किसानों से बात किए बिना बदल दिया 40 साल पुराना कानून, बर्बाद हो जाएंगी मंडियां: कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी ने मंडियों के खत्म हो जाने की स्थिति में इससे जुडे़ व्यवसायों और रोजगारों के खत्म हो जाने का भी जिक्र किया. इसी के साथ कांग्रेस पार्टी का कहना है कि ये तीनों कानून संघीय ढांचे पर भी सीधा-सीधा हमला बोलते हैं.

कांग्रेस प्रेस कॉन्फ्रेंस
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कृषि बिलों को लेकर एक तरफ पंजाब और हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि अगर अनाजमंडी या सब्जीमंडी व्यवस्था APMC पूरी तरह खत्म हो जाएगी तो कृषि उपज खरीद प्रणाली भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी. ऐसे में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कैसे मिलेगा, कहां से मिलेगा और कौन देगा. इसी के साथ उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर सरकार वाकई में किसानों के हित में सोच रही है तो वो इन कानूनों में MSP की गारंटी क्यों नहीं दे रही.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार के उस दावे पर भी हमला बोला, जिसमें कहा गया है कि अब किसान अपनी फसल देश में कहीं भी बेच सकता है. कांग्रेस के मुताबिक ये दावा झूठा है. उनका कहना है कि आज भी किसान अपनी फसल किसी भी राज्य में ले जाकर बेच सकता है. कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि कृषि सेंसस 2015-16 के मुताबिक देश का 86 फीसदी किसान 5 एकड़ से कम भूमि का मालिक है. जमीन की औसत मल्कियत 2 एकड़ या उससे कम है. ऐसे में 86 फीसदी किसान अपनी उपज पास की मंडी के अलावा कहीं और ट्रांसपोर्ट कर न ले जा सकता है और न ही बेच सकता है.

कृषि बिल के कारण बर्बाद हो जाएंगी मंडियां

इसी कड़ी में कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता टी एस सिंहदेव ने कहा है कि बिना किसानों से बात किए 40 साल पुराना कानून बदल दिया गया है. उन्होंने हाल ही में पारित किए गए बिलों को लेकर कहा कि ये तीनों कृषि विधेयक शर्मनाक तरीके से संसद में पास कराए गए हैं. उन्होंने कहा कि बिल पास कराने के लिए राज्यसभा में मत विभाजन तक नहीं कराया गया. इस कारण विरोधी दलों ने राष्ट्रपति से विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह किया है. सिंहदेव ने कहा कि इन विधेयकों के कारण मंडियां बर्बाद हो जाएंगी.

कांग्रेस पार्टी ने मंडियों के खत्म हो जाने की स्थिति में इससे जुडे़ व्यवसायों और रोजगारों के खत्म हो जाने का भी जिक्र किया. इसी के साथ कांग्रेस पार्टी का कहना है कि ये तीनों कानून संघीय ढांचे पर भी सीधा-सीधा हमला बोलते हैं. पार्टी के नेताओं ने बताया कि खेती और मंडियां संविधान के सातवें शेड्यूल में राज्य सरकार के अधिकारों के क्षेत्र में आते हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने इस मामले पर राज्यों से राय लेना तक जरूरी नहीं समझा.

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