IIM में 96 फीसदी प्रोफेसर अगड़ी जाति के, अब लागू करना होगा जातिगत आरक्षण!

IIT और IIM जैसे संस्थान आरक्षण को पूरी तरह से लागू नहीं कर रहे हैं, IIT में एंट्री लेवल पर आरक्षण का प्रावधान है.
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केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) में भर्ती के लिए जाति आधारित आरक्षण के विवादास्पद मुद्दे पर ध्यान देने का फैसला किया है.

पिछले सप्ताह मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले IIT और IIM जैसे तकनीकी संस्थानों को वरिष्ठ संकाय पदों के साथ-साथ प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर आरक्षण के प्रावधानों को पूरी तरह लागू करने को कहा.

संविधान में आरक्षण का ये प्रावधान

संविधान के मुताबिक, सभी सरकारी संस्थानों में अनुसूचित जाति (scheduled castes) के लिए 15 फीसदी, अनुसूचित जनजाति ( scheduled tribes) के लोगों के लिए 7.5 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (other backward castes) के लोगों के लिए 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है.

ये पद जाति आधारित आरक्षण से मुक्त

IIT और IIM जैसे संस्थान आरक्षण को पूरी तरह से लागू नहीं कर रहे हैं, IIT में एंट्री लेवल पर आरक्षण का प्रावधान है जबकि IIM में फैकल्टी के 96 फीसदी से ज्यादा लोग अगड़ी जाती से ताल्लुक रखते हैं.

इसके पीछे 1975 से पहले आए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के आदेश के को आधार बनाया गया है जिसके अनुसार सभी वैज्ञानिक और तकनीकी पद जाति-आधारित आरक्षण से मुक्त हैं और वह अपनी पसंद के उम्मीदवार का चयन कर सकते हैं.

संसद में पेश किए गए ये आंकड़ें

नए निर्देश के अनुसार संस्थानों को अब वरिष्ठ संकाय पदों के साथ-साथ प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसर पदों पर आरक्षण सुनिश्चित करना होगा. यही नियम इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) पर लागू होगा, केंद्र सरकार के संस्थान पूरी तरह से अनुसंधान के लिए समर्पित हैं.

आईआईटी और आईआईएम में जातिगत रूप से विविधता की भारी कमी नजर आती है. दिसंबर 2018 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, एससी, एसटी और ओबीसी कुल फैकल्टी आईआईटी में केवल 9 प्रतिशत और आईआईएम में 6 प्रतिशत हैं.

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