मिशन चंद्रयान-2: तकनीकी खराबी के कारण टला लॉन्च, ISRO जल्द करेगा नई तारीख का ऐलान

लगभग 44 मीटर लंबा, 640 टन का जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क तृतीय (जीएसएलवी-एमके तृतीय) एक सफल फिल्म के हीरो की तरह सीधा खड़ा है. रॉकेट में 3.8 टन का चंद्रयान अंतरिक्ष यान है. रॉकेट को 'बाहुबली' उपनाम दिया गया है.

LIVE UPDATES:

  • इसरो ने आधिकारिक ट्विटर हैंड से जानकारी देते हुए कहा कि लॉन्चिंग के 56 मिनट पहले लॉन्च व्हिकल सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण आज चंद्रयान-2 को लॉन्च नहीं किया जाएगा. जल्द ही लॉन्चिंग की अगली तारीख का ऐलान किया जाएगा.
  • सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र की सभी स्क्रीन्स ब्लैंक हो गई हैं. लॉन्चिंग रोके जाने का कारण तकनीकी बताया जा रहा है. हालांकि असली कारणों की आधिकारिक जानकारी अभी नहीं दी गई है. इसरो के पीआरओ गुरू प्रसाद ने घोषणा के पहले कुछ समय का इंतजार करने की बात कही है.
  • आज लॉन्च नहीं होगा चंद्रयान-2, तकनीकी कारणों से चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग रोक दी गई है. ISRO जल्द करेगा नई तारीख का ऐलान. दूरदर्शन के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट कर ये जानकारी दी गई है.
  • श्रीहरिकोटा के स्पेस सेंटर की घड़ी 56:24 पर रुक गई है. चंद्रयान-2 के अंतरिक्ष में जाने की घड़ी में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ताजा जानकारी के मुताबिक GSLVMkIII-M1 के क्रायोजेनिक स्टेज में लिक्विड हाइड्रोजन भरी जाने की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है.

GSLVMkIII-M1 के क्रायोजेनिक स्टेज में लिक्विड ऑक्सीजन भरी जा चुकी है और लिक्विड हाइड्रोजन भरी जा रही है.

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने ट्वीट कर चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण की प्रार्थना की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘हम सभी उत्सुक हैं उस महानतम क्षण के साक्षी बनने के लिए जब भारत चंद्रयान 2 का सफल प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष में एक नया इतिहास रचेगा. मैं इस मिशन की सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हूं तथा ISRO की टीम को अग्रिम शुभकामनाएं देती हूं.

चंद्रयान-2 को ले जाने वाले भारत के भारी रॉकेट का प्रक्षेपण 15 जुलाई को तड़के किए जाने के लिए उल्टी गिनती सुचारु रूप से चल रही है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन के.सिवन ने कहा, “उल्टी गिनती रविवार सुबह 6.51 बजे शुरू हो गई.”

लगभग 44 मीटर लंबा, 640 टन का जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क तृतीय (जीएसएलवी-एमके तृतीय) एक सफल फिल्म के हीरो की तरह सीधा खड़ा है. रॉकेट में 3.8 टन का चंद्रयान अंतरिक्ष यान है. रॉकेट को ‘बाहुबली’ उपनाम दिया गया है.

अपनी उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क 3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी पार्किं ग में 170 गुणा 40400 किलोमीटर की कक्षा में रखेगा.

जानिए महत्वपूर्ण बिंदु
1- ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा. दुनिया में अंतरिक्ष महाशक्ति कहलाने वाले भारत के लिए यह स्पेस साइंस में लंबी छलांग है.
2- धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3.844 किलोमीटर है.
3- वहां से चंद्रमा के लिए लंबी यात्रा शुरू होगी. चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे.
4- लैंडर-विक्रम छह सितंबर को चांद पर पहुंचेगा और उसके बाद प्रज्ञान यथावत प्रयोग शुरू करेगा.
5- उल्टी गिनती के दौरान रॉकेट व अंतरिक्षयान की प्रणालियां जांच से गुजरेंगी और रॉकेट इंजनों में ईंधन भरा जाएगा.
6- इसरो के अनुसार, लिक्विड कोर स्टेज में तरल ईंधन भरने का काम रविवार को पूरा हो गया.
7- जीएसएलवी-एमके 3 को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में 4 टन श्रेणी के उपग्रहों को ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है.
8- व्हेकिल में दो ठोस स्ट्रेप ऑन मोटर हैं. इसमें एक कोर तरल बूस्टर है और ऊपर वाले चरण में क्रायोजेनिक है.
9- अब तक इसरो ने तीन जीएसएलवी-एमके 3 रॉकेट भेजे हैं.
10- इसमें पहला 18 दिसंबर 2014 को, दूसरा 5 फरवरी 2017 को व तीसरा 14 नवंबर 2018 को भेजा गया.
11- जीएसएलवी-एमके 3 का इस्तेमाल भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए किया जाएगा, जो वर्ष 2022 के लिए निर्धारित है.

जानिए जरूरी बातें पॉइंट में

  • चंद्रयान-2 उड़ान भरने के बाद सीधे चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरेगा
  • चंद्रमा के साउथ पोल पर किसी भी देश का लैंडर नहीं उतरा है
  • अंधेरे में रहने वाले दक्षिणी ध्रुव पर पानी होने की संभावना ज्यादा है
  • दक्षिणी ध्रुव के क्रेटर बेहद ठंडे हैं. जहां सोलर सिस्टम के पुराने जीवाश्म मिलने की उम्मीद है
  • चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान जीएसएलवी मार्क-3 चांद पर लेकर जाएगा
  • बाहुबली जीएसएलवी मार्क-3 भारत में बना है
  • चंद्रयान-2 के सभी पेलोड भारत में बने हैं
  • चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर में यूरोप के 3 और अमेरिका के 2 पेलोड थे
  • चंद्रयान-2 में 3 मॉड्यूल आर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं
  • रोवर प्रज्ञान सोलर पावर उपकरणों से लैस है
  • 27 किलो वजनी और 1 मीटर लंबा रोवर में 2 पेलोड होंगे
  • सोलर एनर्जी से चलने वाला रोवर अपने 6 पहियों की मदद से चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने जमा करेगा
  • साल 2008 में चंद्रयान-1 मिशन की कमी से 29 अगस्त 2009 को ही खत्म हो गया था
  • अबकी बार रोवर के लिए पावर की कोई दिक्कत नहीं होगी
  • 1400 किलो वजनी विक्रम नाम का लैंडर की लंबाई 3.5 मीटर है
  • 3 पेलोड वजन का लैंडर चंद्रमा पर उतरकर रोवर को स्थापित करेगा
  • 3500 किलो वजनी ऑर्बिटर की लंबाई 2.5 मीटर है
  • ऑर्बिटर अपने साथ 8 पेलोड को लेकर जाएगा
  • ऑर्बिटर अपने पेलोड के साथ चंद्रमा का चक्कर लगाएगा
  • ऑर्बिटर और लैंडर धरती से सीधे संपर्क करेंगे
  • रोवर धरती से सीधे कोई संवाद नहीं कर पाएगा
  • 6 सितंबर को चंद्रमा के साउथ पोल पर चंद्रयान-2 उतरेगा
  • 3800 किलो वजन वाले चंद्रयान-2 पर करीब 1000 करोड़ खर्च हुए हैं
  • चंद्रयान-2 को तैयार करने में इसरो को 11 साल का वक्त लगा है
  • चंद्रयान-2 चांद पर पूरे 52 दिन बिताएगा
  • भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनेगा

चंद्रयान-2 की सफलता के बाद मिशन चंद्रयान-3

चंद्रयान-2 के चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करते ही ऑर्बिटर, लैंडर से अलग हो जाएगा. लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरते ही रोवर से अलग हो जाएगा. ऑर्बिटर और रोवर कई अत्याधुनिक और संवेदनशील उपकरणों, कैमरों और सेंसर्स से लैस हैं.

ऑर्बिटर और रोवर मिलकर चंद्रमा की सतह पर मिलने वाले मिनरल्स और अन्य पदार्थों के बारे में इसरो को डेटा भेजेंगे. जिसकी सहायता से इसरो चांद की स्टडी करेगा. इसरो का दावा है कि आजतक चंद्रमा के साउथ पोल पर किसी देश का लैंडर नहीं उतरा है.

चंद्रयान-2 चंद्रमा के मौसम के साथ खनिजों और उसकी सतह पर फैले रासायनिक तत्वों का भी अध्ययन करेगा. चंद्रयान-2 की कामयाबी पर चीन और अमेरिका के साथ पूरी दुनिया नजरे गड़ाए बैठी है. 10 साल में दूसरी बार चांद पर मिशन भेजने वाला इसरो चंद्रयान-2 की सफलता के बाद 2020 के अंत तक मिशन चंद्रयान-3 की तरफ कदम बढ़ाएगा.