मोदी 2.0 का पहला बजट, इन सेक्‍टर्स को तोहफे दे सकती हैं निर्मला सीतारमण

आम चुनाव से पहले, 1 फरवरी को प्रस्‍तुत अंतरिम बजट से उलट इस बार का बजट लोकलुभावन के बजाय व्यावहारिक रहने की उम्‍मीद है.

Budget 2019: वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करेंगी. पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा सत्‍ता में वापसी करने वाली सरकार के सामने अर्थव्‍यवस्‍था की धीमी रफ्तार और बेरोजगारी के रूप में दो बड़ी चुनौतियां हैं. अपने पहले बजट में सीतारमण का फोकस निर्माण, सेवा और सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्योगों (MSMEs) पर रहने की उम्‍मीद है. ऐसा इसलिए ताकि निवेश को बढ़ावा मिले और नौकरियां पैदा हों.

निर्माण क्षेत्र पर फोकस इसलिए भी रहेगा क्‍योंकि इससे सीधे-सीधे 269 इंडस्‍ट्रीज प्रभावित होती हैं. देश में कृषि के बाद सबसे ज्‍यादा रोजगार इसी क्षेत्र से मिलता है. बजट में जल स्‍त्रोतों के प्रबंधन पर भी ध्‍यान दिया जा सकता है. देश के कई हिस्‍सों में सूखे के हालातों के मद्देनजर Budget 2019 में इसपर सरकार का फोकस रह सकता है.

सरकार के पास अंधाधुंध खर्च करने को पैसा नहीं है, ऐसे में पाई-पाई को संभालकर खर्च करना होगा. सरकार सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में कटौती कर नहीं सकती, राजकोषीय घाटे को GDP के 3.4% तक रखने का लक्ष्‍य है. ऐसे में MSMEs को बूस्‍ट दिया जा सकता है ताकि नौकरियां सृजित हों और अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार भी बढ़े.

कम नहीं हैं चुनौतियां

सीतारमण को एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को एक बड़ी मंदी से बचाना है. मई में भारत दुनिया की सबसे तेजी के साथ वृद्धि करने वाली अर्थव्यवस्था का तमगा खो बैठा है. भारत की GDP वित्त वर्ष 2019 की अंतिम तिमाही में फिसल कर 5.8 प्रतिशत हो गई, जो इसके पहले की तिमाही की 6.6 प्रतिशत से कम है. और साथ ही चीन की 6.4 प्रतिशत वृद्धि दर से भी कम है. बेरोजगारी दर सर्वोच्च 6.1 प्रतिशत पर है. सीतारमण को एक मंद होती अर्थव्यवस्था और बाजार की कठिन स्थिति में सरकार के बटुए को भरने की कोशिश करनी होगी.

सरकार विनिवेश के जरिए 90,000 करोड़ रुपये जुटाने की कोशिश में है, जो पिछले साल के विनिवेश से प्राप्त 85,000 करोड़ रुपये से अधिक है. पिछले साल की अधिकांश आमदनी हालांकि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) एक्चेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) से, पीएसयू के शेयरों से आई थी, जबकि सरकार चाहती थी कि वह अपने स्वामित्व वाली कंपनियों में हिस्सेदारी बेच कर आमदनी जुटाए.

आम चुनाव से पहले, 1 फरवरी को प्रस्‍तुत अंतरिम बजट में कई लुभावने वादे किए गए थे. इनमें वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए टैक्‍स में राहत, छोटे किसानों के लिए 75 हजार रुपये की निश्चित आय, असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के लिए पेंशन योजना शामिल है. Budget 2019 के लोकलुभावन के बजाय व्यावहारिक रहने की उम्‍मीद है.

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