी कंपनियों के साथ नागरिक डेटा साझा करने के लिए सरकार को निशाने पर लिया.

टीएमसी के सांसद सौगत राय ने कहा, “परिवहन मंत्रालय ने नागरिकों के डेटा को बेचकर 65 करोड़ रुपये कमाए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश में सभी उच्च शिक्षा पाने वाले छात्रों के सोशल मीडिया खातों को उनके संस्थान से जोड़ने के निर्देश दिए. हम इसका कड़ा विरोध करते हैं और डेटा सुरक्षा कानून लाने की मांग करते हैं.”

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