Chandrayaan-2 की लैंडिंग से पहले धड़कनें तेज, चांद पर बस्तियां बसाने की तैयारी

भारत इस उपलब्धि के साथ ही ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा. अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही चांद पर अपना यान उतारा है.

सवा अरब भारतीयों समेत दुनियाभर के लोगों की निगाहें आज चंद्रयान-2 पर टिकी हुई हैं. जैसे-जैसे चंद्रयान-2 चांद की सतह के करीब पहुंचता जा रहा है, वैसे-वैसे सभी की धड़कने तेज होती जा रही हैं. इन सभी को इस वक्त विक्रम मॉड्यूल की सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का इंतजार है. शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच लैंडर चांद पर उतरने वाला है.

भारत इस उपलब्धि के साथ ही ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा. अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने ही चांद पर अपना यान उतारा है. चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था. इसके प्रक्षेपण के लिए इसरो ने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क3 का इस्तेमाल किया था.

‘सफल सॉफ्ट-लैंडिंग की प्रार्थना करें’
जाने-माने वैज्ञानिक एम.अन्नादुरै का कहना है कि 2008 में भारत के पहले चंद्रयान मिशन की लॉन्चिंग का दिन भी काफी तनावभरा था. इसरो में मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अब हर किसी का ध्यान लैंडर (विक्रम) में होने वाली गतिविधि पर टिका है. लिहाजा, मैं यही कहूंगा कि सफल सॉफ्ट-लैंडिंग के लिए सभी प्रार्थना करें.

चंद्रयान-2 लैंडिंग से पहले के सभी अहम पड़ाव पार कर चुका है. दो सितंबर को यान के ऑर्बिटर से लैंडर को अलग किया गया था. इसके बाद तीन और चार सितंबर को इसकी कक्षा को कम (डी-ऑर्बिटिंग) करते हुए इसे चांद के नजदीक पहुंचाया गया.


क्या होना है बाकी?
छह-सात सितंबर की दरम्यानी रात एक से दो बजे के बीच लैंडर को चांद पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी. लैंडर पर लगे कैमरे की मदद से उसका कंप्यूटर-सॉफ्टवेयर खुद यह तय करेगा कि ठीक किस जगह पर उतरना है. लैंडर के उतरने के चार घंटे बाद रोवर ‘प्रज्ञान’ को भी उससे बाहर निकाल दिया जाएगा.

चांद पर बसेगा मानव?
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्षयात्री जेरी लिनेंजर ने कहा कि भारत का चंद्रयान-2 मिशन न केवल उसकी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि इससे चांद पर मानवों के बसने का रास्ता भी खुल जाएग. चंद्रयान-2 यहां पानी की पुष्टि करेगा. अगर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी हुआ तो यह मानव अभियानों के लिए एक बड़ी कामयाबी होगी.

आश्वस्त नजर आ रहे वैज्ञानिक
इसरो अध्यक्ष के सिवन ने हाल ही में कहा था कि अंतरिक्ष एजेंसी ने मिशन की सफलता के लिए मानवीय रूप से हर संभव प्रयास किया है. शीर्ष अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने भी सफलता को लेकर भरोसा जाहिर किया था. इस बीच अन्य दिग्गज वैज्ञानिक भी चंद्रयान-2 की लैंडिंग को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रहे हैं.

इसरो प्रमुख सिवन ने बताया कि लैंडर चांद पर कुछ उसी तरह उतरेगा, जैसे साइंस फिक्शन फिल्मों में उड़न तश्तरियों को उतरते हुए दिखाया जाता है. लैंडर पर लगे कैमरे की मदद से उसका कंप्यूटर-सॉफ्टवेयर खुद यह तय करेगा कि ठीक किस जगह पर उतरना है. लैंडर के उतरने के चार घंटे बाद रोवर ‘प्रज्ञान’ भी उससे बाहर निकल जाएगा.

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