चमकी बुखार से 36 बच्चों की गई जान, आज बिहार पहुंचेगी केंद्रीय टीम

केंद्र सरकार ने इस बीमारी की गंभीरता से लेते हुए एक उच्च-स्तरीय टीम का गठन किया है जो आज बिहार का दौरा करेगी.

पटना: बिहार में चमकी बुख़ार का तांडव जारी है. पिछले 24 घंटे में 12 बच्चों की जान जा चुकी है. वहीं पिछले 11 दिनों में इस बीमारी से 36 बच्चों की जान जा चुकी है.

हालांकि निदेशक का कहना है कि इन सभी बच्चों की जान इंसेफेलाइटिस से नहीं ब्लकि हाइपोग्लाइसीमिया व सोडियम पोटाशियम की कमी से हुई है. तेज धूप के साथ आर्द्रता (नमी) इसका बहुत बड़ा कारण है.

निदेशक प्रमुख ने निरीक्षण के बाद बताया कि जनवरी से दस जून तक 109 बच्चे चमकी-तेज बुखार से पीड़ित पाए गए हैं.

केंद्र सरकार ने इस बीमारी की गंभीरता से लेते हुए एक उच्च-स्तरीय टीम का गठन किया है जो आज बिहार का दौरा करेगी. वो मुजफ्फरपुर और गया का दौरा करेगी.

सोमवार को 40 पीड़ित बच्चों को मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच और केजरीवाल अस्पताल में भर्ती किया गया. इनका इंसेफ्लाइटिस के तय प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया जा रहा है. दोनों अस्पतालों में भर्ती 19 बच्चों की मौत हो गई है. इनमें 18 एसकेएमसीएच और एक केजरीवाल में भर्ती थे.

इन बच्चों की मौत के साथ पिछले 10 दिनों में बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 36 के क़रीब हो गई है. उधर वैशाली जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के दो गांव में एक ही दिन में 5 बच्चों की मौत हो गई. मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने पर एसकेएमसीएच में चौथी पीआईसीयू भी खोल दी गई है.

मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में मस्तिष्क ज्वर से हो रही बच्चों की मौत पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह बरसात के पूर्व होता है और गोरखपुर से आता है. पिछले वर्ष या कंट्रोल में था पर इस बार फिर बढ़ गया है जो चिंताजनक है. ऐसी घटनाएं ना हो इसको लेकर राज्य सरकार सारे इंतजाम कर रही है उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि लोगों को इस संबंध में जागरूक करें बच्चों को भूखा नहीं सोने दे.

हर साल गर्मी और लीची के मौसम में मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में इंसेफेलाइटिस जैसी किसी बीमारी से बच्चों की रहस्यमय मौत होती है. अब तक इस बीमारी से 35 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने कल मुख्यमंत्री को यह जानकारी दी कि अब तक इस बीमारी से 11 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई है.