Budget 2019: जानिए बजट से जुड़ी ये दिलचस्प बातें

2016 तक केंद्रीय बजट को लोकसभा में फरवरी के अंतिम कार्यदिवस पर पेश किया जाता था. 2017 से अरुण जेटली ने इसे बदलकर 1 फरवरी किया.

नई दिल्ली: NDA के नेतृत्व वाली सरकार 5 जुलाई को अपना पहला बजट पेश करेगी. यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. हमें बजट से ही पता चलता है कि सरकार कहां-कहां से राजस्व जुटाएगी और कहां-कितना खर्च करेगी. जानिए बजट से जुड़ी कुछ खास बातें जो आपको शायद ही मालूम होंगी…

  • भारत में बजट पेश करने की परंपरा इस्ट-इंडिया कंपनी ने शुरू की. कंपनी ने 7 अप्रैल 1860 को बजट पेश किया था. 
  • आजादी से पहले अंग्रेजों के शासनकाल में पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने 1860 में पेश किया था.
  • आजाद भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को तत्कालीन वित्त मंत्री आरके शानमुखम चेट्टी ने पेश किया था.
  • मोरारजी देसाई ने सर्वाधिक 10 बार देश का बजट पेश किया. दूसरे नंबर पर पी. चिदंबरम हैं, जिन्हें 8 बार यह अवसर मिला. प्रणब मुखर्जी, यशवंत सिन्हा, वाईबी चव्हाण और सीडी देशमुख ने 7-7 बार संसद में देश का बजट पेश किया.
  • पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यशवंत सिन्हा और अरुण जेटली ने लगातार 5 बार बजट पेश किया.
  • 1955 तक यूनियन बजट केवल इंग्लिश में पेश किया गया. 1955-56 से बजट डॉक्युमेंट्स का हिंदी में भी प्रकाशन होने लगा.
  • फाइनैंशल इयर 1973-74 के लिए पेश किए गए आम बजट को ब्लैक बजट कहा जाता है. इस साल बजट 550 करोड़ रुपये था, जो उस वक्त के लिहाज से बहुत अधिक था. इस बजट को यशवंतराव बी चव्हाण ने पेश किया था.
  • आर्थिक संकट के दौरान 1991 में मनमोहन सिंह द्वारा पेश किए गए बजट को एपकल बजट (परिवर्तनकारी बजट) कहा जाता है. इस बजट में आयात-निर्यात नीति में बड़ा बदलाव किया गया था और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बनाने के लिए कदम उठाए गए थे.
  • वी.पी.सिंह के सरकार से इस्तीफा देने के बाद 1987 में राजीव गांधी ने बजट पेश किया था. उन्होंने बजट में कॉर्पोरेट टैक्स को परिचित कराया.
  • 1991 में एनडीए सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने अंतरिम बजट पेश किया. इसी साल कांग्रेस फिर से सत्ता में आई और मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया. 1991 में उन्होंने सर्विस टैक्स और विदेशी निवेश प्रस्ताव का कॉन्सेपट पेश किया.
  • 2016 तक केंद्रीय बजट को लोकसभा में फरवरी के अंतिम कार्यदिवस पर पेश किया जाता था. 2017 से अरुण जेटली ने इसे बदलकर 1 फरवरी किया.
  • साल 2000 तक केंद्रीय बजट की घोषणा 5 बजे शाम में की जाती थी लेकिन यशवंत सिन्हा ने 2001 में 11 बजे दिन में बजट की घोषणा कर नई परंपरा शुरू की.
  • आई.के.गुजराल के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान संवैधानिक संकट उत्पन्न हो जाने के बाद 1996 में पी.चिदंबरम ने बगैर बहस के बजट पेश किया. एक साल बाद फिर उन्होंने ‘ड्रीम बजट’ का प्रस्ताव रखा.
  • 2017 में रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया. इससे पहले 92 सालों तक दोनों बजट अलग-अलग पेश किए गए.
  • निर्मला सीतारमण यूनियन बजट पेश करने वाली पहली महिला वित्त मंत्री बनेंगी. उनसे पहले इंदिरा गांधी ने 1970-71में बजट पेश किया था. उस समय वह देश की प्रधानमंत्री थी और वित्त मंत्रालय क प्रभार भी संभाला था.
  • शुरू में बजट पेपर्स राष्ट्रपति भवन में छपे थे. बाद में प्रिंटिंग स्थल को नई दिल्ली, मिंटो रोड स्थानांतरित किया गया.1980 से बजट पेपर्स नॉर्थ ब्लॉक में छपते हैं. बजट पेश करने से एक हफ्ता पहले वित्त मंत्रालय के पब्लिशर्स को प्रेस एवं अन्य स्रोतों से अलग रखा जाता है.

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