चांद पर ISRO के शक्ति प्रदर्शन के पीछे इन महिलाओं की ताकत

10 साल के भीतर इसरो चंद्रमा पर अपनी कामयाबी दोहराने जा रहा है. चंद्रयान मिशन लॉन्च होने को है लेकिन ये मिशन खास क्यों है, जानिए.

अंतरिक्ष में भारत एक बड़ी छलांग लगाने जा रहा है लेकिन इस उपलब्धि में कुछ बेहद खास है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपने चंद्रयान-2  मिशन को दूरा करने से महज़ कुछ कदम दूर है. एक बार फिर से चंद्रमा पर उपग्रह भेजा जा रहा है. वैसे अक्टूबर 2008 में ये कारनामा इसरो कर चुका है, इस बार तो दोहराव होगा.

महिला शक्ति का प्रदर्शन होगा चंद्रयान-2 मिशन
खास बात ये है कि चंद्रयान-2 मिशन को कामयाब बनाने में जुटी टीम में 30 फीसदी महिलाएं हैं. खुद इसरो के चेयरमैन डॉ के सिवन ने इस बारे में जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि – इसरो में हम पुरुष और महिला वैज्ञानिकों में अंतर नहीं समझते. यहां लिंगभेद नहीं है. जो भी सक्षम होता है उसे बेहतरीन काम करने का मौका मिलता है.

वैसे इसरो के कई मिशन में महिलाओं का अहम योगदान है लेकिन चंद्रयान-2 की तो प्रोजेक्ट डायरेक्टर ही एम वनिता हैं. वो इतने बड़े स्तर पर काम करनेवाली पहली महिला वैज्ञानिक हैं. वनिता डिज़ाइन इंजीनियर के तौर पर इसरो से जुड़ी थीं. 2006 में उन्हें बेस्ट वुमेन सांइटिस्ट अवॉर्ड से नवाज़ा गया. उनके साथ काम करने वाली महिला वैज्ञानिकों में अनुराधा टीके संचार उपग्रहों और नाविक इंस्टॉलेशन की विशेषज्ञ हैं. इसके पहले इसरो ने वीआर ललितांबिका को मानव मिशन गगनयान का डायरेक्टर भी बना चुका है.

chandrayaan, चांद पर ISRO के शक्ति प्रदर्शन के पीछे इन महिलाओं की ताकत

ये हैं इसरो की तेज़-तर्रार महिला वैज्ञानिक
नंदिनी हरिनाथ – नंदिनी हरिनाथ की पहली नौकरी इसरो में ही रही. उन्हें दो दशकों का अनुभव है. स्टार ट्रैक फिल्म सीरीज़ देखने के बाद उनकी रुचि विज्ञान में ऐसी बढ़ी कि वो इसरो में डिप्टी डायरेक्टर पद तक जा पहुंचीं.

एन वलारमथी – भारत के पहले देशज राडार इमेजिंग उपग्रह रीसैट-1 की लॉन्चिंग में एन वलारमथी का अहम योगदान रहा है. टीके अनुराधा के बाद वे इसरो के उपग्रह मिशन की प्रमुख बनने वाली दूसरी महिला अधिकारी हैं. इसके अलावा वलारमथी ऐसी पहली महिला हैं जो रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट में प्रयुक्त मिशन की हेड हैं.

रितु करढाल –इसरो के कई प्रोजेक्ट्स में शामिल रही रितु मंगलयान के प्रोजेक्ट में  डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर रही हैं.

मौमिता दत्ता – मौमिता ने बचपन में जब चंद्रयान मिशन के बारे में पढ़ा तब शायद वो नहीं जानती होंगी कि वो एक दिन इसरो की टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी. उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी से प्रायोगिक भौतिक विज्ञान में एमटेक किया है.

मीनल संपथ – मिशनमंगलयान के लिए उन्होंने दिन में 18-18 घंटे काम किया था. वो इसरो की सिस्टम इंजीनियर के तौर पर 500 वैज्ञानिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं.

कीर्ति फौजदार – कीर्ति इसरो की युवा कम्प्यूटर वैज्ञानिक हैं. इनका काम है उपग्रह को उनकी सही कक्षा में स्थापित करना. वे उस टीम का हिस्सा हैं, जो उपग्रहों और अन्य मिशन पर लगातार अपनी नजर बनाए रखती हैं.

टेसी थॉमस –टेसी भारत की मिसाइल महिला हैं जिन्होंने अग्नि-4 व अग्नि-5 मिशन में प्रमुख योगदान दिया. टेसी थॉमस इसरो और डीआरडीओ दोनों के लिए काम करती हैं.

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क्या है मिशन चंद्रयान? 

चंद्रयान उपग्रह को 22 जुलाई के दिन दोपहर 2.43 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से छोड़ा जाना है. अनुमान है कि 6-7 सितंबर को वो चंद्रमा के धरातल पर उतरेगा.  ये चांद के दक्षिणी हिस्से में उतर कर छानबीन करेगा. लैंडिंग में इसे 15 मिनट लगने हैं. पहली बार भारत चंद्रमा की सतह पर ‘सॉफ़्ट लैंडिंग’ करेगा जो सबसे मुश्किल काम माना जाता है. लैंडिंग के लिए दक्षिणी हिस्से का चयन करने के पीछे इसरो ने वजह बताई कि जितने प्रकाश और समतल जगह की ज़रूरत है वो वहीं मिल सकता है.

इसरो के मुताबिक लैंडिंग के बाद रोवर का दरवाज़ा खुलेगा और यह क्षण महत्वपूर्ण होगा. लैंडिंग के बाद रोवर के निकलने में चार घंटे का समय लगेगा. इसके 15 मिनट के भीतर ही इसरो को लैंडिंग की तस्वीरें मिल सकती हैं. इसरो ने कहा- हम वहां की चट्टानों को देख कर उनमें मैग्निशियम, कैल्शियम और लोहे जैसे खनिज को खोजने का प्रयास करेंगे. इसके साथ ही वहां पानी होने के संकेतों की भी तलाश होगी और चांद की बाहरी परत की भी जांच की जाएगी.

इसकी कुल लागत 600 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. 3.8 टन वज़नी चंद्रयान-2 को यानी जीएसएलवी मार्क-तीन के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. चंद्रयान-2 बेहद खास उपग्रह इसलिए है क्योंकि इसमें एक ऑर्बिटर है, एक ‘विक्रम’ नाम का लैंडर है और एक ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर है. दुनिया की नज़र इस मिशन पर है. दस साल में दूसरी बार चंद्रमा पर भारत उपग्रह भेज रहा है.