जजों की नियुक्ति को लेकर फिर असहमति, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को दो नाम लौटाए

कॉलेजियम ने जो दो नाम भेजे थे, केंद्र सरकार को उनकी वरिष्‍ठता पर आपत्ति है.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से भेजे गए दो जजों के नाम वापस लौटा दिए हैं. PTI के मुताबिक, सरकार ने इसके पीछे वरिष्‍ठता को वजह बताया है और कॉलेजियम से फैसले पर पुनर्व‍िचार करने को कहा है. कॉलेजियम की ओर से 12 अप्रैल को झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ए.एस. बोपन्‍ना को प्रमोट किए जाने की सिफारिश की थी. एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की आपत्ति के बाद इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कॉलेजियम जल्‍द बैठक करेगा.

जस्टिस बोस मूल रूम से कलकत्‍ता हाई कोर्ट से आते हैं, वे जजों की अखिल भारतीय वरिष्‍ठता में 12वें नंबर पर हैं. वहीं कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस बोपन्‍ना वरिष्‍ठता सूची में 36वें स्‍थान पर हैं. 12 अप्रैल को जस्टिस बोपन्‍ना और जस्टिस बोस के नाम की संस्‍तुति करते समय कॉलेजियम ने कहा था कि उसने उनकी योग्यता, सत्‍यनिष्‍ठा और “मुख्य न्यायाधीशों की अखिल भारतीय आधार पर वरिष्ठता” और हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों को ध्‍यान में रख फैसला किया है.

कॉलेजियम, सुप्रीम कोर्ट जजों के शीर्ष पांच जजों की ऐसी संस्‍था है जो शीर्ष अदालत में जजों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है. भारत के प्रधान न्‍यायाधीश इसकी अध्‍यक्षता करते हैं.

पहली बार अनबन नहीं

जजों की नियुक्ति को लेकर सरकार और न्‍यायपालिका के बीच असहमति पहली बार नहीं है. पिछले साल 26 अप्रैल को, केंद्र ने जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति से जुड़ी फाइल लौटा दी थी. तब केंद्र ने कहा था कि अखिल भारतीय न्यायाधीश की वरिष्ठता के क्रम में वह 42वें स्थान पर आते हैं और उच्च न्यायालयों के 11 मुख्य न्यायाधीश उनसे वरिष्ठ हैं. केंद्र ने यह भी कहा था कि उनका मूल हाई कोर्ट, केरल हाई कोर्ट का सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्‍त प्रतिनिधित्‍व है.

जस्टिस जोसेफ के नाम की संस्तुति 10 जनवरी को कर दी गई थी. सरकार द्वारा कॉलेजियम को विचार के लिए लौटाए जाने के बाद उनकी नाम की सिफारिश दोबारा 17 जुलाई को की गई. कॉलेजियम ने जोसेफ को सबसे अधिक योग्य एवं सक्षम न्यायाधीश बताया था.

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