ISRO has just 3 days to re-establish contact with Vikram lander, लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ तीन दिन, ये है वजह
ISRO has just 3 days to re-establish contact with Vikram lander, लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ तीन दिन, ये है वजह

लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ तीन दिन, ये है वजह

7 सितंबर को सुबह 1.50 बजे के आसपास चांद के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई थी.
ISRO has just 3 days to re-establish contact with Vikram lander, लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ तीन दिन, ये है वजह

इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के वैज्ञानिकों की अब चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की उम्मीद अब ख़त्म होती जा रही है. क्योंकि चांद पर अब रात होने वाली है. दरअसल चांद पर एक दिन पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर जब चांद पर उतरा था तो वहां सुबह थी. लेकिन 20-21 सितंबर को वहां रात हो जाएगी. फ़िलहाल चांद पर शाम है.

यानी कि 20-21 सितंबर तक अगर इसरो या दुनिया की किसी अन्य एजेंसी विक्रम लैंडर से संपर्क साधने में सफल रहता है तो ठीक अन्यथा रात में संपर्क साधना बेहद मुश्किल भरा होगा. जानकारों के मुताबिक वहां सिर्फ अंधेरे की समस्या नहीं होगी बल्कि तापमान भी एक बड़ा फैक्टर होगा. दरअसल चांद पर रात में तापमान घटकर माइनस 183 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है और इस तापमान में विक्रम लैंडर के इलेक्ट्रॉनिक हिस्से नष्ट हो जाएंगे. यानी कि विक्रम लैंडर से संपर्क लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने चंद्रयान-2 मिशन में लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद भी साथ देने के लिए आभार जताया है. देशवासियों का आभार जताते हुए इसरो ने ट्वीट किया, ‘हमारा साथ देने के लिए धन्यवाद. दुनिया भर में भारतीयों की उम्मीदों और सपनों के बल पर हम आगे बढ़ना जारी रखेंगे. हमें हमेशा आसमान छूने के लिए प्रेरित करने के लिए धन्यवाद.’

ज़ाहिर है 7 सितंबर को सुबह 1.50 बजे के आसपास चांद के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हुई थी. लैंडिंग के महज 2.1 किलोमीटर पहले लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क टूट गया था. बताया जा रहा है कि लैंडर विक्रम उस रोज़ तेज गति से चांद की सतह पर तिरछा गिरा. नतीजा यह हुआ कि लैंडर विक्रम का इसरो से संपर्क ही टूट गया.

इस घटना के बाद से लगातार इसरो द्वारा लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है. यहां तक कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) भी लैंडर से संपर्क बनाने का प्रयास कर रहे हैं. NASA अपने डीप स्पेस नेटवर्क के तीन सेंटर्स (स्पेन का मैड्रिड, अमेरिका के कैलिफोर्निया में गोल्डस्टोन और ऑस्ट्रेलिया का कैनबरा) से लगातार चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर और लैंडर से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है.

इस तीन जगहों पर लगे ताकतवर एंटीना चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से तो संपर्क साध पा रहे हैं, लेकिन विक्रम लैंडर को भेजे जा रहे संदेशों का कोई जवाब नहीं आ रहा है. जबकि, चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर उसे मिलने वाले संदेशों का जवाब दे रहा है.

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