देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू, सरकार ने जारी किया गजट नोटिफिकेशन

केंद्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन (राजपत्र में प्रकाशन) के जरिए इस कानून के लागू होने की अधिसूचना जारी की.

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  • Publish Date - 1:35 am, Sat, 11 January 20

नागरिकता संसोधन कानून (CAA)  10 जनवरी (शुक्रवार) से लागू हो गया है. केंद्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन (राजपत्र में प्रकाशन) के जरिए इस कानून के लागू होने की अधिसूचना जारी की.

इसमें गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि ‘केंद्र सरकार जनवरी, 2020 के 10 वें दिन को उस तारीख के तौर पर सूचित करती है, जिस दिन नागरिकता संशोधन अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे.’

नए नागरिकता कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी के रूप में नहीं देखा जाएगा.

इन तीन पड़ोसी इस्लामिक देशों में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए गए इन अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी.

यहां लागू नहीं होगा CAA

बिल के संशोधित रूप में कहा गया है कि इनर लाइन परमिट और छठी अनुसूची प्रावधानों द्वारा संरक्षित उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में यह संशोधित बिल लागू नहीं होंगा. इसमें पूरा अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, अधिकांश नागालैंड, मेघालय और त्रिपुरा और असम के कुछ हिस्से शामिल हैं.

CAA को लेकर झूठ और सच क्‍या है, पढ़‍िए.

झूठ नंबर 1

इस कानून से जुड़ा एक डर ये फैलाया जा रहा है कि भारत के मुसलमानों को दस्‍तावेज दिखाने होंगे. उन्‍हें नागरिकता साबित करनी होगी. अगर नागरिकता का सबूत नहीं है तो उन्‍हें देश छोड़कर जाना पड़ेगा. कई इलाकों में मुस्लिमों के बीच डर का ऐसा माहौल बन रहा है जिसमें उनसे राशन कार्ड, आधार, वोटर आइडी वगैरह इकट्ठा करने को कहा जा रहा है.

सच क्‍या है?

ऐसा कुछ नहीं होने वाला. भारत के मुसलमानों को इससे किसी तरह का डर नहीं है. CAA भारत के मुसलमानों पर लागू नहीं होता, सिर्फ शरणार्थियों पर लागू होगा. उसमें भी सिर्फ तीन पड़ोसी देशों से आए धार्मिक अल्‍पसंख्‍यकों को ही नागरिकता मिलेगी.

झूठ नंबर 2

यह कानून लागू होने के बाद मुसलमान भारत के नागरिक नहीं बन पाएंगे. भारत अब पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश के हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को ही नागरिकता देगा. मुसलमानों को भारत में जगह नहीं मिलेगी.

सच क्‍या है?

पूरी तरह झूठ है. यह कानून इन तीन देशों के उन अल्‍पसंख्‍यकों के लिए है जिन्‍हें धर्म के आधार पर प्रताड़‍ित किया गया और वे भागकर भारत आ गए. ऐसे लोगों के पास वैध दस्‍तावेज नहीं हैं जिसकी वजह से उन्‍हें नागरिकों को मिलने वाली योजनाओं के फायदे नहीं मिलते. CAA में उन्‍हें नागरिकता की व्‍यवस्‍था है. बाहर से आने वाला कोई भी मुसलमान सामान्‍य प्रक्रिया के तहत नागरिकता के लिए अप्‍लाई कर सकता है चाहे वह किसी भी देश का हो. ठीक वैसे ही जैसे, गायक अदनान सामी ने भारतीय नागरिकता ले रखी है.

झूठ नंबर 3

CAA में हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म का जिक्र है. इन्‍हें भारत में घुसते ही नागरिकता मिल जाएगी. ऐसा मुसलमानों के साथ नहीं होगा.

सच क्‍या है?

CAA में अपने आप नागरिकता मिलने का प्रावधान नहीं है. कटऑफ डेट 31 दिसंबर, 2014 रखी गई है. यानी भारत में इस तारीख से पहले आए शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी. शरणार्थियों को भारत में पांच साल रहने के बाद नागरिकता के लिए अप्‍लाई करना पड़ेगा.

झूठ नंबर 4

एक बड़ा सवाल ये पूछा जा रहा है कि अगर यह कानून धार्मिक प्रताड़ना के खिलाफ है तो इसमें शिया, अहमदिया, बलोच और रोहिंग्‍या क्‍यों नहीं हैं. यह तर्क देकर कहा जा रहा है कि बिल में सिर्फ मुस्लिमों को टारगेट किया गया है.

सच क्‍या है?

ये सभी इस्‍लाम के अलग-अलग पंथ हैं. अलग धर्म के रूप में इनकी मान्‍यता नहीं है. चूंकि वे मुस्लिम हैं तो पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लोदश में अल्‍पसंख्‍यक नहीं हैं. बलोच और रोहिंग्‍या तो धार्मिक समूह भी नहीं हैं. हालांकि अगर इनमें से भी कोई प्र‍ताड़‍ित हो रहा है तो वह भारत में शरण मांग सकता है. पहले भी तिब्‍बत, युगांडा, श्रीलंका और अफगानिस्‍तान से आए लोगों को शरण दी गई है.

शरणार्थियों को क्या फायदे होंगे?

1. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 2(1)(बी) में पासपोर्ट, वीजा और ट्रैवल डॉक्युमेंट्स के बगैर जो प्रवासी भारत में आते हैं या जिनका पासपोर्ट और वीजा एक्सपायर हो जाता है, उन्हें अवैध प्रवासी कहा जाता है. अब नए कानून के तहत ऐसे प्रवासियों को अवैध नहीं कहा जाएगा.

2. इसमें नई धारा धारा 6(बी)(बी) लाने का प्रस्ताव है जिसके तहत धार्मिक उत्पीड़न के शिकार उपरोक्त प्रवासी निर्धारित की गई शर्तों और प्रतिबंधों के तौर-तरीकों को अपनाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं और भारत की नागरिकता हासिल की जा सकती है.

3. नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 5 या तीसरे शेड्यूल की शर्तों को पूरा करते हुए भारत की नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं तो वो जिस तिथि से भारत आए हैं, उन्हें उसी तिथि से भारत की नागरिकता मिल जाएगी.

4. ऐसे अल्पसंख्यक प्रवासी के खिलाफ अवैध प्रवास/घुसपैठ या नागरिकता के संबंध में अगर कोई मुकदमा चल रहा है तो इस बिल के प्रावधान से सारे केस खत्म कर दिए जाएंगे. उन्हें यहां की स्थानीय कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा.

5. आवेदक अगर किसी भी प्रकार का अधिकार या सुविधा ले रहा है तो बिल के प्रावधान के तहत उसे अधिकार या सुविधा से वंचित नहीं होगा. मसलन, अगर किसी प्रवासी ने अगर कहीं रहते हुए छोटी-मोटी दुकानें कर ली हैं तो संभव है कि वो स्थानीय कानून की नजर में गलत हों, लेकिन इस बिल के प्रावधान के तहत इसे रेग्युलराइज कर दिया जाएगा.

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