कई राज्य-केंद्रशासित प्रदेशों ने नहीं भेजा किसानों की आत्महत्या का ब्योरा, सदन में केंद्र की सफाई

केंद्र सरकार के पास किसानों की आत्महत्या (Suicide) का कोई रिकॉर्ड नहीं है. क्योंकि कई राज्य और केंद्रशासित प्रदेश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को आंकड़े नहीं देते हैं. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी (G. Kishan Reddy) ने राज्यसभा में लिखित जवाब में ये जानकारी दी.

केंद्र सरकार के पास किसानों की आत्महत्या (Suicide) का कोई आंकड़ा नहीं है. सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि सरकार के पास किसानों की आत्महत्या का कोई रिकॉर्ड नहीं है. क्योंकि कई राज्य और केंद्रशासित प्रदेश राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) को आंकड़े नहीं देते हैं. एनसीआरबी आत्महत्या सहित अन्य अपराधों के आंकड़ों को एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने के लिए जिम्मेदार है.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी (G. Kishan Reddy) ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरों के आंकड़ों का ब्योरा देते हुए कहा,” कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने किसानों, उत्पादकों और खेतिहारी मजदूरों द्वारा आत्महत्या का शून्य आंकड़ा होने की पुष्टि की थी, जबकि अन्य पेशों में कार्यरत लोगों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की सूचना मिली है. इस कमी के कारण, कृषि क्षेत्र में आत्महत्या के कारणों के बारे में कोई राष्ट्रीय आंकड़ा पुष्टि नहीं है और इसे अलग से प्रकाशित नहीं किया गया.”

देश में 7.4 प्रतिशत किसान करते हैं आत्महत्या

एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में कुल आत्महत्याओं में किसानों की आत्महत्या की दर 7.4 प्रतिशत है. रिपोर्ट में बताया गया कि 5,957 किसान और 4324 खेतिहर मजदूर हैं.

प्रवासी मजदूरों की मौत का डेटा नहीं

पिछले  हफ्ते श्रम मंत्रालय ने कहा कि कोरोनावायरस (Coronavirus) लॉकडाउन के दौरान घर पहुंचने की कोशिश करने के दौरान जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) की मौत का कोई डेटा नहीं है. जिसके बाद सरकार की काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. मंत्रालय ने कहा कि मजदूरों के परिवारों को मुआवजा देना का कोई सवाल नहीं उठता. क्योंकि कोई डेटा नहीं था.

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