कंठी माला कल की बातें! अब मशीन से जप रहे प्रभु का नाम

नयी दिल्ली वो ज़माना गया जब आपको हाथ में रूद्राक्ष या तुलसी की माला लिए राम नाम जपते साधु संन्यासी नज़र आ जाते थे. हाईटेक होते देश के साथ संत भी अब कदमताल मिलाते नज़र आ रहे हैं. यदि इसकी झलक पानी हो तो चलिए प्रयागराज में लगने वाले कुम्भ मेले में. मोबाइल और लैपटॉप […]

नयी दिल्ली
वो ज़माना गया जब आपको हाथ में रूद्राक्ष या तुलसी की माला लिए राम नाम जपते साधु संन्यासी नज़र आ जाते थे. हाईटेक होते देश के साथ संत भी अब कदमताल मिलाते नज़र आ रहे हैं. यदि इसकी झलक पानी हो तो चलिए प्रयागराज में लगने वाले कुम्भ मेले में.

मोबाइल और लैपटॉप के तो ये पहले ही मुरीद हो चुके थे. अब मेले में शिरकत करने आने वाले साधु संन्यासी स्फटिक या तुलसी की माला के बजाय डिजिटल मशीन से अपने आराध्य का नाम जपने में जुट गए हैं.हालांकि ऐसे संन्यासियों की संख्या अभी कम नज़र आ रही है, लेकिन जप के लिए यह मशीन अब इनके बीच लोकप्रिय होती जा रही है. मुंबई और हरिद्वार से निरंजनी अखाड़े में पहुँचने वाले संन्यासी भगवान का जप करने के लिए काउंटिंग मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक़ इसके पीछे ये तर्क दिए जा रहे हैं कि आराध्य का नाम जपने में कोई गलती नहीं हो सकेगी. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि काउंटिंग मशीन के जरिये साधु संन्यासी पूरे के पूरे 108 बार अपने प्रभु का नाम ले सकेंगे, वो भी बिना किसी गलती के.