जब एक भारतीय तांत्रिक के सामने नतमस्तक हो गई ब्रिटेन की प्रधानमंत्री!

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पिछले हफ्ते ट्रेन पकड़कर दिल्ली से मेरठ जा रहा था. मकानों, खेतों, फाटकों पर ट्रेन के गुज़रने का इंतज़ार करते लोगों के अलावा अगर कुछ सबसे ज़्यादा दिखा तो वो थे दीवार पर पुते तांत्रिकों के इश्तहार. बंगाली बाबा से लेकर अघोरी तांत्रिक तक हर कोई अपने विज्ञापान में टोने-टोटके, वशीकरण, मनचाही शादी और नौकरी का वादा कर रहा था. इन्हीं विज्ञापनों को देखते-देखते मेरे मन में भारत के सबसे चर्चित तांत्रिक चंद्रास्वामी का नाम आया.

चंद्रास्वामी के तंत्र मंत्र की गूंज भारत की सियासी गलियों में तो थी ही लेकिन सात समंदर पार ब्रिटेन की संसद तक भी उन्होंने धावा बोला.

ज़िंदगी भर चंद्रास्वामी विवादों से घिरे रहे मगर एक रहस्य का आवरण उनके जीवन पर पड़ा रहा. यही वजह है कि लोग आज तक उनके किस्से कहानियों को सुनकर हैरान होते रहते हैं.

नब्बे के दशक में चरम पर पहुंचे चंद्रस्वामी की मौत दो साल पहले गुमनामी में हुई. उससे पहले उन्होंने मुकदमे , बदनामी, और बीमारी भी झेली. आइए आज दो-चार होते हैं चंद्रास्वामी से जुड़े किस्सों से…

नटवर से चंद्रास्वामी की मुलाकात और अजीबोगरीब इच्छा

साल 1975 की गर्मियां थीं। कुंवर नटवर सिंह ब्रिटेन में उन दिनों भारतीय उप उच्चायुक्त के तौर पर काम कर रहे थे. इस पद पर नौकरी करनेवाले के पास कई ज़िम्मेदारियां होती हैं, जिनमें से एक है अपने देश से आए नामीगिरामी लोगों की मुरादें पूरी करना. नटवर सिंह को नहीं मालूम था कि इन गर्मियों में उन्हें एक 27-28 साल के तांत्रिक की मेज़बानी अनमना होकर ही सही लेकिन करनी पड़ेगी.  वो दौर राजस्थान के तांत्रिक चंद्रास्वामी के उभार का था. नौजवानी के दिनों में ही वो ना सिर्फ अपने क्षेत्र में नाम कर चुके थे बल्कि सियासी जमात में भी जाना पहचाना नाम थे, हालांकि अभी उनका सुनहरा दौर आना बाकी था.

लंदन दौरे पर पहुंचे तांत्रिक चंद्रास्वामी ने नटवर सिंह से मुलाकात की. उन्होंने नटवर सिंह और उनकी पत्नी को भोजन पर आमंत्रित किया. इस मुलाकात में चंद्रास्वामी अपनी विद्या के बल पर नटवर सिंह की पत्नी को प्रभावित करने में कामयाब रहे. हां, खुद नटवर सिंह को चंद्रास्वामी के तौर तरीके कुछ खास पसंद नहीं आए. कुछ ही दिन बीते कि भारत के तत्कालीन विदेशमंत्री वाई बी चव्हाण कुछ देर के लिए लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर रुके.  नटवर सिंह उनसे शिष्टाचार मुलाकात के लिए पहुंचे. बातचीत के दौरान नटवर सिंह ने चव्हाण को बताया कि चंद्रास्वामी मुझसे लॉर्ड माउंटबेटन और मार्गरेट थैचर से मुलाकात करने की गुज़ारिश कर रहे हैं. चव्हाण ने नटवर की उम्मीद के खिलाफ जाते हुए इन मुलाकातों के लिए हरी झंडी दे दी. नटवर बेचारे फंस चुके थे. मन मारकर उन्होंने भारत के आखिरी अंग्रेज़ गवर्नर जनरल रहे माउंटबेटन को फोन मिला दिया. माउंटबेटन ने मुलाकात की इच्छा तो जताई लेकिन साथ ही खेद भी प्रकट कर दिया क्योंकि वो अगले ही दिन छुट्टी मनाने के लिए उत्तरी आयरलैंड के लिए रवाना हो रहे थे. नटवर सिंह को राहत की सांस मिली. उन्होंने चंद्रास्वामी को बता दिया कि माउंटबेटन से मुलाकात संभव नहीं है. ज़रा मायूस हुए युवा चंद्रास्वामी ने तब थैचर से मिलने की इच्छा जताई. उस वक्त मार्गरेट थैचर इंग्लैंड की विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी की नेता नियुक्त हुई थीं. नटवर सिंह मुलाकात कराने को मन से तैयार नहीं थे लेकिन उनके सामने संकट एक और था. उन्हें डर था कि अगर मुलाकात के दौरान युवा तांत्रिक ने कोई अभद्र या असभ्य व्यवहार कर डाला तो वो खुद भी थैचर के सामने बेवकूफ नज़र आएंगे.

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ब्रिटेन की भावी पीएम से दिलचस्प मुलाकात

बहरहाल, नटवर सिंह ने थैचर से समय मांगा और वो मिल गया. थैचर को नटवर सिंह ने चंद्रास्वामी का संक्षिप्त परिचय पहले ही दे दिया था लेकिन थैचर समझ नहीं पा रही थीं कि आखिर चंद्रास्वामी उनसे मिलना क्यों चाहते हैं. सच तो ये है कि थैचर की भी उस मुलाकात में कोई दिलचस्पी नहीं थी लेकिन भारतीय उपउच्चायुक्त की तरफ से आए निवेदन पर उन्हें दस मिनट खर्चने में कोई बुराई नहीं लगी. अगले हफ्ते नटवर सिंह चंद्रास्वामी को लेकर हाउस ऑफ कॉमंस के दफ्तर पहुंच गए. हाउस ऑफ कॉमंस को आप ब्रिटेन की लोकसभा समझें। थैचर वहीं एक छोटे से कार्यालय में बैठती थीं. चंद्रास्वामी ने मुलाकात से पहले पूरी तैयारी कर ली. साधु का पूरा वेष धर कर उन्होंने माथे पर चौड़ा तिलक लगाया. हाथ में छड़ी ले ली और गले में रुद्राक्ष की माला डाल ली. नटवर सिंह चंद्रास्वामी के इस रंग ढंग से बहुत असहज महसूस कर रहे थे, लेकिन चंद्रास्वामी तो अपनी धुन में मस्त पूरे आत्मविश्वास से लबरेज़ होकर शाही गलियारों में चल रहे थे. लोग उन्हें देख रहे थे और चंद्रास्वामी इस बात का आनंद उठा रहे थे.

दोनों लोग थैचर के कमरे में पहुंचे. थैचर के संसदीय सचिव एडम बटलर भी कमरे में मौजूद थे. जान पहचान का छोटा सा दौर चला जिसके बाद शायद मार्गरेट थैचर ने मुलाकात जल्दी निबटाने के इरादे से सीधे पूछ लिया कि चंद्रास्वामी उनसे मिलना क्यों चाहते थे

थैचर के सिर चढ़ा चंद्रास्वामी का जादू 

अंग्रेज़ी से निपट अनजान तांत्रिक चंद्रास्वामी के लिए अनुवादक का काम नटवर सिंह को करना था. चंद्रास्वामी जल्दी में भी नहीं थे. उन्होंने इत्मीनान से कहाजल्द ही आपको पता चल जाएगा. थैचर ने इस अजीब से तांत्रिक को देखकर कहामैं इंतज़ार कर रही हूं. घड़ी की सुइयां अपनी गति से बढ़ रही थीं. मुलाकात के लिए दस मिनट का वक्त मुकर्रर हुआ था. चंद्रास्वामी अपनी अदाओं से वक्त खत्म कर रहे थे. कुछ देर में चंद्रास्वामी ने एक पेपर और पैन की मांग की. इसके बाद उन्होंने कागज़ फाड़कर थैचर के हाथ में पांच पर्चियां पकड़ा दीं और कहा कि वो कोई भी पांच अलग अलग सवाल इन पर्चियों में लिखकर रख लें. नटवर सिंह थैचर के चेहरे पर चिढ़ का एक हल्का सा भाव देख पा रहे थे लेकिन कुछ कर पाने में असमर्थ थे. चंद्रास्वामी पूरी फॉर्म में थे. उन्होंने सवाल लिखी पर्चियों को मुचड़कर गेंद जैसा बना देने को कहा. अब चंद्रास्वामी ने थैचर से कहा कि वो पांचों में से एक पर्ची खोलकर अपना सवाल देख लें. थैचर ने देखा और उधर चंद्रास्वामी ने हिंदी में बताया कि थैचर ने लिखा क्या था. नटवर सिंह ने अनुवाद कर दिया. थैचर के चेहरे से अचानक चिढ़ गायब होने लगी. उसकी जगह अब उत्सुकता थी. ज़ाहिर है, चंद्रास्वामी का निशाना ठीक लगा था. इसके बाद अगला सवाल भी चंद्रास्वामी ने ठीक बताया.

 चौथे सवाल तक आतेआते तो थैचर की भाव भंगिमा पूरी तरह से बदल गई थी. चंद्रास्वामी का उम्दा प्रदर्शन नटवर सिंह की लाज बचा रहा था. अब तक थैचर अपने सोफे के किनारे तक पहुंची थीं. चंद्रास्वामी ने भी संकोच छोड़कर अपनी चप्पेलें उतारीं और सोफे पर पद्मासन में जम गए. नटवर सिंह को कुछ बुरा लगा लेकिन वो थैचर को देखकर हैरान थे क्योंकि अब चंद्रास्वामी के तेवर उन्हें परेशान नहीं कर रहे थे. वो तो अब उनसे और सवाल करना चाहती थीं, लेकिन अब बारी चंद्रास्वामी की थी. कुछ जवाब देने के बाद अचानक चंद्रास्वामी ने बड़ी ही अदा से घोषणा कर दी कि अब वो किसी सवाल का जवाब नहीं देंगे क्योंकि सूर्य अस्त हो चुका है. बेचारे नटवर सिंह इस बात का अनुवाद करने से पहले झेंप गए. वो ब्रिटेन में विपक्ष की नेता के सामने बैठे थे और चंद्रास्वामी तेवर दिखाने पर आमादा थे. खैर, नटवर सिंह ने इस बात का भी अनुवाद कर डाला. एक बार फिर नटवर सिंह के हैरान होने की बारी थी. मार्गरेट थैचर उनसे चंद्रास्वामी के साथ एक और मुलाकात का निवेदन कर रही थीं. नटवर सिंह इस पासा उलट के लिए कहां तैयार थे, मगर चंद्रास्वामी तो चंद्रास्वामी थे. उन्होंने कहामंगलवार को दोपहर ढाई बजे नटवर सिंह जी के घर पर.

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PS- डेली मेल

थैचर मानने लगी चंद्रास्वामी की हर मांग

ब्रिटेन की आला नेता को इस तरह वक्त दिए जाने की ढीठता पर नटवर की नाराज़गी दबी नहीं रही. उन्होंने चंद्रास्वामी को हरकतों से बाज़ आने को कहा और बोले कि वक्त देने से पहले कम से कम थैचर से उनकी सुविधा तो पूछ लो, आखिर ये हिंदुस्तान तो नहीं है, लेकिन अब चंद्रास्वामी कहां मानने वाले थे. उन्होंने नटवर सिंह से कहाकुंवर साहब, अनुवाद कर दीजिए और फिर देखिए. नटवर सिंह खुद कहते हैं कि मैं तो हैरत में ही पड़ गया जब थैचर ने मेरे घर का पता पूछा , लेकिन अभी हैरान होने का सिलसिला पूरा नहीं हुआ था. चलने से पहले जाने कहां से चंद्रास्वामी ने अपने हाथ में ताबीज़ निकाल लिया. बोले कि इनसे कहिए जब मुझसे मिलने आएं तो ये ताबीज़ बाईं बाजू में पहनकर आएं. नटवर सिंह गुस्से से धधक रहे थे. उन्हें लग रहा था कि किसी ना किसी बेवकूफी पर बस डांट पड़ने ही वाली है. साफ कह दिया कि इस देहाती बकवास का अनुवाद मैं नहीं करनेवाला. थैचर ने हस्तक्षेप करते हुए पूछा कि साधु महाराज क्या कह रहे हैं. बेचारे नटवर सिंह ने सहमते हुए कहामैं माफी चाहता हूं मिसेज थैचर लेकिन चंद्रास्वामी चाहते हैं कि आप इस ताबीज़ को अपनी बाईं बाजू में बांधकर आएं. 

थैचर ने चुपचाप वो ताबीज़ लेकर रख लिया. चंद्रास्वामी और नटवर सिंह ने अब थैचर से जाने की अनुमति मांगी मगर चंद्रास्वामी को ना जाने क्या सूझा कि फिर बोलेकुंवर साहब, कृपया थैचर जी से कहिए कि मंगलवार को उन्हें लाल रंग की पोशाक पहननी चाहिए. अब नटवर सिंह बिलकुल सहने के मूड में नहीं थे. उनका मन हुआ कि वहीं चंद्रास्वामी की पिटाई शुरू कर दें लेकिन वो फंस चुके थे. उन्होंने चंद्रास्वामी को समझाया कि किसी महिला को उसके पहनावे के लिए कुछ कहना अभद्रता है. थैचर हिंदी में हो रही बातचीत नहीं समझ पा रही थीं लेकिन दोनों के चेहरे देख ज़रूर रही थीं. ना चाहते हुए भी नटवर सिंह ने फर्श की तरफ ताकते हुए अनुवाद कर डाला. अगले मंगलवार दोपहर ठीक ढाई बजे ब्रिटेन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी की नेता और भविष्य में इंग्लैंड की आयरन लेडी बननेवाली मार्गरेट थैचर नटवर सिंह के घर के दरवाज़े पर खड़ी थीं. वो ना लाल पोशाक पहनना भूली थीं और ना ताबीज़ बांधना.  गदगद चंद्रास्वामी ने उस दिन थैचर के ना जाने कितने सवालों के जवाब खुशी खुशी दिए. फिर थैचर ने असली सवाल पूछा कि वो कभी प्रधानमंत्री बन सकेंगी या नहींचंद्रास्वामी ने उन्हें निराश नहीं किया. कहाआप पीएम बन जाएंगी और नौ, ग्यारह या तेरह साल तक पद पर रहेंगी.

थैचर को अपने पीएम बनने पर तो यकीन था लेकिन उन्हें कार्यकाल की अवधि ज़्यादा लगी. खैर, उन्होंने आखिरी सवाल पूछा. वो जानना चाहती थीं कि वो पीएम बनेंगी कब तक. तांत्रिक चंद्रास्वामी के पास इस सवाल का भी जवाब था, उन्होंने कहाअगले साढ़े तीन साल में. ठीक साढ़े तीन साल बाद थैचर अपने देश की प्रधानमंत्री बनीं और वो भी ग्यारह साल के लिए.

और पीएम बनने के बाद नटवर ने दिलाई चंद्रास्वामी की याद

खैर, इस मुलाकात के बाद जब थैचर 1979 में पीएम बनकर कॉमनवेल्थ समिट में भाग लेने ज़ांबिया के लुसाका पहुंचीं तो नटवर सिंह भी वहीं थे. जब थैचर ने नटवर सिंह और उनकी पत्नी से मुलाकात की तो नटवर धीरे से फुसफुसाए  “Our man proved right.”

थैचर पल भर के लिए घबराई हुई दिखीं. नटवर सिंह को तुरंत अलग ले जाकर बोलीं, हाई कमिश्नर महोदय, हम इस बारे में बात नहीं करेंगे. नटवर सिंह ने भी अदब से जवाब दियाकतई नहीं करेंगे प्राइम मिनिस्टर साहिबा, कतई नहीं.

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