घाटी में बढ़ते आतंकवाद के लिए चिदंबरम ने क्यों ठहराया सरकार को ज़िम्मेदार ?

पूर्व वित्तमंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने मोदी सरकार को कश्मीर मुद्दे पर घेरा है. घाटी में बढ़ते आतंक के लिए उन्होंने सरकार की नीति को ही कुसूरवार ठहरा दिया.

घाटी में बढ़ी आतंकी वारदातों के लिए कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम ने सरकार की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि कश्मीरियों से बात करने के बजाय सरकार ताकत पर ज़ोर दे रही है जिसने लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा तादाद में आतंकवाद की तरफ धकेल दिया है. साल 2018 और 2019 के शुरूआती महीनों को उन्होंने घुसपैठ, आम नागरिकों की मौत, सुरक्षाबलों को नुकसान के आधार पर सबसे खराब वक्त बताया.

चेन्नई में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम में देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री चिदंबरम सरकार की कश्मीर नीति पर ज़ोरशोर से बरसे.  उन्होंने कहा कि, ‘दूसरे राज्यों की तरह कश्मीर बिना शर्त भारतीय संघ में शामिल नहीं हुआ था. उसका विलय ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ के तहत भारत में हुआ था. सिवाय चार विषयों को छोड़कर उन्होंने बाकी सब बातों में स्वायत्त होने की बात कही थी. काफी लोग ये बात नहीं जानते मगर जो जानते भी हैं वो या तो भूल गए या फिर जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रहे हैं.’

चिदंबरम ने सरकार पर शक्ति प्रयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि कश्मीर को डील करने का सिर्फ एक ही रास्ता है कि हम लोगों के दिल और दिमाग को जीतें.

चिदंबरम इतने पर भी नहीं रुके बल्कि सरकारों पर कश्मीर की उस स्वायत्तता को नष्ट करने का इल्ज़ाम भी लगाया जो उन्हें देने का वादा किया गया था. इस दौरान उन्होंने पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह का ज़िक्र छेड़ते हुए कहा कि दोनों ही नेताओं को भरोसा था कि कश्मीर को स्वायत्तता देकर समस्या का समाधान किया जा सकता है. पूर्व गृहमंत्री ने कश्मीरियों के अधिकारों की वकालत करते हुए तर्क दिया कि अगर कश्मीरी अपनी फैक्ट्री लगाना चाहते हैं, दुकानों और संस्थाओं की स्थापना के लिए अपना कानून चाहते हैं, सड़क या टॉयलेट के लिए अपने कानून चाहते हैं तो इससे भारत की संप्रभुता खतरे में कैसे पड़ जाएगी.

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