Chandrayaan-2: पूरे देश को था सफल लैंडिंग का इंतजार लेकिन इन 90 सेकंड ने बदल दिया सब कुछ

इसरो के एक वैज्ञानिक ने कहा कि लैंडर का नियंत्रण उस समय समाप्त हो गया होगा, जब नीचे उतरते समय उसके थ्रस्टर्स को बंद किया गया होगा.

भारत के चंद्र मिशन को शनिवार तड़के उस समय झटका लगा, जब लैंडर विक्रम से चंद्रमा के सतह से महज दो किलोमीटर पहले इसरो का संपर्क टूट गया. इसके साथ ही 978 करोड़ रुपये लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का भविष्य अंधेरे में झूल गया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने संपर्क टूटने की घोषणा करते हुए कहा कि चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी पहले तक लैंडर का प्रदर्शन योजना के अनुरूप था. उन्होंने कहा कि उसके बाद उसका संपर्क टूट गया.

दुनियाभर के लोगों को लैंडिंग के खास पल का इंतजार था. इसरो सेंटर में सभी वैज्ञानिकों की नजरें अलग-अलग स्क्रीन पर जा टिकी थीं. अंतिम समय तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन आखिरी के 90 सेकंड में जो हुआ उससे चांद पर सफलतापूर्वक पहुंचने का सपना पूरा नहीं हो पाया.

‘चंद सेकंड पहले सब बदल गया’
वैज्ञानिकों के हाव-भाव चांद पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग से महज चंद सेकंड पहले ही बदल गया. लोग निराश होने लगे. सबकी नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जा टिकीं. आखिरकार इसरो चीफ ने आखिरी घटनाक्रम के बारे में ब्रीफ किया. इसके बाद पीएम मोदी वैज्ञानिकों के बीच से उठकर चल दिए और जाते-जाते कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है.

इसरो चीफ ने आखिरी 15 मिनट को सबसे अहम बताया था. रात 1 बजकर 38 मिनट पर लैंडर विक्रम चांद की ओर बढ़ चला था. विक्रम की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग का समय रात 1 बजकर 52 मिनट और 54 सेकंड होनी थी.

अब महज आखिरी के 90 सेकंड ही बचे थे और लैंडर विक्रम चांद से महज 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था. ठीक इसी वक्त लैंडर से ग्राउंड स्टेशन का संपर्क टूट गया. इसके बाद इसरो ने ऐलान किया कि चांद से 2.1 किलोमीटर तक सबकुछ ठीक था, लेकिन उसके बाद लैंडर से उसका संपर्क टूट गया.

‘दुर्घटनाग्रस्त हो गया होगा’
इसरो के एक वैज्ञानिक के अनुसार, लैंडर का नियंत्रण उस समय समाप्त हो गया होगा, जब नीचे उतरते समय उसके थ्रस्टर्स को बंद किया गया होगा और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया होगा, जिसके कारण संपर्क टूट गया. हालांकि 978 करोड़ रुपये लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है.

इसरो के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध के साथ आईएएनएस को बताया, “मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत -लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर- नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत -चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है.”

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