दिवाला कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी, Corona काल में डिफॉल्टर्स को मिली राहत

कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है. ऐसे में 25 मार्च के बाद से कर्ज भुगतान में डिफॉल्ट की स्थिति में एक निश्चित समय तक दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं होगी.

  • Piyush Pandey
  • Publish Date - 9:46 pm, Fri, 5 June 20

केंद्र सरकार (Central Government) ने दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) में संशोधन के लिए अध्यादेश जारी किया है. इसके तहत कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौरान कर्ज भुगतान में असफलता के नए मामलों में दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं होगी.

कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है. ऐसे में 25 मार्च के बाद से कर्ज भुगतान में डिफॉल्ट की स्थिति में एक निश्चित समय तक दिवाला कार्रवाई शुरू नहीं होगी.

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अध्यादेश के मुताबिक, 25 मार्च 2020 या उसके बाद डिफॉल्ट के किसी मामले में छह महीने या उससे आगे (एक साल से अधिक नहीं) दिवाला कार्रवाई नहीं की जा सकेगी.

IBC के तहत कोई भी इकाई किसी कंपनी द्वारा कर्ज भुगतान में एक दिन की चूक होने पर भी दिवाला कार्रवाई के लिए आवेदन कर सकती है. इसके लिए न्यूनतम सीमा एक करोड़ रुपये है. पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी.

सांसदों के निजी सहायकों को संसद में प्रवेश नहीं

दूसरी तरफ, लोकसभा सचिवालय ने आगामी मॉनसून सत्र के दौरान सांसदों के निजी सचिवों के संसद में प्रवेश पर शुक्रवार को प्रतिबंध लगा दिया.

लोकसभा सचिवालय ने एक बयान में कहा, “कोविड-19 के कारण महामारी की स्थिति को देखते हुए सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सदस्यों के निजी सचिवों का प्रवेश प्रतिबंधित करने की जरूरत है.”

यह कदम इसलिए उठाया गया है, क्योंकि लगता है कि 800 से अधिक निजी सचिवों की उपस्थिति से स्थिति बिगड़ सकती है.

बयान में कहा गया है, “सोशल डिस्टैसिंग के नियमों के अनुपालन में सदस्यों के निजी सचिवों की संसद भवन के अंदर प्रवेश अगले आदेश तक प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया है.”

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