गांधी परिवार की विदेश यात्राओं पर कमांडोज का साथ रहना अनिवार्य, जानिए क्‍यों बनी थी SPG?

अगर SPG सुरक्षा प्राप्‍त व्‍यक्ति विदेश जाता है तो कमांडोज को उनके साथ जाना होगा. वे साये की तरह साथ रहेंगे.
SPG, गांधी परिवार की विदेश यात्राओं पर कमांडोज का साथ रहना अनिवार्य, जानिए क्‍यों बनी थी SPG?

स्‍पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप (SPG) से जुड़े नियमों में केंद्र ने बदलाव किया है. सभी SPG कर्मचारियों को सुरक्षा प्राप्‍त व्‍यक्तियों के साथ हमेशा रहेंगे. अगर SPG सुरक्षा प्राप्‍त व्‍यक्ति विदेश जाता है तो एसपीजी को उनके साथ जाना होगा.

SPG कांग्रेस की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे और सांसद राहुल गांधी, बेटी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सुरक्षा करती है. हाल के दिनों में, जब भी इनमें से कोई विदेश गया तो पहली लोकेशन तक तो एसपीजी कर्मचारी साथ गए. इसके बाद उन्‍हें प्राइवेसी का हवाला देकर भारत वापस भेज दिया गया.

नई गाइडलाइंस के बाद, गांधी परिवार को अपनी यात्रा से जुड़ी सारी जानकारी सबमिट करनी होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्‍हें पिछले दौरे की जानकारियां भी देने को कहा गया है. केंद्र ने यह भी साफ किया है कि इन गाइडलाइंस का पालन नहीं होता तो सुरक्षा कारणों से विदेश यात्रा रोकी जा सकती है.

1985 में बनी थी SPG

SPG का गठन 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्‍या के बाद हुआ था. 1988 में एसपीजी एक्‍ट पास हुआ जिसमें प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्‍मा इसके पास आ गया. 1989 में वीपी सिंह की सरकार ने एसपीजी कवर को पूर्व पीएम राजीव गांधी के लिए बढ़ाया था.

1991 में राजीव गांधी की हत्‍या के बाद, एसपीजी एक्‍ट में फिर बदलाव हुआ. सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवारों को कम से कम 10 साल के लिए SPG सुरक्षा देने का नियम बना. 2002 में फिर संशोधन कर हर साल सुरक्षा की समीक्षा करने का प्रावधान डाला गया.

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