करीब 900 करोड़ की लागत वाले New Parliament Building Project को विस्टा कमेटी से मिली मंजूरी

एक्सपर्ट्स और कार्यकर्ता न्यू पार्लियामेंट बिल्डिंग प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. लॉकडाउन (Lockdown) के समय पोजेक्ट को मंजूरी मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई है.

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केंद्रीय विस्टा कमेटी (Central Vista Committee) ने नई पार्लियामेंट बिल्डिंग प्रोजेक्ट (New Parliament Building Project) को मंजूरी दे दी है. इस तरह से ब्रिटिश कालीन पार्लियामेंट हाउस के सामने बनने वाली नई पार्लियामेंट बिल्डिंग के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है.

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लॉकडाउन के समय मंजूरी मिलने पर आपत्ति

एक्सपर्ट्स और कार्यकर्ता इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. लॉकडाउन के समय पोजेक्ट को मंजूरी मिलने पर उन्होंने आपत्ति जताई है. कांग्रेस ने इस फैसले की निंदा की है और इस प्रोजेक्ट को आगे के लिए टालने की मांग की है. कांग्रेस का कहना है कि कोरोनावायरस संकट के समय बहुत से लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है.

23 अप्रैल को केंद्रीय विस्टा कमेटी के विशेष सलाहकार समूह ने न्यू पार्लियामेंट बिल्डिंग के प्रपोजल पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की थी. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 900 करोड़ रुपये के आसपास है.

लॉकडाउन प्रतिबंधों के आधार पर स्वतंत्र सदस्यों ने इस मीटिंग को लेकर सवाल खड़े किए थे. हालांकि इस कमेटी को प्लाट नंबर 118, नई दिल्ली प्रोजेक्ट पर कोई आपत्ति नहीं थी.

‘राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण है प्रोजेक्ट’

मीटिंग में यह बात निकलकर सामने आई थी कि राष्ट्रहित में यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण है, इसलिए इसमें देरी नहीं की जा सकती है. साथ ही इस प्रोजक्ट की जो समयसीमा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े किए हैं. सिंघवी का कहना है कि ऐसे समय में जब देश और सरकार गंभीर नकदी संकट का सामना कर रहा है, तब अलग बिल्डिंग बनाने की क्या जरूरत है.

उन्होंने कहा कि सरकार को इस धन का इस्तेमाल वेटिंलेटर्स खरीदने और बेरोजगार मजदूरों को कैश देने में करना चाहिए, जो लॉकडाउन में देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं.

तीन चरणों में पूरा होगा निर्माण कार्य

बता दें कि संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय और इसके आसपास राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैले हरित क्षेत्र में मौजूद सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की महत्वाकांक्षी योजना को आकार दिया जाएगा. आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित इस योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा.

पहले चरण में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर के दायरे में मौजूद ‘सेंट्रल विस्टा क्षेत्र’ को 2021 तक नया रूप दिया जाना है. जबकि मौजूदा और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक संसद भवन की नई इमारत का निर्माण 2022 तक और तीसरे चरण में सभी केन्द्रीय मंत्रालयों को एक ही स्थान पर समेकित करने के लिए प्रस्तावित समग्र केन्द्रीय सचिवालय का निर्माण 2024 तक करने का लक्ष्य है.

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