…जब अमिताभ बच्चन को कहा जाने लगा था ‘बोफोर्स दलाल’

अमिताभ बच्चन, एक ऐसा नाम जिसे पहचान की जरूरत नहीं. इस नाम के दुनियाभर में लाखों फैन्स हैं. अमिताभ ने अपने शानदार अभिनय की बदौलत बॉलीवुड में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है. 76 साल का यह अभिनेता आज भी बॉलीवुड में पूरी ऊर्जा के साथ सक्रिय है. और अभिनय की नई कहानी लिख रहा है.

अमिताभ बच्चन से जुड़े कई किस्से बड़े ही मशहूर हैं. इन किस्सों को अक्सर उनके फैंस कहते-सुनते रहते हैं. आज हम भी आपके लिए अमिताभ से जुड़ा एक बड़ा ही रोचक किस्सा लेकर आए हैं. इस किस्से में उस दौर का जिक्र किया गया है जब अमिताभ सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने थे. और राजनीति के इस नौसिखिये सांसद को ‘बोफोर्स दलाल’ कहा जाने लगा था.

बात 1987 की है. बहुचर्चित बोफोर्स घोटाले को लेकर देशभर में हड़कंप मचा हुआ था. अमिताभ बच्चन उस समय इलाहाबाद से सांसद थे. अमिताभ ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर साल 1984 के लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी. उन्होंने इलाहाबाद लोकसभा सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया था. हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे.

साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी. इससे देशभर में कांग्रेस पार्टी के प्रति सहानुभूति की लहर थी. राजीव गांधी ने अपने मित्र अमिताभ बच्चन को राजनीति में आने के लिए राजी किया था. दरअसल कांग्रेस की नजर में अमिताभ ही वह शख्स थे जो इलाहाबाद लोकसभा सीट से हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे कद्दावर नेता को चुनौती दे सकते थे.

इलाहाबाद को हेमवती नंदन बहुगुणा का राजनीतिक गढ़ माना जाता था. बहुगुणा 1984 में इलाहाबाद से लोकदल के उम्मीदवार थे और पूरा विपक्ष भी उनके साथ था. वहीं, अमिताभ भी तब तक सुपर स्टार बन चुके थे. अमिताभ को लेकर लोगों में काफी क्रेज था. युवा अमिताभ को देखने के लिए लालायित रहते थे. युवा लड़कियों में भी अमिताभ का चार्म था.

बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन.

चुनावी पंडितों के लिए इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया था कि इलाहाबाद में ऊंट किस करवट बैठेगा. ऐसा माना जा रहा था कि मुकाबला काफी कांटे का होगा. लेकिन कांग्रेस की लहर और अमिताभ के स्टारडम ने नतीजे को एकतरफा कर दिया. अमिताभ ने बहुगुणा को एक लाख सत्तासी हजार से अधिक वोटों से हरा दिया.

राजनीति के जानकार बताते हैं कि अमिताभ बच्चन अपने राजनीतिक प्रभुत्व का खूब इस्तेमाल करते थे. कई मंत्रालयों में अपनी पसंद के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए सिफारिशें की थी. कहा जाता है कि अमिताभ के काम के तरीके को लेकर राजीव गांधी से इसकी शिकायत भी की गई थी.

फिर आया साल 1987. 1987 में मीडिया में बोफोर्स घोटाले ने खूब सुर्खियां बटोरी. विपक्षी पार्टियां लगातार बोफोर्स घोटाले को लेकर राजीव गांधी सरकार पर निशाना साधती रहीं. बोफोर्स घोटाले में अमिताभ बच्चन का भी नाम उछाला गया. बात यहां तक पहुंच गई कि उन्हें ‘बोफोर्स दलाल’ कहा जाने लगा.

अमिताभ बच्चन इस सबसे बहुत दुखी थे और उन्होंने राजनीति से इस्तीफा दे दिया. अमिताभ के अचानक दिए इस्तीफे ने लोगों को उसी तरह हैरान किया जैसे कि उनके राजनीति में आने के फैसले ने किया था. कुछ समय पहले अमिताभ बच्चन ने एक टेलीविजन चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राजनीति में उतरना मेरी सबसे बड़ी भूल थी.

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