राम मंदिर फैसले से पहले RSS ने कसी कमर, BJP के मुस्लिम नेता संभालेंगे कमान

राम मंदिर फैसले पर धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अब भाजपा के मुस्लिम नेता मोर्चा संभालेंगे. उनका बखूबी साथ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के पदाधिकारी भी देंगे.
Ayodhya Ram temple decision, राम मंदिर फैसले से पहले RSS ने कसी कमर, BJP के मुस्लिम नेता संभालेंगे कमान

नई दिल्ली: राम मंदिर (Ram Mandir) मामले के फैसले की घड़ी ज्यों-ज्यों नजदीक आ रही है, दोनों समुदायों के अग्रिणी नेता सामाजिक समरसता बनाए रखने की कवायद में जुटे हुए हैं. इसी क्रम में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में दिल्ली में भाजपा के सभी छोटे-बड़े मुस्लिम नेताओं की मैराथन बैठक की.

सामाजिक समरसता और भाईचारा बनाये रखने के लिए बीजेपी राष्ट्रीय मीडिया डिपार्टमेंट ने देशभर में 6 सेन्टर बनाकर अपने सभी प्रदेश प्रवक्ताओं की कार्यशाला आयोजित कर रही है. कलकत्ता, बैंगलोर, मुम्बई, लखनऊ, पटना सरीखे शहरों में केंद्रीय प्रवक्ताओं की टोली भेजी गई है. दूसरे धर्म के लोगों से संवाद बनाने के लिए समितियां बनाई गई हैं.

राम मंदिर फैसले पर धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अब भाजपा के मुस्लिम नेता मोर्चा संभालेंगे. उनका बखूबी साथ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के पदाधिकारी भी देंगे. दोनों के समन्वय से देश की गंगा-यमुना तहजीब का ताना-बाना मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा. इसे लेकर कल शनिवार देर रात तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ ही भाजपा के वरिष्ठ व प्रदेश के मुस्लिम नेताओं और एमआरएम के पदाधिकारियों के साथ मैराथन बैठक हुई.

इसमें इसके लिए चार केंद्रीय समितियों का गठन भी किया गया है. जो दूसरे धर्म के लोगों से संवाद बढ़ाने के साथ पूरे अभियान का नेतृत्व करेगा. बैठक में सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल, सह संपर्क प्रमुख रामलाल व एमआरएम के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार मौजूद रहे.

इसी तरह केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन, शाजिया इल्मी, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अब्दुल रशीद अंसारी, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गैरूल हसन रिजवी, एमआरएम के अध्यक्ष अफजाल अहमद व प्रवक्ता यासिर जिलानी समेत कमोबेश सभी प्रदेशों के भाजपा मुस्लिम मोर्चा व एमआरएम के पदाधिकारी भी शामिल रहे.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से 17 नवंबर के पहले तक राम मंदिर पर फैसला आने की उम्मीद है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पूरजोर कोशिश है कि फैसला जो भी आएं, पर उसकी वजह से देश का माहौल खराब न हो.

इसी को लेकर दिल्ली के छतरपुर में संघ परिवार की तीन दिवसीय शीर्ष बैठक चली और उसमें इस बात पर जोर दिया गया कि फैसले को जीत-हार के रूप में नहीं देखा जाएगा. जो फैसला आएगा उसे सभी को खुलेमन से स्वीकार करना चाहिए. निर्णय के पश्चात देश का वातावरण सौहार्दपूर्ण रहे. इसके लिए जीत या हारने पर कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा.

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