साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की उम्‍मीदवारी पर रोक से NIA कोर्ट का इनकार, कहा- कानूनी शक्ति नहीं

चुनावी हलफनामे के अनुसार, प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर कथित तौर पर हत्या, हत्या की कोशिश और आतंकवादी कार्य के आरोप हैं.
Sadhvi Pragya Singh Thakur, साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की उम्‍मीदवारी पर रोक से NIA कोर्ट का इनकार, कहा- कानूनी शक्ति नहीं

नई दिल्‍ली: भोपाल से बीजेपी उम्‍मीदवार साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत से राहत मिली है. अदालत ने उनकी उम्‍मीदवारी पर प्रतिबंध लगाने की मांग करती अपील खारिज कर दी है. आवेदनकर्ता के वकील ने कहा कि ‘वह खराब सेहत का हवाला देकर अदालत नहीं आ रहीं, मगर चुनावों के लिए प्रचार कर रही हैं जिसमें वह बीमार नहीं लग रहीं.” NIA कोर्ट ने कहा कि “इस अदालत के पास वर्तमान चुनाव में किसी को उम्‍मीदवारी से प्रतिबंधित करने की कानूनी शक्ति नहीं है. यह फैसला करना चुनाव अधिकारियों का काम है. यह अदालत आरोपी नंबर 1 (साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर) को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकती. इसलिए यह आवेदन अस्‍वीकृत किया जाता है.”

विशेष अदालत ने यह भी कहा कि ‘वर्तमान स्थिति में एनआईए ये नहीं कह सकता कि ठाकुर के खिलाफ प्रथमदृष्‍टया कोई मामला नहीं है क्‍योंकि एनआईए ने आदेश (आरोपी को रिहा करने) को हाई कोर्ट में चुनौती नहीं दी है. साध्‍वी ने इस याचिका को राजनैतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया था. उन्‍होंने कहा था कि “यह केवल पब्लिसिटी स्‍टंट के लिए किया गया काम है. याचिकाकर्ता को अदालत का समय बर्बाद किया है. उसपर जुर्माना लगाकर याचिका खारिज की जानी चाहिए.”

प्रज्ञा सिंह ठाकुर 2008 के मालेगांव धमाका मामले में आरोपी हैं, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी. वह इस समय जमानत पर हैं. वह भोपाल संसदीय क्षेत्र से मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं.

भोपाल सीट से प्रज्ञा सिंह ठाकुर के अलावा डमी उम्मीदवार के रूप में सांसद आलोक संजर ने भी मंगलवार को नामांकन किया. संजर ने बताया कि उन्होंने पार्टी के निर्देश पर ऐसा किया है. पिछले दिनों प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बयानों और उस पर चुनाव आयोग द्वारा जारी नोटिस के बाद से भाजपा सतर्क है. प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ बयानबाजी को लेकर एक मामले में प्राथमिकी भी दर्ज हो चुकी है.

प्रज्ञा ने अपने चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ विशेष एनआईए अदालत में दर्ज तीन आपराधिक मामलों का जिक्र किया है. उन्‍होंने कुल 4,44,224 रुपये की संपत्ति की घोषणा की है. इसमें से 90,000 रुपये नकद और भोपाल स्थित बैंक के दो खातों में जमा 99,824 रुपये शामिल हैं. हलफनामे के अनुसार, प्रज्ञा का किसी कंपनी में कोई शेयर नहीं है और न ही उनकी अपनी कार या जमीन है.

जेवरातों की बात करें तो प्रज्ञा के पास 48,000 रुपये की सोने की एक चेन और उतने ही रुपये का सोने का एक लॉकेट है. इसके अलावा उनके पास, 16,000 रुपये की सोने की एक अंगूठी और 81,000 रुपये का चांदी का एक कमंडल के साथ-साथ चांदी की एक थाली और चार ग्लास भी हैं. बीजेपी प्रत्‍याशी ने अपने हलफनामे में जिक्र किया है कि उनकी आय का स्रोत भिक्षा है.

Related Posts