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दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए PMO की मॉनिटरिंग में काम करेंगे केंद्र और राज्य

केंद्र से लेकर राज्यों के बीच इस पूरे अभियान की मॉनीटरिंग PMO से हो रही है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की क्वालिटी सुधारने के लिए तैयार हुए एक्शन प्लान को केंद्र और राज्य मिलकर एक साथ धरातल पर उतारने में जुटे हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 11:15 pm, Wed, 30 September 20
दिल्ली में प्रदूषण
दिल्ली में प्रदूषण

दिल्ली-NCR को हर साल सर्दियों में दम घोंटने वाले प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए इस बार पांच प्रमुख फॉर्मूले पर काम शुरू हुआ है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के साथ केंद्र सरकार के प्रमुख मंत्रालय समन्वय बनाकर काम करने में जुटे हैं. केंद्र सरकार की बात करें तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण के साथ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, कृषि, सड़क और पेट्रोलियम मंत्रालय दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने की दिशा में काम कर रहा है.

खास बात है कि केंद्र से लेकर राज्यों के बीच इस पूरे अभियान की मॉनीटरिंग PMO से हो रही है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की क्वालिटी सुधारने के लिए तैयार हुए एक्शन प्लान को केंद्र और राज्य मिलकर एक साथ धरातल पर उतारने में जुटे हैं. बीते दिनों प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा इसको लेकर गठित टास्क फोर्स की बैठक भी कर चुके हैं. जिसमें चारों राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ केंद्रीय मंत्रालयों के अफसरों ने भी हिस्सा लिया था.

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इस दौरान कई निर्देश भी राज्यों को जारी हुए थे. इस पूरे अभियान से जुड़े एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, “प्रदूषण रोकने के लिए यूं तो हर वर्ष कार्ययोजनाएं बनती हैं, मगर इस बार इसे सख्ती से लागू करने की कोशिशें चल रही हैं. PMO लगातार पूरे अभियान की मॉनीटरिंग कर रहा है.”

फसल अवशेष प्रबंधन

दिल्ली-NCR में प्रदूषण कम करने के लिए हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में फसल अवशेष प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है. प्रदूषण रोकने के लिए तैयार हुए एक्शन प्लान में फसल अवशेष प्रबंधन को प्रमुखता दी गई है. फसलों के अवशेष यानी पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती बरतने का निर्देश जारी है.

फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए जमीनी स्तर पर मशीनों की तैनाती और उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी टास्क फोर्स ने जोर दिया है. कृषि मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ी मशीनों को किसानों तक समय से पहुंचाया जाए.

ईंधन संयंत्रों की स्थापना

फसलों के अवशेष पर आधारित बिजली, ईंधन संयंत्रों की स्थापना पर भी जोर देने की बात चल रही है. दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से इस तरह के संयंत्रों को प्राथमिकता वाले लोन क्षेत्र में शामिल किया गया है. ऐसे संयंत्रों की तेजी से तैनाती के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की ओर से संयुक्त रूप से एक कार्य योजना तैयार करने की कोशिश चल रही है.

पैटर्न बदलकर खेती

फसल के विविधीकरण यानी फसलों का पैटर्न बदलकर खेती करने से भी प्रदूषण की समस्या रोकी जा सकती है. फसल विविधीकरण से किसान ज्यादा फसलें पैदा कर सकते हैं. इससे खेतों में पराली जलाने के बजाए उसी में वह बुआई कर सकते हैं. दरअसल, खेत में पराली जलाने से जमीन की उर्वरता पर असर पड़ता है.

पर्याप्त संख्या में तैनात होंगे अफसर

हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने से रोकने के लिए जमीनी निगरानी तेज करने के लिए टीमें तैनात होंगी. PMO की ओर से गठित टास्क फोर्स ने विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में उन स्थानों पर अफसरों की तैनाती करने को कहा है, जहां हर साल पराली जलाने की सर्वाधिक घटनाएं होती हैं.

दिल्ली में न जले खुले में कचरा

दिल्ली में हर साल कई स्थानों पर खुले में कचरा जलाने की भी घटनाएं होती हैं. इस बार ऐसी घटनाएं रोकने के लिए खास प्लान तैयार हुआ है. खुले में कचरे को जलाने से रोकने के लिए टीमों की तैनाती करने पर जोर दिया गया है. हॉट स्पॉट चिन्हित कर काम करने की तैयारी है. NCR में औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग द्वारा उत्सर्जन मानदंडों के अनुपालन पर भी जोर दिया जाएगा.

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