CBI ने सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह के घर और पति आनंद के NGO पर मारा छापा

सीबीआई की एफआईआर में इंदिरा जयसिंह का नाम सीधे तौर पर आरोपियों में दर्ज नहीं है, लेकिन मामले की छानबीन के दौरान वो जांच के दायरे में आ गयी थीं.

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और मुंबई स्थित आवासों पर छापेमारी की. ये छापेमारी एफसीआरए नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में की गई. सीबीआई ने यहां से केस से जुड़े कई अहम दस्तावेज और एनजीओ के पुराने रिकॉर्ड बरामद करने का दावा किया है, जिनकी छानबीन की जाएगी.

सीबीआई ने ये सर्च उनकी दिल्ली स्थित एनजीओ लॉयर्स कलेक्टिव को मिले विदेशी अनुदान में फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट, 2010(FCRA) के उल्लंघन को लेकर की गई हैं. सीबीआई की 2 टीमें गुरुवार सुबह दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में लॉयर्स कलेक्टिव के दो आफिस पर पहुंची. मकसद था इस मामले से जुड़े दस्तावेजों की छानबीन करना.

दरअसल, सीबीआई ने FCRA के तहत मामला दर्ज किया था, आरोप था कि आनंद ग्रोवर की एनजीओ लायर्स कलेक्टिव को साल 2008 से लेकर 2014 तक करोड़ों रूपये का विदेशी अनुदान मिला, जिसका इस्तेमाल व्यक्तिगत रूप से हिंदुस्तान और उसके बाहर अन्य देशों में किया गया. इसमें करीब 92 लाख रुपये इंदिरा जयसिंह के एकाउंट में भी ट्रांसफर किये गए, जिस वक्त वो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल(साल 2009 से 2014) के पद पर थी.

जांच के दौरान सीबीआई ने यह भी पाया था कि आनंद ग्रोवर ने FCRA के सेक्शन 11 का भी उल्लंघन किया है, उन्होंने बिना केंद्र सरकार की इजाजत के इस विदेशी योगदान की राशि का इस्तेमाल एक केस में हवाई यात्रा के लिए किया था. साथ ही इंदिरा जयसिंह का भी हवाई टिकट इसी राशि से बुक हुआ था जबकि उनका इस केस से कोई लेना देना नही था.

इस विदेशी योगदान की राशि को आनंद ग्रोवर ने न सिर्फ देश में आने फायदे के लिए इस्तेमाल किया बल्कि इसे FEMA का उल्लंघन करते हुए विदेशो में भी खर्च किया. जिसके बाद सीबीआई ने ED यानि परवर्तन निदेशालय से भी इस मामले में जांच करने का अनुरोध किया था.

आरोप है कि इस विदेशी योगदान की राशि से इंदिरा जयसिंह ने भी नेपाल और अमेरिका की यात्रा की थी. हालांकि सीबीआई की एफआईआर में इंदिरा जयसिंह का नाम सीधे तौर पर आरोपियों में दर्ज नहीं है, लेकिन मामले की छानबीन के दौरान वो जांच के दायरे में आ गयी थीं.

और भी कई हैं नाजमद

सीबीआई के अनुसार, दर्ज मामले में एनजीओ के अज्ञात पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं, निजी व्यक्तियों और सरकारी कर्मचारियों को भी नामजद किया गया है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, एनजीओ को सामाजिक कार्यों के संचालन के पंजीकृत कराया गया था और इसे 2006-07 से 2014-15 तक 32.39 करोड़ रुपये मिले.

शिकायत में कहा गया है कि एफसीआरए के उल्लंघन का खुलासा 2010 में हुआ. जब इंदिरा जयसिंह 2009 और 2014 के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल थीं, उस दौरान सीबीआई ने उनपर ये आरोप लगाए थे. एजेंसी के अनुसार, उस समय उसकी विदेश यात्राओं का खर्च गृह मंत्रालय की मंजूरी के बिना एनजीओ से था.

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